श्री पल्लीवाल जैन डिजिटल पत्रिका

अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा

(पल्लीवाल, जैसवाल, सैलवाल सम्बंधित जैन समाज)

साइकिल मेरी दौड रही है।

साइकिल मेरी दौड़ रही है
साइकिल मेरी दौड रही है।
सबको पीछे छोड़ रही है।
साइकिल मेरी दौड रही है।

सड़क पर दौड़ रही ये सरपट ।
निमटपाती मेरे काम से झटपट ।
पथ को पीछे छोड़ रही है।
साइकिल मेरी दौड़ रही है।

इधर से उधर, उधर से इधर ।
घर से दफ्तर, दफ्तर से घर ।
जीवन पथ को जोड़ रही है।
साइकिल मेरी दौड रही है।

जहाॅ में है यह करोड़ो की प्यारी।
मंजिल पर पहुॅची सदा साइकिल हमारी
नये रास्ते खोज रही है।
साइकिल मेरी दौड रही है।

चलती है, फिरती है, मुड़ती है।
नहीं निर्जीव, ये जैसे कोई जीव
टर्न टर्न बोल रही है।
साइकिल मेरी दौड रही है।

धरम चंद जैन,
रिटायर्ड XEn PWD
अलवर

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