श्री पल्लीवाल जैन डिजिटल पत्रिका

अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा

(पल्लीवाल, जैसवाल, सैलवाल सम्बंधित जैन समाज)

दश लक्षण पर्व

दिगम्बर जैन परम्परा का दशलक्षण पर्व आत्मशुद्धि, संयम और धर्मसाधना का पावन पर्व है। यह पर्व दस दिनों तक मनाया जाता है और प्रत्येक दिन एक धर्म-लक्षण को जीवन में उतारने की प्रेरणा देता है।
दस धर्म हैं—उत्तम क्षमा, उत्तम मार्दव, उत्तम आर्जव, उत्तम शौच, उत्तम सत्य, उत्तम संयम, उत्तम तप, उत्तम त्याग, उत्तम आकिंचन्य और उत्तम ब्रह्मचर्य।
इन दस धर्मों का वास्तविक उद्देश्य केवल पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म की शुद्धि है। क्षमा हमें क्रोध से मुक्त करती है, मार्दव अहंकार को दूर करता है, आर्जव सरलता सिखाता है और शौच लोभ-मोह से मुक्ति की प्रेरणा देता है। सत्य, संयम, तप और त्याग जीवन को अनुशासित बनाते हैं, जबकि आकिंचन्य एवं ब्रह्मचर्य आत्मसंयम और वैराग्य का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
दशलक्षण पर्व हमें स्मरण कराता है कि सच्चा धर्म बाहरी आडंबर में नहीं, बल्कि अपने भीतर परिवर्तन लाने में है। यदि इन दस धर्मों में से प्रत्येक का थोड़ा-सा अंश भी हम अपने दैनिक जीवन में उतार सकें, तो हमारा जीवन अधिक शांत, संयमित, सरल और सार्थक बन सकता है।
दशलक्षण पर्व आत्मावलोकन, आत्मशुद्धि और आत्मकल्याण का पर्व है।
उत्तम धर्म की भावना के साथ सभी को दशलक्षण पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ।

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