श्री पल्लीवाल जैन डिजिटल पत्रिका

अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा

(पल्लीवाल, जैसवाल, सैलवाल सम्बंधित जैन समाज)

यात्रा समाज सेवा की

लल्ला बाबू के “जीवन का उद्देश्य, जीवन की अवधारणा, जीवन का संघर्ष और उनकी कामयाबी” को सर्व समाज ने पूरे मनोयोग से स्वीकार कर उनके सम्मान में जगह-जगह स्वागत समारोह आयोजित करने का निश्चय किया।
वैसे यह आयोजन लल्ला बाबू के निर्देश से उनके चेंचूए ही आयोजित करवा रहे थे।
आम जनों में लल्ला बाबू की स्वीकार्यता को वजनदार बनाने के लिए यह रणनीतिक रूप से जरुरी भी था। सो लल्ला बाबू ने सभी आयोजन स्थलों पर टेंट, तम्बू, बेक्वट हाल, गद्दे, तकिए, गुलदस्ते, माला, पगड़ी, साफा, और शाल आदि की पूरी व्यवस्था करवा दी थी। आयोजन स्थाल की चारों दिशाओं में आमजनों के बीच पहले ही प्रचारित करवा दिया गया था कि दिनांक फला-फला को समाजसेवी, समाजरत्न लल्ला बाबू बड़ागांव के समाज जनों बीच उपस्थित होकर अपनी जीत के लिए धन्यवाद ज्ञापित करने हेतु पधारेंगे। सभी समाजजनों से अपेक्षा है कि वह भारी तादाद में बड़ागांव सभागार में उपस्थित होकर लल्ला बाबू की जीत की खुशी में उन्हें सम्मानित करने पधारे। सम्मान समारोह के बाद सभी समाजजनों के वात्सल्य भोज की व्यवस्था आयोजन स्थल पर ही है।

सामाजिक संगठन के पद पर आसीन होते ही लल्ला बाबू का देशभर में स्वागत सम्मान पूरे जोर-शोर से किया जाने लगा। इसमें विशेष बात यह थी कि सभी आयोजन लल्ला बाबू की ओर से ही प्रायोजित थे। समाजजनों को तो छुट्टी का आनंद पूरे मनोयोग से लैने के लिए यहां पर उपस्थित होना था।
लल्ला बाबू भी समाज जनों की भारी उपस्थिति से मन-ही-मन ऐसे गदगद हो जाते थे, जैसे चक्रवर्ती राजा का घोड़ा निर्विघ्नं राज्यों पर विजय पताका लहराता हुआ सभास्थल पर अभी-अभी आया हो। लल्ला बाबू भी पूरे भरतखंड में अपने झूठे घोषणा पत्र और झूठे वादों से चक्रवर्ती के रूप में स्थापित हो ही चुके थे।

समाज गद-गद, आयोजक गद-गद , लल्ला बाबू के दिल के हाल का वर्णन करना तो मुश्किल है। एक स्थान से दूसरे स्थान, दुसरे से तीसरे स्थान पर इसी प्रकार प्रायोजित आयोजनों से चक्रवर्ती लल्ला बाबू का चतुर्दिक सम्मान होता रहा। यह सिलसिला काफी लंबे समय तक समाजजनों में व्याप्त रहा।

लल्ला बाबू को बड़े ही दुखी मन से समाजजनों के खुशी में अपने-आप को प्रस्तुत करना पड़ता था। वैसे लल्ला बाबू इस प्रकार के आयोजनों के जन्मजात विरोधी रहे हैं। वे तो सादा जीवन जी कर समाज की सेवा के लिए अवतरित हुए हैं और उनका यह प्रण भी है कि वे केवल समाज सेवा के अलावा किसी प्रकार के प्रपंच में नहीं पड़ेंगे, पर समाज जनों की भावनाओं को देखना पड़ता है, सो लल्ला बाबू को इन प्रायोजित आयोजनों में शामिल होना पड़ता था। खैर अब यह सिलसिला समाप्त हो गया है। लल्ला बाबू अपने मूल कार्य दलाली के लिए तत्पर हो गए हैं।

अब आगे देखना यह है कि समाज जन उन्हें अपनी सेवा का मौका देंगे या नहीं।

अशोक कुमार जैन
रामद्वारा कॉलोनी
महावीर नगर जयपुर

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