अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा में आपसी सौहार्द, एकता एवं संगठनात्मक व्यवस्था को पुनः सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक पहल के रूप में वर्ष 2026 में दोनों पक्षों के मध्य समझौता पत्र (Memorandum of Settlement-2026) संपन्न हुआ। समझौता पत्र पर संबंधित पक्षों के प्रतिनिधियों द्वारा सहमति एवं हस्ताक्षर किए जाने के पश्चात यह प्रभावी हुआ और इसके अनुरूप महासभा की आगामी निर्वाचन प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी एवं शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न कराने की दिशा में कार्य प्रारंभ किया गया।
समझौता पत्र के प्रमुख बिंदु
समझौते का मूल उद्देश्य महासभा में उत्पन्न मतभेदों का सौहार्दपूर्ण समाधान कर संगठन को पुनः एकजुट करना तथा लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से नई कार्यकारिणी का निर्वाचन सुनिश्चित करना था। समझौते में प्रमुख रूप से:-
1. निष्कासित सदस्यों की पुनर्बहाली: दोनों पक्षों द्वारा महासभा से निष्कासित, निलंबित अथवा सदस्यता अधिकारों से वंचित किए गए सभी समाजबंधुओं के विरुद्ध पारित आदेश तत्काल प्रभाव से निरस्त माने जाएंगे।
2. मतदाता सूची का निर्धारण – दिनांक 30 अप्रैल 2026 तक जिन व्यक्तियों की सदस्यता रसीद किसी भी पक्ष द्वारा विधिवत जारी की गई है, उन्हें वैध सदस्य माना जाएगा । ऐसे सभी सदस्यों के नाम आगामी चुनाव हेतु अंतिम मतदाता सूची में सम्मिलित किए जाएंगे ।
3. नवीन सदस्यता पर प्रतिबंध: इस समझौते के निष्पादन की तिथि से लेकर आगामी महासभा चुनाव 2026 सम्पन्न होने तक कोई भी पक्ष नए सदस्य नहीं बनाएगा।
4. न्यायालयों में विचाराधीन प्रकरणों का निस्तारणः दोनों पक्ष सहमत एवं स्वीकार करते हैं कि दोनों पक्षों द्वारा एक-दूसरे के विरुद्ध विभिन्न न्यायालयों, प्राधिकरणों अथवा अन्य मंचों पर दायर वाद, प्रकरण, शिकायतें, एफ. आई. आर एवं कार्यवाहियां आपसी सहमति से वापस लिए जाएगें तथा आवश्यकता होने पर उपस्थित होकर यथा स्थान हस्ताक्षर करेंगें।
5. बैंक खातों का संचालन एवं एकीकरणः महासभा एवं उससे संबंधित संस्थाओं के जिन बैंक खातों के संचालन पर रोक लगी है अथवा जिन्हें विवादवश निष्क्रिय किया गया है, उन्हें दोनों पक्ष आपसी सहमति से बैंक में खाता पुनः संचालन / रोक हटवाने तथा पूर्व अनुसार संचालित होते रहने के लिए संयुक्त प्रार्थना पत्र या प्रस्ताव प्रस्तुत करेंगे। बैंक खातों का संचालन विधान अनुसार निर्वाचित प्रतिनिधि श्री त्रिलोक चन्द जैन अध्यक्ष, श्री महेश जैन जैन महामंत्री, तथा श्री भाग चन्द जैन अर्थ मंत्री द्वारा किया जा सकेगा। विधान अनुसार अर्थ मंत्री तथा अध्यक्ष अथवा महामंत्री दोनों में से किसी एक के संयुक्त हस्ताक्षर से संचालित किया जा सकेगा।
6. निष्पक्ष एवं सर्वमान्य निर्वाचन के लिए स्वतंत्र निर्वाचन संचालन समिति का गठन करना ।
अदतन प्रगति
न्यायालयीन विवादों का समाधान
• समझौता प्रक्रिया के अंतर्गत महासभा से संबंधित विभिन्न न्यायालयीन विवादों को आपसी सहमति एवं सौहार्दपूर्ण तरीके से समाप्त कराने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कार्यवाही की गई।
• महुआ एवं सांगानेर न्यायालयों में विचाराधीन विवादों / प्रकरणों को आपसी सहमति से समाप्त कराने की कार्यवाही की गई, जिससे संगठन को न्यायालयीन विवादों से बाहर निकालकर निर्वाचन एवं संगठनात्मक पुनर्गठन की दिशा में आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त हुआ। यह कदम महासभा के व्यापक हित में आपसी कटुता को समाप्त कर संगठन की एकता एवं भविष्य को प्राथमिकता देने की भावना का परिचायक है।
निर्वाचन संचालन समिति का गठन
समझौते के अनुसार महासभा के आगामी निर्वाचन को निष्पक्ष एवं पारदर्शी ढंग से सम्पन्न कराने के लिए निर्वाचन संचालन समिति का गठन किया गया ।
• समिति की अध्यक्षता श्री अशोक कुमार जैन, आर. ए. एस. (सेवानिवृत्त) को सौंपी गई। समिति में दोनों पक्षों से प्रतिनिधित्व रखते हुए सदस्यों को सम्मिलित किया गया, ताकि निर्वाचन प्रक्रिया में सभी पक्षों का विश्वास बना रहे।
