श्री पल्लीवाल जैन डिजिटल पत्रिका

अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा

(पल्लीवाल, जैसवाल, सैलवाल सम्बंधित जैन समाज)

राष्ट्रीय संत सुरक्षा अभियान – एक सामान्य निवेदन

“जो स्वयं निस्वार्थ भाव से अहिंसा, संयम, तप और त्याग का संदेश देकर समाज को दिशा देते हैं, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना समाज और शासन दोनों का दायित्व है।”
भारत की संत परंपरा हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर है। विशेष रूप से जैन संत-साध्वियाँ कठोर तप, त्याग और अहिंसा का पालन करते हुए पदयात्रा द्वारा समाज में नैतिक मूल्यों का प्रसार करते हैं। वे व्यक्तिगत सुविधाओं से दूर रहकर लोककल्याण के लिए अपना जीवन समर्पित करते हैं। ऐसे संतों की सुरक्षा केवल किसी एक समाज का विषय नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना और सभ्य समाज की जिम्मेदारी है।
हाल के वर्षों में संतों के साथ घटित कुछ अप्रिय घटनाओं ने चिंता उत्पन्न की है। ऐसे में आवश्यकता है कि संतों की सुरक्षित यात्रा और सम्मानजनक वातावरण सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए।

प्रमुख अपेक्षाएँ
संतों से संबंधित घटनाओं की निष्पक्ष एवं त्वरित उच्चस्तरीय जाँच हो तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।
पदयात्रा करने वाले संतों की सुरक्षा के लिए संत सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किया जाए, जिसमें स्थानीय प्रशासन, पुलिस और समाज का समन्वय हो।
पूरे देश के लिए राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति एवं स्पष्ट दिशानिर्देश (SOP) बनाए जाएँ।
संतों के विरुद्ध होने वाले अपराधों को विशेष संवेदनशील श्रेणी में रखकर प्राथमिकता से कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
प्रशासन और समाज के बीच समन्वय स्थापित करने हेतु स्थानीय स्तर पर संत सुरक्षा समन्वय तंत्र विकसित किया जाए।

समाज की भूमिका
संतों के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता का वातावरण बनाएँ।
जनजागरण के माध्यम से अहिंसा और संयम के मूल्यों को बढ़ावा दें।
स्थानीय स्तर पर सहयोग समितियों का गठन कर संतों की सुरक्षित यात्रा में सहयोग करें।
किसी भी प्रकार की अफवाह, घृणा या अपमानजनक व्यवहार का शांतिपूर्ण एवं वैधानिक तरीके से विरोध करें।

निष्कर्ष
संत केवल किसी एक समुदाय की धरोहर नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के नैतिक पथप्रदर्शक हैं। उनकी सुरक्षा, गरिमा और सम्मान की रक्षा करना हमारे सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा करना है। यदि हम अहिंसा और सद्भाव की परंपरा को जीवित रखना चाहते हैं, तो संतों की सुरक्षा के प्रति जागरूक और सक्रिय होना होगा।
“श्रद्धांजलि केवल शब्दों से नहीं, बल्कि संतों की सुरक्षा और सम्मान के संकल्प से सच्ची होती है।”

राजेंद्र कुमार जैन
संयोजक
डिजिटल पत्रिका

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