श्री पल्लीवाल जैन डिजिटल पत्रिका

अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा

(पल्लीवाल, जैसवाल, सैलवाल सम्बंधित जैन समाज)

स्वरचित हाइकु (क्र. 51 से 60)

हाइकु मूल रूप से जापान की एक अत्यंत लोकप्रिय और सबसे छोटी काव्य (कविता) शैली है। इसकी मुख्य विशेषता है कि यह केवल तीन पंक्तियों की कविता होती है। इसमें कुल 17 वर्ण (syllables) होते हैं, जिनका क्रम 5-7-5 (पहली पंक्ति में 5, दूसरी में 7, और तीसरी में 5) का होता है।

संयुक्ताक्षर, मात्रा, अनुस्वार, चंद्रबिंदु, विसर्ग, हलन्त वाला व्यंजन आदि अलग syllable (अक्षर-खंड) नहीं बनाते हैं।

हायकू में संक्षेप में सार गर्भित बहु अर्थ को प्रकट करने वाले शिक्षाप्रद व प्रेरणास्पद विचार होते हैं।

🔥5️⃣1️⃣

प्रयास छोटे
लाते बड़े नतीजे
करते रहें।🌾✨

🔥5️⃣2️⃣

कर लो प्रेम
जिंदगी से, तो चर्या
बने आसान।🌾✨

🔥5️⃣3️⃣

समय पर
करें काम, जीवन
बने आसान।🌾✨

🔥5️⃣4️⃣

बहे पसीना
तो सफलता चूमे
थांके कदम। 🌾✨

🔥5️⃣5️⃣

संग-साथ से
बनती है ताकत,
बिखरे हार।🌾✨

🔥5️⃣6️⃣

जगे भाव तो
मानो पहुँच गए
प्रभु के द्वार।🌾✨

🔥5️⃣7️⃣

आत्मविश्वास
साथीसबसे अच्छा
है जिंदगी में।🌾✨

🔥5️⃣8️⃣

ग़र पाना है
हल तो हटा ध्यान
समस्याओं से।🌾✨

🔥5️⃣9️⃣

ना हो अंदर
क्रोध ईर्ष्या तो शत्रु
नहीं बाहर।🌾✨

🔥6️⃣0️⃣

आना लेकर
किस्मत जाना कर्म
ये ही ज़िन्दगी।🌾

🔥हाइकु रचयिता :-
राजेन्द्र प्रसाद जैन
76 मुक्तानंद नगर जयपुर

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