श्री पल्लीवाल जैन डिजिटल पत्रिका

अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा

(पल्लीवाल, जैसवाल, सैलवाल सम्बंधित जैन समाज)

आगामी पल्लीवाल समाज चुनाव : एक सुझाव

जैसा कि लग रहा है कि पल्लीवाल समाज की कार्यकारिणी के चुनाव शीघ्र ही होने वाले हैं. पहले से तय किसी स्थान पर चुनाव करने की परम्परा चली आ रही है. देशभर से समाज के लोग एकत्रित होते हैं और नई कार्यकारिणी का चुनाव करते हैं. पहले संस्था के सदस्यों कि संख्या बहुत कम थी. कम खर्चे में काम भी चल जाता था. फिर आपस में मिलना जुलना भी हो जाता था. लेकिन पिछले 20-25 वर्षों में यह संख्या बहुत अधिक हो गई है, सब लोग नहीं आ पाते हैं. जहाँ चुनाव होता है वहाँ के लोग तो आ भी जाते हैं, दूर दराज के लोग नहीं आ पाते हैं. यदि सब आ भी जायें तो इनके खाने-ठहरने की व्यवस्था में बहुत खर्च होगा और unmanageable भी होगा. चुनाव के बाद भी विवाद बना रहता है. इसलिए मैं निम्न सुझाव प्रस्तुत करना चाह रहा हूँ.
हमें शाखा संख्याओं को बहुत अधिक करना चाहिए. मान लो हमारे सदस्यों कि कुल संख्या दस हजार है तो हम लगभग सौ (80 से 120 ) सदस्यों वाली कुल सौ शाखायें बनायें. ये शाखा अपना-अपना एक प्रतिनिधि चुने. ये सौ प्रतिनिधि किसी एक स्थान पर इकट्ठे होकर राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन कर लें. यदि कोई सदस्य किसी दूर-दराज स्थान पर है तो उसे यह पहले से बताना होगा कि वह किस शाखा में शामिल होना चाहता है. कुछ लोग कह सकते हैं कि यह संस्था के विधान से भिन्न है. उसके लिए पहले विधान बदलना होगा. मेरा निवेदन है कि किसी अच्छी व्यवस्था के लिए यदि विधान में परिवर्तन किया जाये तो अच्छी बात ही है. विधान 60-65 में बना था. उस समय के हिसाब से वह सही थी क्योंकि सदस्य कम थे, आपस में मिलना जुलना हो जाता था. आज उसमें परिवर्तन की आवश्यकता है. ऐसा करने से चुनाव के समय और बाद में आपस में जो मन-मुटाव हो जाता है, उससे बचेंगे और खर्च भी कम होगा.
कुछ लोग online वोटिंग कि बात भी करते हैं, लेकिन मेरे विचार से उसके बजाय ऊपर वाली व्यवस्था अधिक ठीक रहेगी. चूँकि समाज में अब सभी मतभेद समाप्त हो गए हैं तो विधान में सुधार करने में भी समस्या नहीं होनी चाहिए. चुनाव से पहले यह व्यवस्था हो तो मेरे हिसाब से यह अधिक अच्छा रहेगा.

डॉ. अनिल कुमार जैन
फ्लैट न. 302, विरासत फोर पॉइंट्स 92/4, महावीर नगर,
दुर्गापुरा
जयपुर-302018

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