श्री पल्लीवाल जैन डिजिटल पत्रिका

अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा

(पल्लीवाल, जैसवाल, सैलवाल सम्बंधित जैन समाज)

*रंगों से नहीं, मूल्यों से महान बनता है जीवन*

*चमक से चरित्र तक : श्रेष्ठ जीवन का आध्यात्मिक रहस्य*

संसार में अनेक वस्तुएँ आकर्षक होती हैं, परंतु सभी मूल्यवान नहीं होतीं। कुछ वस्तुएँ आँखों को मोहित करती हैं, तो कुछ आत्मा को प्रकाशित करती हैं। जीवन की श्रेष्ठता बाहरी रंगों, फैशन, मनोरंजन और चकाचौंध में नहीं, बल्कि उन दिव्य मूल्यों में है जो व्यक्ति के अंतःकरण को पवित्र, स्थिर और प्रकाशमान बनाते हैं।

रंगों का आकर्षण कुछ क्षणों के लिए मन को प्रसन्न कर सकता है, किंतु मूल्यों का प्रकाश जन्म-जन्मांतर तक आत्मा का पथ आलोकित करता है।

१. रंग बदलते हैं, मूल्य नहीं बदलते

इंद्रधनुष कुछ क्षणों का अतिथि होता है, फिर विलीन हो जाता है। फूलों का रंग मुरझा जाता है। यौवन का सौंदर्य भी समय के साथ ढल जाता है।

परंतु…

सत्य का रंग कभी फीका नहीं पड़ता।
करुणा की सुगंध कभी समाप्त नहीं होती।
संयम का तेज कभी पुराना नहीं होता।
क्षमा की महिमा कभी कम नहीं होती।

जो व्यक्ति रंगों के पीछे भागता है, वह परिस्थितियों के साथ बदल जाता है।
जो मूल्यों के साथ जीता है, वही परिस्थितियों को बदलने की शक्ति रखता है।

२. जीवन का वास्तविक सौंदर्य भीतर होता है

एक सुंदर पात्र यदि विष से भरा हो तो कोई उसे ग्रहण नहीं करेगा।

दूसरी ओर साधारण मिट्टी का घड़ा यदि शीतल जल से भरा हो तो सब उसके पास आएँगे।

उसी प्रकार—

सुंदर चेहरा आकर्षित कर सकता है।

सुंदर व्यक्तित्व प्रभावित कर सकता है।

किंतु सुंदर चरित्र ही जीवन को महान बनाता है।

भगवान महावीर का वैभव उनके वस्त्रों में नहीं था, उनके वीतराग भाव में था।

३. मूल्य ही मनुष्य को मुद्रा की तरह मूल्यवान बनाते हैं

साधारण कागज़ और नोट दोनों कागज़ ही हैं।

फिर एक की कीमत लाखों क्यों और दूसरे की कुछ भी नहीं?

क्योंकि उस पर मूल्य अंकित है।

इसी प्रकार शरीर तो सभी का समान है।

लेकिन—

किसी का जीवन करोड़ों हृदयों में बस जाता है।

किसी का जीवन अपने परिवार तक भी प्रभाव नहीं छोड़ पाता।

अंतर केवल मूल्यों की मुहर का है।

जिस जीवन पर सत्य, दया, नम्रता, सेवा और संयम की मुहर लग जाती है, वह संसार में पूजनीय बन जाता है।