• निर्वाचन संचालन समिति ने सक्रिय होकर समझौता पत्र के प्रावधानों के अनुरूप निर्वाचन संबंधी कार्य प्रारंभ कर दिए हैं।
मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया
• समिति द्वारा दोनों पूर्व महामंत्रियों से 30 अप्रैल 2026 तक जारी सदस्यता रसीदों के आधार पर पात्र सदस्यों की प्रमाणित सूची उपलब्ध कराने हेतु पत्राचार किया गया।
• दोनो पक्षों से श्री पारस जैन द्वारा श्री महेश जैन से 30 अप्रैल 2026 तक बनाए गए मतदातों की सूची उपलब्ध करा दी गई है।
• दोनों सूचियों का एकीकरण, परीक्षण एवं आपत्तियों के निराकरण के पश्चात अंतिम मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ाई जा रही है।
• इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई पात्र सदस्य मताधिकार से वंचित न हो तथा अपात्र व्यक्ति मतदाता सूची में सम्मिलित न हो।
निर्वाचन की तिथि एवं स्थान निर्धारित
• निर्वाचन संचालन समिति की प्रथम बैठक में विस्तृत विचार-विमर्श के पश्चात सर्वसम्मति से आगामी निर्वाचन की तिथि 11 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है।
• निर्वाचन का स्थान जयपुर निर्धारित किया गया है। जयपुर को चयनित करने के पीछे प्रमुख कारण यह है कि राजस्थान में मतदाताओं की संख्या अधिक है तथा जयपुर विभिन्न क्षेत्रों से आने-जाने के लिए सुविधाजनक एवं केंद्रीय स्थान है ।
निर्वाचन के लिए नामांकन प्रक्रिया की तिथि 4 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी की नियुक्ति
• निर्वाचन प्रक्रिया को प्रशासनिक अनुभव एवं निष्पक्षता के साथ सम्पन्न कराने के लिए समिति द्वारा श्री अनिल जैन, सेवानिवृत्त आई.पी.एस. अधिकारी को मुख्य निर्वाचन अधिकारी के रूप में नियुक्त करने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया है।
• उनके अनुभव एवं प्रशासनिक दक्षता का लाभ लेकर निर्वाचन प्रक्रिया को स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी एवं शांतिपूर्ण रूप से सम्पन्न कराने का प्रयास किया जाएगा।
निर्वाचन कार्यक्रम की दिशा में आगे की कार्यवाही
• निर्वाचन संचालन समिति द्वारा निर्वाचन कार्यक्रम तैयार करने की कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है। नामांकन, नामांकन पत्रों की जाँच, नाम वापसी, अंतिम प्रत्याशी सूची, मतदान, मतगणना एवं परिणाम घोषणा आदि की प्रक्रिया मुख्य निर्वाचन अधिकारी के मार्गदर्शन में निर्धारित नियमों के अनुसार सम्पन्न कराई जाएगी।
समाज से सहयोग की अपेक्षा
• महासभा के निर्वाचन को सफलतापूर्वक सम्पन्न कराना केवल निर्वाचन संचालन समिति का दायित्व नहीं, बल्कि सम्पूर्ण समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
समाज के सभी सदस्यों से अपेक्षा है कि वे –
• मतभेदों को पीछे छोड़कर, मनभेद समाप्त कर संगठन की एकता एवं महासभा के उज्ज्वल भविष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
• सभी प्रत्याशियों, मतदाताओं एवं समाजबंधुओं से अनुरोध है कि निर्वाचन प्रक्रिया में पूर्ण सहयोग प्रदान करें तथा किसी भी प्रकार के व्यक्तिगत आरोप–प्रत्यारोप अथवा विवाद से बचते हुए शांतिपूर्ण, निष्पक्ष एवं स्वस्थ लोकतांत्रिक वातावरण बनाए रखने में सहयोग करें।
एक नई शुरुआत की ओर
समझौता पत्र-2026 महासभा के लिए केवल एक समझौता नहीं, बल्कि आपसी विश्वास, सौहार्द और संगठन की पुनर्स्थापना की दिशा में एक नई शुरुआत है।
न्यायालयीन विवादों के समाधान, निर्वाचन संचालन समिति के गठन, मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया, निर्वाचन की तिथि एवं स्थान के निर्धारण तथा मुख्य निर्वाचन अधिकारी की नियुक्ति के साथ महासभा अब निर्वाचन एवं नई कार्यकारिणी के गठन की दिशा में निर्णायक रूप से आगे बढ़ रही है ।
हम सभी का सामूहिक संकल्प होना चाहिए-
“विवाद नहीं, संवाद हो; पक्ष नहीं, महासभा सर्वोपरि हो; व्यक्तिगत हित नहीं, समाजहित सर्वोपरि हो।”
अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा की एकता, गरिमा एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए हम सभी मिलकर इस निर्वाचन प्रक्रिया को सफल बनाएं।
