क्या यह उचित है ?
कौन क्या खाता है?
यह उनका निजी मामला है,
इसमें हस्तक्षेप करने की मेरी कोई चाहत नहीं है ।
पर, एक बात मन को खटकती है कि हममें से कुछ
लोग
महज शौक, स्वाद अथवा
साथियों का साथ निभाने के लिए जो कुछ खा रहे हैं, क्या वह उचित है ?
अपनी अंगुली पर आलपिन चुभने मात्र से दर्द से बिलबिलाने वालों का दिल
निरीह पशुओं की गर्दन पर चलती कटार से व्यथित न होकर
आज आनन्दित हो रहा है, क्या यह उचित है?
शाकाहारी परिवेश में पलने के
बावजूद
आज बहकने लगे हैं कुछ के कदम,
लालायित रहता है उनका मन
मांसाहारी भोजन पाने को ।
अपनी संस्कृति और संस्कार को
मिटाने की यह साजिश, क्या उचित है?
क्या उचित है और क्या अनुचित
यह वे बेहतर जानते हैं,
मगर बहकते कदमों को रोकना
हम अपना फर्ज मानते हैं ।
उनसे आह्वान है हमारा
आज अपने मन में मन्थन कीजिए ।
इस पाप से मुक्ति मिले, यह चिन्तन कीजिए । ।
मांसाहार को तिलांजलि का दृढ़ निश्चय कीजिए ।
शाकाहार के प्रचार का दृढ़ संकल्प लीजिए।।
शिव रतन मोहता
जयपुर (मो.) 9929526080