श्री पल्लीवाल जैन डिजिटल पत्रिका

अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा

(पल्लीवाल, जैसवाल, सैलवाल सम्बंधित जैन समाज)

-खटपट-

खटपट तब होती है जब हमारी समझदारी में कमी आ जाती है। समझदार व्यक्ति कलह करने में नहीं, समाधान करने में विश्वास करता है। वह मनमुटाव नहीं, मेल-मिलाप चाहता है; अनबन नहीं, अपनत्व चाहता है; साजिश नहीं, संधि चाहता है; विवाद नहीं, संवाद चाहता है।
खटपट नहीं शांति चाहता है।
खटपट तब उत्पन्न होती है जब दो व्यक्तियों के विचार बिल्कुल नहीं मिलते हो। आपस में मतभेद हो सकते हैं परंतु मनभेद नहीं होना चाहिए। मतभेद जब मनभेद का रूप ले लेता है तब व्यक्ति खटपट करने से स्वयं को रोक नहीं पाता है।
खटपट तब होती है, जब सहनशीलता, स्नेहशीलता और परस्पर सम्मान की भावना सूखने लगती है। जहाँ अहंकार बढ़ता है, वहाँ अपनापन घटने लगता है। इसलिए आवश्यकता है कि हम अपने विचारों में उदारता, व्यवहार में मधुरता और संबंधों में आत्मीयता बनाए रखें।

खटपट दूर करने के तीन प्रमुख उपाय
१-समझदारी – परिस्थिति को शांत मन से समझना और दूसरों के दृष्टिकोण का सम्मान करना।
२-समभाव – सभी के प्रति समान भाव रखना, बिना पक्षपात और पूर्वाग्रह के व्यवहार करना।
३-मौन – खटपट समभाव, समझदारी से समाप्त नहीं हो पा रही है तो मौन रहकर खटपट पर विराम लगाया जाना हितकर है।

यदि हम खटपट को मिटाकर इन सद्गुणों को अपने जीवन में अपनाएँ, तो परिवार, समाज और संगठन सभी में सौहार्द, प्रेम और शांति का वातावरण निर्मित हो सकता है।
वर्तमान समय में यही स्थिति अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा में हो रही है। अब उपरोक्त उपाय एवं सद्भावनाओं, सद्गुणो की
आवश्यकता अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा में भी अनुभव की जा रही है। महासभा केवल एक संगठन नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाला एक अतिआवश्यक माध्यम है। इस संगठन की शक्ति आपसी प्रेम, विश्वास, सहयोग और एकता में निहित है। यदि हम व्यक्तिगत मतभेदों को भुलाकर समाजहित को सर्वोपरि रखें, तो महासभा और अधिक सशक्त, संगठित और उन्नतिशील बन सकती है।
हम सबका प्रयास यही होना चाहिए कि मतभेद रह सकते हो तो भी मनभेद न हों, और संगठन में सदैव भाईचारा, सद्भाव तथा सामूहिक उन्नति की भावना बनी रहे।

श्रीचन्द जैन
पूर्व महामंत्री
अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा।

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