श्री पल्लीवाल जैन डिजिटल पत्रिका

अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा

(पल्लीवाल, जैसवाल, सैलवाल सम्बंधित जैन समाज)

अभी और समय की जरूरत है।

पिछले दिनों हमारे समाज में बड़े पैमाने पर गम्भीर चिन्तन हुआ । शुरू हुआ तो होता ही चला गया। इसमें सामाजिक राजनीति समझने वालों ने जोर-शोर से हिस्सा लिया ही, मगर उनमें कुछ भले लोगों ने जो किसी मामले में ज्यादा सोच-विचार के आदि नहीं है, समस्या की गहराई को एक स्तर तक समझा और मौका लगा तो अपनी राय देने में नहीं चूके।

इधर अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान पर आक्रमण कर दिया दोनों और से फोजें अड़ गयी, हुआ यह कि तेल और ईंधन की किल्लत पूरे विश्व में फैल गई। हमारा देश भारत भी इससे अछूता नहीं रहा। मंहगाई का बम्ब देश में ऐसा फूटा कि जनता त्राहिमाम – त्राहिमाम करने लगी। मगर ऐसे में भी हमारे समाज का विषय परिवर्तन नहीं हुआ और चिन्तन क्रम जारी रहा। जिस दिन केन्द्रीय सरकार ने गैस और पेट्रोल-डीजल पर दाम बढ़ाये उस दिन भी चर्चा का विषय नहीं बदला। स्पष्ट है कि इस समय हमारा समाज वैचारिक संकट में बुरी तरह फंस गया है । ऐसी नाजुक घडी आज तक नहीं आई ।

आप हमारे कब्जाधारी महामंत्री को जानते ही हैं कि वह अत्यन्त कोमल हृदय-धर्मपरायण व्यक्ति है। इन्हें देख कर लगता है कि इन्हें सामाजिक राजनीति छोड़ कर किसी मठ का मठाधीश हो जाना चाहिए, क्योंकि यहां उनके लिए कुछ करने को है नहीं और वहां वह काफी कुछ कर लेंगे। वह काफी हद तक सभ्य और मृदुभाषी है। इस सबके बावजूद वह सामाजिक राजनीति में है, यह उनका कमाल है। समाज में बड़े पैमाने पर वैचारिक मन्थन के इस गम्भीर प्रहर में उनकी हालत हेमलेट जैसी हो गई जो विचारों में डूबा रहता था और किसी निर्णय तक नहीं पहुंच पाता था। वैसे भी उत्तर भारत में तापमान इस कदर बढ़ा और फिर उस पर नो- तपे की मार, सो कोमल हृदय और नाजुक शरीर को कुछ पलों का आराम देने के लिये चिन्तन शिविर का आयोजन उत्तराखण्ड की वादियों में किया जाने का तय किया गया। सभी दरबारियों को समय से सूचना भेज दी गई ताकि वे अपनी समुचित तैयारियां समय से कर लें। सभी को साथ ले जाने का भार उन्होंने स्वयं अपने कन्धों पर ही रखा।

एक साथ एक ही दिन देशभर के समाज सुधारक एक ही ट्रेन एक ही निश्चित स्टेशन पर उतरे। वहां से आगे की यात्रा वातानुकूलित बसों द्वारा गाते बजाते प्रारम्भ हुई। नाचते गाते बजाते गन्तव्य की और अग्रसित हुए खैर सभी ने और क्या-क्या आनन्द लिए इससे हमें क्या वास्ता है।

चिन्तन शिविर में चिन्तन के लिए पहला बिन्दु “ गत चुनावों तक की मतदाता सूची की एस.आई. आर कराने तथा मतदाता कार्ड बनाने पर चर्चा ”

यहां जो भी लिखा जा रहा है वह दिनांक 25.04.2026 को आयोजित अ.भा.प. जैन महासभा की केन्द्रीय कार्यकारिणी की बैठक का कार्यवाही विवरण से ही लिया गया है जो महासभा के मुख पत्र श्री पल्लीवाल जैन पत्रिका के वर्ष – 14 अंक 11 – 25 मई 2026 में प्रकाशित हुआ है।

