श्री पल्लीवाल जैन डिजिटल पत्रिका

अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा

(पल्लीवाल, जैसवाल, सैलवाल सम्बंधित जैन समाज)

डॉ. क्रांति कुमार जी जैन : एक संस्मरणात्मक श्रद्धांजलि

आदरणीय डॉक्टर क्रांति कुमार जी जैन के आकस्मिक निधन के समाचार ने मन को बहुत क्षुब्ध कर दिया। मेरे जेहन में वे दिन घूमने लगे, जब डॉक्टर साहब के मन में पल्लीवाल जैन समाज को संगठित कर एक अखिल भारतीय संगठन बनाने का विचार पनपा।
वर्ष 1969 के प्रारंभ में कोटा में पल्लीवाल जैन समाज के कुछ महानुभाव एवं श्रेष्ठिजन एकत्रित हुए। उस समय की देश-काल की परिस्थितियों के अनुसार समाज को एकता के सूत्र में बाँधने का संकल्प लिया गया होगा। उसी वर्ष 1969 में कुछ श्रेष्ठिजन भरतपुर में भी एकत्रित हुए और आपसी विचार-विमर्श के बाद अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा के गठन के संकल्प एवं प्रक्रिया पर विचार हुआ।
अलवर के श्री हरिराम जी कोठारी के नेतृत्व में समाजजनों का पहला अधिवेशन संपन्न हुआ, जिसमें डॉक्टर किशनचंद जी जैन को अध्यक्ष तथा डॉक्टर क्रांति कुमार जी जैन को महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई। मुझे ऐसा ध्यान आता है कि कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी कोटा के व्यवसायी श्री नेमीचंद जी जैन को दी गई थी।
आगरा में महासभा की कार्यकारिणी की प्रथम बैठक हुई। यह बैठक श्री पल्लीवाल जैन धर्मशाला, धूलियागंज में आयोजित हुई थी। इस बैठक में देशभर के अनेक महानुभाव एवं श्रेष्ठिजनों ने अपनी सहभागिता दी थी। उनमें से कुछ प्रमुख व्यक्तियों के नाम जो मुझे याद हैं, वे हैं—श्री जैनी लाल जी, दिल्ली; श्री भोलानाथ जी, ग्वालियर; मास्टर गोवर्धन दास जी, आगरा; श्री गिर्राज किशोर जी, आगरा; श्री हुकुमचंद जी जैन, फिरोजाबाद; श्री बृजेंद्र कुमार जैन, आगरा; श्री कस्तूरचंद जैन, फिरोजाबाद तथा देशभर से आए अनेक अन्य महानुभाव। इस बैठक में मैं स्वयं भी उपस्थित था।
इस बैठक में दहेज प्रथा के संबंध में विशेष प्रस्ताव पारित किया गया था कि इस कुप्रथा का विरोध किया जाना चाहिए। इसी आधार पर एक अंतर्देशीय पत्र छपवाया गया, जिसे जहाँ भी विवाह होता, वहाँ भेजे जाने की प्रथा प्रारंभ की गई। समय के साथ धीरे-धीरे यह प्रथा बंद हो गई।
इसी अवसर पर एक समाचार-पत्र के प्रकाशन का भी प्रस्ताव पारित हुआ था, लेकिन आर्थिक अभाव के कारण उसके पाँच-छह अंक ही प्रकाशित हो सके और बाद में उसका प्रकाशन बंद हो गया।
यहाँ यह उल्लेख करना आवश्यक है कि उस समय 15 से 18 वर्ष तक की आयु के नवयुवकों ने देशभर से आए श्रेष्ठिजनों के ठहरने, उनके नाश्ते-खाने तथा स्वागत-सम्मान की व्यवस्था में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। व्यवस्था में भाग लेने वाले अधिकांश कार्यकर्ताओं की आयु लगभग 17-18 वर्ष रही होगी।
श्री अशोक कुमार जैन ने भी देशभर से आए हुए पल्लीवाल जैन समाज के महानुभावों को सम्मानपूर्वक ठहराने तथा उनके नाश्ते-खाने की व्यवस्था में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। उनकी कर्तव्यनिष्ठा को देखकर डॉक्टर क्रांति कुमार जी ने श्री बृजेंद्र कुमार जी से पूछा—“यह लड़का कौन है?” उस समय मैं भी श्री बृजेंद्र कुमार जी के साथ ही खड़ा था। श्री बृजेंद्र कुमार जी ने अपने हिसाब से अशोक के बारे में उन्हें बताया।
डॉक्टर क्रांति कुमार जी ने अशोक से बातचीत की और बाद में अशोक को नवयुवक मंडल का अध्यक्ष अथवा मंत्री बना दिया। यही अशोक आगे चलकर लगभग 45-50 वर्षों के बाद अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा के महामंत्री बने। वर्तमान में श्री अशोक कुमार जैन जयपुर निवासी हैं।
