श्री पल्लीवाल जैन डिजिटल पत्रिका

अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा

(पल्लीवाल, जैसवाल, सैलवाल सम्बंधित जैन समाज)

*OUTLET (निकास) क्यों जरूरी है ??*

😥लाखों जीवन लेने वाले क्रूर *हिटलर* ने आखिरकार आत्महत्या कर ली!…….
😥सुंदर प्रवचन देने वाले *साने गुरुजी* suicide कर लेते हैं।
😥“मनशक्ति” नामक मानस को मजबूत करने का प्रशिक्षण देने वाले लोनावला के *स्वामी विज्ञानंद* मुंबई में मंत्रालय से कूदकर अपनी जान दे देते हैं।
😥आध्यात्मिक गुरु के रूप में पहचाने जाने वाले और कई लोगों को सहारा देने वाले *भैय्यूजी महाराज* इंदौर में अपना जीवन अपने हाथों से समाप्त कर लेते हैं।
😥सकारात्मक विचार देने वाली फिल्मों मे अभिनय करने वाले *सुशांत सिंह राजपूत* डिप्रेशन से suicide कर लेते हैं
😥और हाल ही में छह-आठ महीने पहले depression से लड़ना सिखाने वाली बाबा आमटे की पोती *शीतल (आमटे) करजगी* अपना जीवन समाप्त कर लेती हैं।
😥नागपुर की खबर .. दिवंगत कुलपति की उच्च शिक्षा प्राप्त पत्नी और राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के रसायन विभाग की प्रमुख *डॉ. ज्योत्स्ना मेश्राम* ने नौवीं मंजिल से कूदकर अवसाद में आत्महत्या कर ली।

✅✅ इन कुछ सेलिब्रिटीज के उदाहरणों से हमें क्या सीख मिलती है..? 🤷🏻

*…यही कि पानी में शांतिपूर्वक तैरती बत्तख ऊपर से तो शांत दिखती है लेकिन पानी के नीचे उसके पैर तेजी से हिल रहे होते हैं। शांत तैरता दिखने के लिए जो मेहनत करनी पड़ती है, वह सिर्फ उसे ही पता होती है।*

✅ *मनुष्य ऊपर से जितना मजबूत दिखता है, उतना अंदर से मजबूत हो यह जरूरी नहीं है।*
उसके मन में अलग हलचल हो सकती है, जो हम तक नहीं पहुंचती या वह उस आनंद मग्न और *सुखी चेहरे के पीछे छिपाने की कोशिश कर रहा होता है। आखिर क्या…??*
ऊपर सुंदर ताजमहल हो, फिर भी नीचे कब्र ही होती है यह भूलना नहीं चाहिए।

भैय्यूजी महाराज की आत्महत्या के बाद एबीपी माझा चैनल ने एक परिचर्चा आयोजित की थी। उसमें बोलते समय भैय्यूजी महाराज के मित्र ने *मानव स्वभाव* का बहुत अच्छा पहलू बताया कि भैय्यूजी महाराज खुद एक *आध्यात्मिक* गुरु थे लेकिन वे एक सामान्य व्यक्ति भी थे। 👉🏽👉🏽अपने मन का *स्ट्रेस*(तनाव) बाहर निकालने के लिए उनके पास *outlet* नहीं था, क्योंकि उनकी छवि एक गुरु की थी, तो अपना दुःख किसको कहते ???

🕉️ *क्या इतना महत्वपूर्ण होता है यह outlet?*
उत्तर है : हाँ…!!! *YES, YES, YES*

करोड़ों रुपये खर्च कर पानी के लिए विशाल *बांध* बनाया और मान लीजिए उसमें *outlet ही नहीं दिया तो क्या होगा..? निश्चित रूप से बांध फट जाएगा। इतना महत्वपूर्ण होता है यह waste weir*…

मानव शरीर विभिन्न पंचतत्वों से बना एक *बांध* ही है। इस शरीर में समस्याओं की आवक अधिक हो गई तो यह शरीर रूपी बांध फटेगा या रहेगा?

इसलिए अपना *outlet हमेशा खुला रखें। अपने मुंह के outlet* का उपयोग करके अपनी समस्याएं अपने लोगों को बताएं।
अपने अंतर्मन का *outlet खोलने के लिए ध्यान का सहारा लें* और संभव हो तो दुनिया का सबसे बड़ा *outlet* अपने आंखें खोलें।
✅ *किसी अपने के सामने आंसुओं का बांध फूटने दें…* उन्हें बह जाने दें… स्ट्रेस, दुख, उपेक्षा… पिस्तौल की गोली से सिर में छेद करने से, पंखे से लटकने से… यह कभी भी आसान नहीं है.!

*इसीलिए Friend or Relatives or Well Wisher नाम के कंधे का सहारा लें। मन हल्का करें।*
*बेस्ट आउटलेट होता है: परिवार और मित्र!*
👉🏼उनके साथ हंसें! बोलें! रोएं! झगड़ें!
अपने को व्यक्त करें!! तनाव से मुक्त करें!! Express and feel Easy ✅

🕉️ *ध्यान रखें…*
किसी के छोड़कर ऊपर चले जाने के बाद *”ᴍɪss ʏᴏᴜ”* कहने से पहले, जब तक वो साथ है तब तक *”ᴡɪᴛʜ ʏᴏᴜ”* कहें।

*यदि कोई आपको अपना दुख कहना चाहता है, तो उसको सुने, उसको समय दे* (यह नही सोचे कि उसका दुखड़ा सुनने से मुझे क्या फायदा ??)
क्या पता, कोई आपको अपना दुख कहकर हल्का हो जाए, *और आप एक सुसाइड होने से बचा ले,* इसका बहुत पुण्य मिलता है, *जीवनदान का पुण्य*

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