श्री पल्लीवाल जैन डिजिटल पत्रिका

अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा

(पल्लीवाल, जैसवाल, सैलवाल सम्बंधित जैन समाज)

संघर्ष से लिखो सफलता की कहानी

आज दुनिया का हर व्यक्ति सफल होना चाहता है और सफलता के लिए जी-तोड़ मेहनत भी करता है। लेकिन दुनिया में चंद लोग ही सफल हो पाते हैं, जबकि अधिकांश लोग असफल रह जाते हैं। असफल होने पर कई लोग निराश हो जाते हैं। कुछ लोग बार-बार प्रयास करते हुए भी असफल होते हैं और इतने हताश हो जाते हैं कि जिंदगी से ही निराश होने लगते हैं। कुछ लोग अवसाद में चले जाते हैं तो कुछ आत्महत्या जैसा गंभीर कदम तक उठा लेते हैं।
हमने कभी सोचा है कि सफल लोगों और आम लोगों में आखिर क्या अंतर होता है? वे ऐसा क्या करते हैं, जो आम लोग नहीं कर पाते?
वास्तव में सफल लोग भी वही काम करते हैं, जो बाकी लोग करते हैं, लेकिन वे उसी काम को अलग सोच और अलग तरीके से करते हैं। सबसे बड़ा अंतर उनकी सोच और मानसिकता का होता है। सफल लोग बड़ा सोचते हैं और बड़ा करने का प्रयास करते हैं, जबकि आम लोग सामान्य सोच तक ही सीमित रहते हैं। आम लोग अक्सर अपने कम्फर्ट जोन में रहना पसंद करते हैं, जबकि सफल लोग अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकलकर संघर्षपूर्ण जीवन जीने का साहस रखते हैं।
हम अक्सर सफल लोगों की सफलता की कहानी सुनते हैं, लेकिन यह भूल जाते हैं कि वे पहले ही प्रयास में सफल नहीं हुए थे। उन्होंने अपने जीवन में अनेक संघर्ष किए, कठिन परिस्थितियों का सामना किया और कई बार असफलताएं भी मिलीं। फिर भी उन्होंने प्रयास करना नहीं छोड़ा और अंततः सफलता प्राप्त की।
उदाहरण के लिए अब्राहम लिंकन को ही लें। उनके जीवन में अनेक असफलताएं और कठिनाइयां आईं। लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य को निर्धारित किया, निरंतर प्रयास किया और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ते रहे। अंततः वे अमेरिका के महान राष्ट्रपतियों में शामिल हुए।
इसी प्रकार थॉमस अल्वा एडिसन ने बल्ब के आविष्कार के दौरान अनेक असफल प्रयोग किए। लेकिन उन्होंने असफलताओं को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। निरंतर प्रयोग और प्रयास करते हुए अंततः उन्होंने सफलता प्राप्त की।
वास्तव में हम जब भी किसी सफल व्यक्ति के जीवन को पढ़ते हैं, तो पाते हैं कि उसकी सफलता के पीछे लंबा संघर्ष, कठिन परिस्थितियां, असफलताएं और निरंतर प्रयास छिपे होते हैं। सफल लोगों ने कभी हार नहीं मानी और प्रयास करना नहीं छोड़ा।
जब हम सफल लोगों के जीवन का अध्ययन करते हैं, तो उनमें कुछ प्रमुख गुण दिखाई देते हैं—
बड़ी सोच
लक्ष्य निर्धारण
धैर्य
एकाग्रता (Focus)
निरंतर प्रयास
आत्मविश्वास
सकारात्मक सोच
जोश और जुनून
समय प्रबंधन (Time Management)
समय की पाबंदी (Punctuality)
यदि हम भी इन सभी बिंदुओं पर गंभीरता से काम करें और अपने लक्ष्य के प्रति ईमानदारी, धैर्य तथा निरंतरता बनाए रखें, तो एक दिन सफलता अवश्य प्राप्त कर सकते हैं।
याद रखिए, सफलता हमेशा पहले प्रयास में नहीं मिलती। इसलिए जब भी असफलता मिले, केवल एक बात सोचिए—“एक प्रयास और!”
हर असफलता के बाद यही सोचिए कि शायद अगला प्रयास सफलता की कुंजी बन जाए। आखिर कभी-कभी चाबियों के पूरे गुच्छे की आखिरी चाबी से भी ताला खुल जाता है।
इसलिए असफलता से निराश मत होइए। असफलता को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी अगली सफलता की सीढ़ी बनाइए। धैर्य रखिए, संघर्ष करते रहिए और निरंतर आगे बढ़ते रहिए।
क्योंकि सफलता उन्हीं को मिलती है, जो संघर्ष के बीच भी प्रयास करना नहीं छोड़ते।

धन्यवाद।
महेंद्र कुमार जैन (लारा)
अलवर

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