४. मनोरंजन थकान मिटाता है, मूल्य जीवन सँवारते हैं

आज का युग मनोरंजन का युग है।

मोबाइल, सोशल मीडिया, वेब सीरीज़, रील्स, गेम्स, पार्टियाँ, चिलिंग…

ये सब मन को थोड़ी देर के लिए व्यस्त रख सकते हैं।

लेकिन—

अकेलेपन का दुःख,
चिंता की आग,
असफलता का बोझ,
मृत्यु का भय—

इनमें से किसी को भी मनोरंजन समाप्त नहीं कर सकता।

इन परिस्थितियों में केवल आध्यात्मिक मूल्य ही मनुष्य को संभालते हैं।

५. संगति का रंग अवश्य चढ़ता है

एक सफेद कपड़ा जिस रंग में डुबाया जाए, वैसा ही बन जाता है।

मनुष्य भी अपनी संगति के रंग में रंग जाता है।

रंगीन संगति कहती है—

चलो मौज करते हैं।

जीवन एक बार मिला है।

जो मन में आए वही करो।

मूल्यवान संगति कहती है—

चलो स्वयं को सुधारते हैं।

जीवन दुर्लभ है।

ऐसा जियो कि आत्मा ऊँची उठे।

एक संगति समय बिताती है।

दूसरी संगति जीवन बना देती है।

६. कठिन समय में रंग नहीं, संस्कार साथ देते हैं

जब जीवन में बीमारी आती है…

जब अपमान मिलता है…

जब व्यापार या परिवार में संकट आता है…

तब न महँगे वस्त्र साथ आते हैं, न पार्टियाँ, न मनोरंजन।

उस समय साथ देते हैं—

धैर्य,

श्रद्धा,

आत्मविश्वास,

प्रार्थना,

संयम,

गुरु का उपदेश,

और अपने संस्कार।

यही जीवन की वास्तविक पूँजी है।

प्रेरक उदाहरण

१. रंगीन पतंग और मजबूत डोर

मकर संक्रांति पर रंग-बिरंगी पतंग सबको आकर्षित करती है।

लेकिन यदि उसकी डोर कमजोर हो तो वह थोड़ी ही देर में कट जाती है।

मनुष्य का जीवन भी ऐसा ही है।

रंग पतंग के हैं,
मूल्य उसकी डोर हैं।

डोर मजबूत होगी तो जीवन ऊँचाइयों तक पहुँचेगा।

२. चमकदार मोबाइल और कमजोर बैटरी

मोबाइल कितना भी महँगा हो…

यदि बैटरी समाप्त हो जाए तो वह केवल एक खिलौना रह जाता है।

उसी प्रकार—

बाहरी व्यक्तित्व चाहे जितना आकर्षक हो,

यदि भीतर आध्यात्मिक ऊर्जा नहीं है तो जीवन संकट में टूट जाता है।

३. सुगंधित फूल और फलदार वृक्ष

फूल कुछ दिनों तक सुगंध देते हैं।

लेकिन फलदार वृक्ष वर्षों तक भूख मिटाता है।

वैसे ही—

रंगीन जीवन मनोरंजन देता है।

मूल्यवान जीवन समाज को दिशा देता है।

७. आध्यात्मिक श्रेष्ठता की पहचान

श्रेष्ठ व्यक्ति वह नहीं—

जो सबसे अधिक प्रसिद्ध हो।

जो सबसे अधिक धनवान हो।

जो सबसे अधिक मनोरंजन करता हो।

श्रेष्ठ वह है—

जिसकी उपस्थिति से वातावरण पवित्र हो जाए।

जिसके शब्दों से निराश व्यक्ति में आशा जाग जाए।

जिसके जीवन से दूसरों में सदाचार का संचार हो जाए।

जो स्वयं दीपक बनकर दूसरों का अंधकार दूर करे।

जीवन का लक्ष्य केवल रंगीन बनना नहीं, रंगों से ऊपर उठकर प्रकाश बनना है।

मनोरंजन जीवन की यात्रा को हल्का बना सकता है, परंतु मूल्य ही जीवन को महान बनाते हैं।

जो व्यक्ति अपने भीतर सत्य, करुणा, क्षमा, संयम, सेवा, विनय और आत्मजागृति के दिव्य रत्नों को धारण कर लेता है, वही वास्तव में श्रेष्ठ जीवन जीता है।

“रंग आँखों को आकर्षित करते हैं,
मूल्य आत्माओं को जोड़ते हैं।
चमक क्षणिक होती है,
चरित्र शाश्वत होता है।
इसलिए रंगीन नहीं, मूल्यवान बनिए;
क्योंकि रंग समय के साथ फीके पड़ जाते हैं,
पर मूल्य युगों तक मनुष्य को अमर बना देते हैं।” 🌼

प्रेषक : पारसमल जैन
जोधपुर

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