श्री महेश जैन (महामंत्री) व्यक्तव्य – गत 2023 तक के चुनावों तक की मतदाता सूची की एस.आई.आर. करवाना अत्यन्त आवश्यक है, जिसके अन्तर्गत नये सदस्य बनाना, जिन सदस्यों का स्वर्गवास हो गया है उनके नाम हटाना, डुप्लीकेट (दो जगह जिनके नाम है) उनको सही करना, जो कहीं दूसरी जगह शिफ्ट हो गये हों उनको पुरानी जगह से हटाकर नवीन स्थान पर जोड़ना, नाम / पता / उम्र की गलतियों का शुद्धिकरण करना, ये सब करना आवश्यक है। सदन की अनुमति से एक समय-सीमा तय करके सभी से जनकारियां मंगा कर एक साथ अस्थाई सूची सर्कुलेट कर दें और उस पर आपत्तियां आमन्त्रित कर सही मतदाता सूची जारी कर दी जावें ।

देश भर के सभी समाज जन जानते हैं कि श्रीमान का कार्यकाल जनवरी 2023 में प्रारम्भ हुआ । महासभा के विधान के अनुसार किसी भी नवनिर्वाचित कार्यकारिणी का समय तीन वर्ष का होता है। इस हिसाब से श्रीमान का कार्यकाल भी जनवरी 2026 में भरते-गिरते पूरा हो गया। इन तीन वर्षों में श्रीमान को एस.आई.आर. करवाने का विचार तक नहीं आया। कार्यकाल समाप्त होने के बाद उत्तराखण्ड की वादियों में एस. आई. आर. कराने का विचार क्यों आया ? यह सभी समाजजनों के लिए विचारणीय बिन्दु है।

अस्पष्ट सूचनाओं के अनुसार वर्तमान में महासभा के दस हजार से अधिक सदस्य है। जिन्हें अपने प्रतिनिधि चुनने का मताधिकार प्राप्त है। 1969 से लेकर अब तक यह देखने में नहीं आया कि कभी भी किसी चुनाव में चार हजार से अधिक प्रतिनिधियों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया हो। इससे यह स्पष्ट है कि छः हजार से ज्यादा प्रतिनिधियों ने महासभा के पदाधिकारी चुनने में किसी प्रकार की रूचि ही नहीं ली।

दूसरा विचारणीय बिन्दु यह है कि क्या महासभा के त्रिवार्षिक चुनावों में समाज के स्वर्गवासी सदस्य वोट डालने आये थे, मेरी समझ में पल्लीवाल जैन समाज का अभी इतना नैतिक पतन नहीं हुआ कि जो समाज जन इहि-लोक को छोड़ कर परलोक सिधार गये वह महासभा के चुनावों में हिस्सा लेने के लिए आए हों, यदि आये तो यह समाज के नैतिक पतन की पराकाष्टा ही मानी जायेगी ।

मुझे अच्छी प्रकार से याद है कि भू.पू. महामन्त्री श्री जितेन्द्र कुमार जैन ने पल्लीवाल जैन महासभा के आजीवन सदस्यों का एक रजिस्टर बनाया था। श्री जितेन्द्र कुमार जी ने आजीवन सदस्यों के सर्टिफिकेट भी प्रिन्ट कराकर आजीवन सदस्यों को दिये थे और उसकी एक प्रति महासभा के पास सुरक्षित रखी थी। यह हर महामंत्री का दायित्व है कि यदि उसे सूचना मिले कि समाज का फलां व्यक्ति अब इस संसार को छोड़कर स्वर्गवासी हो गया है तो वह उसके नाम को काट दे और जब वोटर लिस्ट बने तब उसके नाम को उस वोटर लिस्ट में से विलोपित करवा दे। ऐसा ही लम्बे अरसे तक हुआ भी, श्री श्रीचन्द जी जब महामंत्री बने तो उन्होंने भी रजिस्टर बनाये रखा और वोटर लिस्ट में उन लोगों के नाम के ऊपर लाईन फेरकर स्वर्गवासी लिख दिया। मैं भी एक बार महामंत्री रहा हूं। मैंने भी अपने पूर्ववर्तीयों के कार्य को आगे बढ़ाया था। जो नये सदस्य बनाये जाते थे उनकी एक अलग से सप्लीमेन्ट्री सूची तैयार कर ली जाती थी और चुनावों की प्रक्रिया पूरी होती जाती थी।

अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा एक धार्मिक जाति का सामाजिक संगठन है, इस में नैतिक मूल्यों के महत्व को नकारा नहीं जा सकता, मुझे लगता भी नहीं है कि पल्लीवाल जैन समाज ने अपने नैतिक मूल्यों को तिलांजली दे दी हो, कुछ लोगों के नैतिक पतन को समाज का नैतिक पतन नहीं माना जा सकता ।

