
सामाजिक संस्थाएँ समाज की चेतना और सामूहिक शक्ति का प्रतीक होती हैं। उनका उद्देश्य केवल…
अधिक पढ़ेंगतांक से आगे– सम्यक् ज्ञान वस्तुओं को यथारीति जैसा का तैसा जानना सम्यक् ज्ञान है।…
अधिक पढ़ेंभगवान की आज्ञा का पालन ही आत्मकल्याण का प्रथम कदम मनुष्य केवल पेट भरने के…
अधिक पढ़ेंधर्म समस्त मानवजाति के लिए हितावह है। उसमें सबका हित निहित होता है। जैनधर्म में…
अधिक पढ़ेंएक विस्तृत समाजशास्त्रीय- तुलनात्मक अध्ययन भारतीय समाज में “लड़की का बाप” केवल एक पारिवारिक पद…
अधिक पढ़ेंआवश्यकता, स्वरूप, महत्व एवं लाभ– सरलता, सौम्यता, सदाचार, संतोष, विनय आदि, मानव जीवन रुपी…
अधिक पढ़ेंजैन समाज को इस बात पर गर्व है कि वे अहिंसा के पालन में दुनिया…
अधिक पढ़ेंतीव्र गति से हो रहे तथाकथित विकास तथा नश्वर भौतिक संसाधनों को प्राप्त करने की…
अधिक पढ़ें*क्र.16 से 30* 👉1️⃣6️⃣ यकीं आशा से, लक्ष्य आसॉं ही नहीं संभव बने। 👉1️⃣7️⃣ बदन…
अधिक पढ़ेंकिसी ने महाराज जी से पूछा की धर्म की सबसे सूक्ष्म परिभाषा क्या है ?…
अधिक पढ़ेंकवि रत्नाकर गृहस्थ होते हुए भी अत्यन्य शान्त थे एवं शिथिलाचार और रूढ़ियों के विरोधी…
अधिक पढ़ेंमनुष्य की बनाई हुई दुनिया में हर काम का मूल्य धन से आँका जाता है।…
अधिक पढ़ेंअशोका फाउंडेशन की ओर से अंधता निवारण महाभियान के तहत बैनाड़ में निःशुल्क नेत्र शिविर…
अधिक पढ़ेंजिन्दगी शुरू करेंगे हम, फिर नये सिरे से । मेहनत शुरू करेंगे हम, फिर नये…
अधिक पढ़ेंमधुर व्याख्यानी श्रद्धेय श्री गौतम मुनि जी म.सा. आदि ठाणा 3 का पल्लीवाल क्षेत्र में…
अधिक पढ़ेंआत्मा की संपूर्ण परिग्रहों से रहित अवस्था ही उपादेय है वही हमारा वास्तविक स्वरुप है।…
अधिक पढ़ेंचक्षुइन्द्रिय के वशीभूत, सुवेग चोर मद्दिल नाम के नगर में भर्तृमित्र नाम का एक सेठ…
अधिक पढ़ेंश्री पल्लीवाल जैन महिला मंडल द्वारा 24 मई 2026 को पक्षियों के लिए परिंडे रखें…
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