आज जैन समाज की सबसे बड़ी पीड़ा बाहरी संकट नहीं, बल्कि भीतर बढ़ती मानसिक दूरियाँ हैं।
समाज आर्थिक, शैक्षणिक और धार्मिक दृष्टि से समृद्ध है, फिर भी गुटबाजी, अहंकार और आपसी मतभेदों के कारण एक अदृश्य खाई लगातार गहरी होती जा रही है। पहले कार्यक्रम समाज को जोड़ने के लिए आयोजित होते थे, लेकिन आज कई बार चर्चा इस बात पर अधिक केंद्रित रहती है कि किसका नाम आएगा, किसका फोटो छपेगा और किसका प्रभाव दिखाई देगा।
दुर्भाग्य से यही प्रवृत्ति संस्थाओं तक भी पहुँच गई है। अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा में दो समानांतर कार्यकारिणियों का अस्तित्व केवल संगठन का ही नहीं, बल्कि पूरे समाज का भी नुकसान कर रहा है। इसका परिणाम यह हुआ है कि समाजहित के अनेक महत्वपूर्ण विषय पीछे छूट गए हैं और सामान्य समाजजन भ्रमित एवं निराश हैं।
वास्तव में किसी की किसी से संपत्ति, व्यापार या व्यक्तिगत अधिकारों की लड़ाई नहीं है। समस्या केवल इतनी है कि “हम” की भावना सिकुड़कर “हमारा गुट” तक सीमित होती जा रही है। जब समाज गुटों में बंटता है, तो उसकी सामूहिक शक्ति स्वतः कमजोर हो जाती है।
स्थिति का समाधान विवाद बढ़ाने में नहीं, बल्कि संवाद बढ़ाने में है। जनवरी 2026 से लंबित महासभा के चुनाव शीघ्र, निष्पक्ष और सर्वमान्य प्रक्रिया के माध्यम से कराए जाने चाहिए। दोनों पक्षों को समाजहित को सर्वोपरि मानते हुए वरिष्ठ एवं तटस्थ व्यक्तियों की मध्यस्थता स्वीकार करनी चाहिए तथा चुनाव सम्पन्न होने तक संयम और मर्यादा बनाए रखनी चाहिए।
हमें यह भी याद रखना होगा कि विचार अलग हो सकते हैं, कार्यशैली अलग हो सकती है, लेकिन समाज एक ही है। यदि हम साथ बैठकर समाजहित के मुद्दों पर सकारात्मक संवाद कर सकें, तो वही हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।
समाज तब सशक्त बनेगा, जब—
पद से अधिक कार्य का सम्मान होगा,
व्यक्ति से अधिक संगठन महत्वपूर्ण होगा,
और गुट से अधिक समाज का हित सर्वोपरि होगा।
अंततः इतिहास यह नहीं देखेगा कि किसका फोटो बड़ा था या किसका नाम पहले आया था। इतिहास केवल यह याद रखेगा कि समाज को जोड़ने का प्रयास किसने किया और विभाजन को समाप्त करने का साहस किसने दिखाया।
महासभा किसी एक व्यक्ति या गुट की नहीं, बल्कि सम्पूर्ण पल्लीवाल जैन समाज की धरोहर है। इसकी एकता, गरिमा और प्रतिष्ठा बनाए रखना हम सभी का सामूहिक दायित्व है। 🙏🏻
बाबू लाल जैन
पूर्व वरिष्ठ उपाध्यक्ष
अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा
पालम