यह सही है कि समाज के कुछ सदस्य दो-दो शाखाओं में सदस्य बने हुए है। नैतिकता यह कहती है कि उन्हें एक ही स्थान की शाखा का सदस्य रहना चाहिए। यह बिन्दु शाखाओं के लिये विचारणीय बिन्दु है। इससे केन्द्रीय चुनावों की मतदाता सूची कैसे प्रभावित होती है यह समझ में नहीं आता ।

बाकी के सभी बिन्दु प्रशासनिक है जिनका उत्तरदायित्व महामंत्री जी की कार्य सूची में आता है जो उन्हें व्यक्तिगत रूप से श्रम करके पूरा करना चाहिए ।

यह सही है कि अशोक कुमार जैन ने स्वेच्छा से अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा के क्रिया-कलापों का आकलन कर के महासभा की साधारण सदस्यता से त्यागपत्र दिया था जिसका निस्तारण दिनांक 11.12.2022 को अलवर में हुई महासभा की कार्यकारिणी बैठक जिसकी अध्यक्षता तात्कालीन कार्यवाहक अध्यक्ष श्री शरद कुमार जैन कर रहे थे, उन्होंने सदन को बताया कि “पूर्व महामंत्री श्री अशोक कुमार जैन का एक पत्र मुझे प्राप्त हुआ है, जिसे उन्होंने पढ़कर सुनाया । पत्र द्वारा श्री अशोक कुमार जैन पूर्व महामंत्री द्वारा महासभा की प्राथमिक सदस्यता से त्याग पत्र दिया गया हैं। सदन ने इस पर यह कहा कि यह प्रत्येक व्यक्ति का व्यक्तिगत निर्णय है, कि वह महासभा का सदस्य रहेगा या नहीं। इस पर कार्यकारिणी को कोई विचार नहीं करना है। यह विवरण श्री पल्लीवाल जैन पत्रिका 25 दिसम्बर 2022 में प्रकाशित हुआ है।

समाज जनों को यह सोचना चाहिए कि जो बिन्दु पूर्व में ही निस्तारित हो गया, उस पर उत्तराखण्ड की वादीयों में पुनः विचार करने का क्या औचित्य है। क्या यह अपने को महामंत्री कहने वाले व्यक्ति का दिमागी दिवालीयापन का प्रतीक नहीं है। अशोक कुमार जैन के महासभा से त्याग पत्र देने के तीन वर्ष बाद उसे स्वीकार करने का नाटक करने के पीछे उनका क्या मन्तव्य रहा । इस पर भी समाज को विचार तो करना ही चाहिए ? महासभा के पूर्व महामन्त्री श्री राजीव रत्न जैन के कथन अत्यन्त असंगत और विसंगति पूर्ण है। जब अशोक कुमार जैन ने महासभा की साधारण सदस्यता छोड़ी उस समय श्री राजीव रत्न जैन महासभा के महामन्त्री नहीं थे ।

एक बात और विचारणीय है कि यदि समाज सेवको का समाज की सेवा करने, समाज को संगठित रखने समाज में प्रेम शौहार्द और सहकारिता का विकास करने की इतनी चाहत है, तो उन्हें दोबारा आने से किसने रोका है। विधान के अनुसार समय से चुनाव कराये जाने चाहिए, न कि पिछले दरवाजे से कार्यकाल का समयकाल बढ़ा कर महासभा पर कब्जा जमाये रखने का खेल खेलना चाहिए। जब देश भर का पल्लीवाल जैन समाज महासभा पर कब्जा बनाये रखने वालों के साथ है तो किसका भय ? चुनाव में जीत कर आ जाते और समाज की सेवा करने का पुनः सौभाग्य प्राप्त करते। मुझे लगता है चूले हिली हुई है। या उन्हें समाज से कोई सरोकार नहीं उन्हें एक अखिल भारतीय संगठन का लेटरहेड चाहिए । भविष्य में आगे भी महासभा के कार्यकाल में बढ़ोतरी होती रहेगी। जब तक महासभा पूरी तरह से छिन्न- भिन्न नहीं हो जाती उनका ऐजेन्डा पूरा नहीं हो पायेगा । ऐजेन्डे को पूरा करने के लिये अभी और समय की जरूरत है।

अशोक कुमार जैन
( पूर्व राष्ट्रीय महामन्त्री)
2 बी रामद्वारा कॉलोनी महावीर नगर, जयपुर

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