
पल्लीवाल जैन समाज के वरिष्ठतम सदस्य तथा पल्लीवाल जैन महासभा के संस्थापक महामंत्री डॉ. क्रांतिकुमार जैन अब हमारे बीच नहीं रहे. 96 वर्ष की आयु में आपका देहांत 10 सितम्बर 2026 को जयपुर में हो गया. पल्लीवाल महासभा को स्थापित करने तथा उसे सुदृढ़ बनने में आपका अमूल्य योगदान रहा. आप महासभा के सन् 1969 से 1979 तक महामंत्री तथा सन् 1979 से 1982 तक अध्यक्ष पद पर कार्यरत रहे. अंत समय तक महासभा को आपका मार्ग दर्शन मिलता रहा. आपके निधन से समाज को एक अपूरणीय क्षति हुई है. मैं उनको अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ.
यदि हम थोड़ा पीछे का इतिहास देखें तो पता चलता है कि हमारे पुरखों ने पल्लीवाल संगठन खड़ा करने में कितना परिश्रम किया है. सन् 1965-68 के मध्य पल्लीवाल समाज के कुछ प्रबुद्ध एवं चिंतनशील व्यक्तियों के मन में विचार आया कि जैन समाज की विभिन्न उप-जातियों की अपनी अपनी एक प्रतिनिधि संस्था है, लेकिन पल्लीवाल जाति की कोई ऐसी प्रतिनिधि संस्था नहीं है. उन्होंने आपस में सलाह मशविरा किया कि हमारा भी एक संगठन होना चाहिए. इसी विचार के फलस्वरुप सन् 1969 में “अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा ” की विधिवत स्थापना हुई. इसे मूर्तरूप देने में डॉ. क्रांतिकुमार जैन, डॉ. किशनचंद जैन, श्री ब्रिजेन्द्र कुमार जैन, श्री प्रकाश चंद जैन, श्री रामसिंह जैन आदि अनेक महानुभावों की भागीदारी रही. डॉ. क्रांतिकुमार जी को महामंत्री, डॉ. किशनचंद को अध्यक्ष और श्री प्रकाशचंद को अर्थमंत्री के पद का दायित्व सौंपा गया.
संगठन को मजबूती प्रदान करने और इसका विस्तार करने में इन सभी ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया. आगरा, जगरौठी, मुरैना, फिरोजाबाद, कन्नौज के पल्लीवालों को संगठित किया. जैसे ही पता चला कि नागपुर क्षेत्र में भी पल्लीवालों के 30-35 घर हैं और उनके अपने जैन मंदिर भी हैं, उन्हें भी संगठन में सम्मलित किया. आगरा के सैलवाल और अलवर तथा पालम के जैसवाल समाज से पल्लीवालों का रोटी-बेटी संबंध काफी समय से चलता चला आ रहा था. इनका भी पल्लीवाल जैन महासभा में विलय कर लिया गया. आज हम पल्लीवाल जैन समाज का जो संगठनात्मक रूप देख रहे हैं उसमें सभी घटक सम्मलित हैं.
डॉ. क्रांतिकुमार जी और उनकी टीम अपनी सरकारी छुट्टियों को महासभा को संगठित करने के लिए ही उपयोग में लाते थे. ‘श्री पल्लीवाल जैन पत्रिका’ का प्रारम्भ सन् 1969 से ही प्रारंभ कर दिया गया था. ये लोग गाँव-गाँव घूमते, समाज के लोगों को महासभा से जुड़ने के लिए प्रेरित करते. इन्होनें अनेक शाखायें खुलवाईं, ध्रुव फंड एकत्रित किया. विधवा-अनाथ फण्ड बनाया. समाज में दहेज़ प्रथा के विरुद्ध आवाज उठाई, सामूहिक विवाह करने के लिए प्रेरित किया जिससे दहेज़ जैसी कुरीति समाप्त हो सके. समाज के लिए समर्पित ऐसे डॉ. क्रांतिकुमार जी को मैं पुनः विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ.
डॉ. अनिल कुमार जैन
जयपुर