एक बार एक व्यक्ति ने मुनि श्री से पूछा, “महाराज साहब, बड़ा आदमी कौन होता है?”
मुनि श्री ने उत्तर दिया, “बड़ा आदमी वह होता है जिसके पास बैठकर कोई भी व्यक्ति अपने आपको छोटा महसूस न करे। बड़ा आदमी वह होता है जिसके हृदय में उदारता, वाणी में निर्मलता और व्यवहार में कुशलता हो। वह कभी स्वयं को बड़ा दिखाने का प्रयास नहीं करता, बल्कि उसके पास आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान और सहजता का अनुभव कराता है।”
आज दुनिया में लगभग हर व्यक्ति बड़ा आदमी बनने की होड़ में लगा हुआ है। हर कोई चाहता है कि वह बड़ा बन जाए, लेकिन अपने भीतर बड़प्पन लाने का प्रयास बहुत कम लोग करते हैं। अपने विचारों को विशाल बनाने की इच्छा भी कम ही दिखाई देती है। अधिकांश लोग धन, पद, शक्ति और प्रतिष्ठा के पीछे भाग रहे हैं। हर व्यक्ति चाहता है कि उसके पास अधिक से अधिक धन हो, अधिक शक्ति हो और समाज में उसकी प्रतिष्ठा बढ़े। इसी दौड़ में आज पूरी दुनिया भाग रही है।
मुनि श्री कहते हैं, “अपने विचारों को बड़ा करो, अपने हृदय को विशाल बनाओ और अपनी सोच को ऊँचा उठाओ। निश्चित ही तुम एक बड़े व्यक्ति बन जाओगे। स्वयं को इतना बड़ा बनाओ कि तुम्हारे पास यदि कोई साधारण से साधारण व्यक्ति भी आकर बैठे, तो वह अपने आपको छोटा महसूस न करे।” इंसान का वास्तविक बड़प्पन इसी में है कि वह प्रत्येक व्यक्ति की अहमियत समझे, उसके विचारों का सम्मान करे और हर इंसान को अपने समान समझे।
आज अनेक लोग स्वयं को बड़ा बनाने की चाह में एक-दूसरे की टांग खींचने और एक-दूसरे को गिराने में लगे हुए हैं। लेकिन मुनि श्री कहते हैं कि यदि टांग खींचने के बजाय हम एक-दूसरे का हाथ पकड़कर आगे बढ़ाने का प्रयास करें, तो केवल व्यक्ति ही नहीं, बल्कि समाज और देश भी निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर होंगे।
यही सच्चा बड़प्पन है।
धन्यवाद।
महेंद्र कुमार जैन (लारा)
शिवाजी पार्क अलवर