श्री पल्लीवाल जैन डिजिटल पत्रिका

अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा

(पल्लीवाल, जैसवाल, सैलवाल सम्बंधित जैन समाज)

विनम्रता इंसान की सबसे बड़ी निधि है

पानी का स्वभाव है शीतलता, पानी कभी अपना स्वभाव नहीं छोड़ता है वह सदा शीतल रहता है और जो भी पानी के संपर्क में आता है उन सब को शीतलता प्रदान करता है। पानी कभी अग्नि के संपर्क में आकर गरम हो भी जाए तो ज्यादा देर गरम नहीं रहता है। वह अपने स्वभाव में लौट कर वापस आ जाता है और अगर अग्नि भभक रही है और उस पर पानी डाल दिया जाए तो वह उस भभकती अग्नि को भी शांत कर देता है। पानी जिसके संपर्क में आता है अपने आप को वैसा ही ढाल लेता है जैसे रंग में पानी मिलता है पानी का रंग वैसा ही हो जाता है और पानी प्रकृति के लिए जीव जंतुओं के लिए और इंसानों के लिए बहुत आवश्यक होता है।

इसी प्रकार इंसान का स्वभाव शांति आनंद और विनम्रता होता है। प्रकृति ने इंसान को शांत स्वभावी बनाया है। विनम्रता इंसान की सबसे बड़ी निधि है। विनम्रता के बल पर इंसान सब का दिल जीत सकता है। लेकिन आज इंसान अपना स्वभाव भूलता जा रहा है। आज इंसान का स्वभाव उग्र होता जा रहा है। छोटी-छोटी बातों पर गर्म हो जाना छोटी-छोटी बातों पर क्लेश करना आज के इंसान की फितरत बन गई है। गुस्सा करना क्रोधित होना यह इंसान का स्वभाव नहीं है यह उसका विभाव है लेकिन आज का इंसान स्वभाव को छोड़कर विभाव में ज्यादा जीने लगा है और यही कारण है कि आज दुनिया में तनाव की स्थिति बनी हुई है चाहे घर हो चाहे परिवार हो चाहे समाज हो और चाहे देश हो सब जगह आज लोग एक दूसरे के साथ लड़ रहे हैं झगड़ रहे हैं एक दूसरे को मरने मारने पर उतारू हो रहे हैं। इसी वजह से चारों तरफ अशांति फैली हुई है हर व्यक्ति तनाव में नजर आ रहा है।

अगर इंसान को शांति और सद्भाव के साथ जीवन व्यतीत करना है तो उसे विनम्रता को अपनाना होगा अगर इंसान विनम्र बना रहे तो फिर उसका किसी के साथ विवाद या तनाव नहीं होगा हर व्यक्ति के साथ संबंध अच्छे होंगे और दुनिया में शांति होगी विनम्रता के बल पर इंसान हर किसी का दिल जीत सकता है सिर्फ इंसान ही नहीं विनम्रता से तो इंसान जानवरों के दिलों में भी अपनी जगह बना सकता है तो हमेशा विनम्र बने रहो और भगवान महावीर के सिद्धांत जियो और जीने दो को आत्मसार करो।

हमें हमेशा अनेकांतवाद को ध्यान में रखना चाहिए मैं सही हूं इसमें कोई विवाद नहीं लेकिन सिर्फ मैं ही सही हूं बाकी सब गलत है तो फिर विवाद उत्पन्न होता है हमें हर इंसान के दृष्टिकोण से सोचना चाहिए हर इंसान का दृष्टिकोण अलग हो सकता है हर इंसान के सोचने समझने की स्थिति अलग-अलग हो सकती है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह हमसे अलग सोच रहा है तो वह गलत है एक ही बात के कई सत्य हो सकते हैं बस हमें अपना दिल बड़ा करके सोचना चाहिए पर अपने आप को दूसरे इंसान की जगह रख कर सोचें तो फिर सारे विवाद समाप्त हो सकते हैं।

अगर इंसान हर इंसान को अपने जैसा ही समझे तो फिर झगड़ा ही खत्म हो जाए जैसे मैं एक इंसान हूं जैसे मेरे अंदर जान है जैसे मुझे दर्द होता है जैसे मुझे तकलीफ होती है वैसे ही हर इंसान को तकलीफ होती है हर इंसान को दर्द होता है सिर्फ इंसान ही नहीं बल्कि हर जीव को दर्द होता है हर जीव को तकलीफ होती है इसलिए हर जीव के साथ विनम्रता का उपयोग करें।

धन्यवाद
महेंद्र कुमार जैन(लारा)
अलवर

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