डॉक्टर क्रांति कुमार जी ने महासभा को समाज के समक्ष एक मजबूत संगठनात्मक मंच के रूप में स्थापित करने में अपना बहुमूल्य योगदान दिया, जो स्वर्ण अक्षरों में लिखे जाने योग्य है। हालांकि उनके साथ बाद में अध्यक्ष के रूप में डॉक्टर किशनचंद जी ने भी अपना बहुमूल्य समय एवं परिश्रम देकर महत्वपूर्ण योगदान दिया। इन दोनों महान विभूतियों ने समाज को एक मंच पर लाने का जो प्रयास किया, वह सदैव अविस्मरणीय रहेगा।
महासभा के स्वरूप को आपसी मतभेदों से हमेशा दूर रखने का प्रयास किया गया। इस कारण जगरोटी के पल्लीवाल लोगों का जुड़ाव महासभा से पूरी तरह नहीं हो सका। डॉक्टर साहब की अनवरत मेहनत, निष्ठा और वाक्पटुता ने जगरोटी के कुछ पल्लीवाल जैन समाज के महानुभावों को महासभा की ओर आकर्षित किया, फिर भी जगरोटी के पल्लीवालों का महासभा से पूरी तरह जुड़ाव नहीं बन पाया।
डॉक्टर क्रांति कुमार जी एवं डॉक्टर किशनचंद जी के साथ मुझे कार्य करने का काफी अनुभव रहा है। शायद ही कोई ऐसी बैठक होती हो, जहाँ श्री बृजेंद्र कुमार जी जैन, पीली कोठी, एवं मैं स्वयं न गए हों। लगभग हर कार्यकारिणी एवं प्रतिनिधि सम्मेलन में हम लोगों की सहभागिता रही।
मैं 80 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुका हूँ और अब याददाश्त भी पहले जैसी नहीं रही है। लेकिन एक घटना ऐसी है, जिसे मैं कभी नहीं भूल सकता।
जब महावीर जी के पास पटोंदा गाँव में श्री धन्नालाल जी जैन के यहाँ कार्यकारिणी की बैठक हुई थी, उसमें देशभर से अनेक विशिष्ट एवं वरिष्ठ पल्लीवाल जैन महानुभाव एकत्रित हुए थे। मेरे ख्याल से लगभग 60-70 लोग रहे होंगे। आगरा से भी लगभग दस-बारह व्यक्ति गए थे।
श्री महावीर जी के दर्शन के कारण वहाँ काफी संख्या में लोग एकत्रित हुए थे। इस बैठक में महावीर जी के संबंध में वहाँ के कुछ व्यक्तियों ने प्रस्ताव पारित करवाने के लिए बड़ी जिद और बहस की। बात यहाँ तक बढ़ गई कि लोग झगड़ा करने पर उतारू हो गए। जमीन पर लट्ठ बजाने लगे और आपस में खींचतान होने लगी। बैठक में भाग लेने आए महानुभावों में निराशा का वातावरण बन गया और लोग बैठक छोड़कर जाने लगे।
मंच से डॉक्टर क्रांति कुमार जी ने समाजजनों को रोकने का बहुत प्रयास किया, लेकिन अधिकांश लोग क्षुब्ध होकर बैठक से उठकर चले गए। डॉक्टर साहब, श्री बृजेंद्र कुमार जी और मैं, क्रांति कुमार जी के साथ वहीं बैठे रहे। अंततः महासभा की बैठक समाप्त हो गई। श्री धन्नालाल जी ने शाम को हमें भोजन कराने के बाद विदा किया।
मैं उस घटना का चश्मदीद गवाह हूँ। उस कठिन परिस्थिति में भी डॉक्टर क्रांति कुमार जी टस से मस नहीं हुए। यही उनकी जीवटता, धैर्य और संगठन के प्रति निष्ठा थी।
अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा में सन् 2000 के बाद से मेरी सक्रियता लगभग समाप्त-सी हो गई। यह उल्लेखनीय है कि श्री पल्लीवाल जैन पत्रिका का प्रकाशन तीन-चार वर्षों तक आगरा से हुआ। मुझे पत्रिका के संयोजक का दायित्व दिया गया था। बाद में पत्रिका का प्रकाशन मथुरा से होने लगा।
आज डॉक्टर क्रांति कुमार जी हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन उनका कृतित्व और उनका व्यक्तित्व तथा उन्होंने समाज पर जो प्रभाव छोड़ा, उसे समाजजन कभी भुला नहीं पाएंगे। बिखरे हुए पल्लीवाल जैन समाज को जिस एकता के सूत्र में उन्होंने पिरोने का प्रयास किया, वह अपने आप में एक बहुत बड़ा कार्य था।
मैं अपनी ओर से डॉक्टर क्रांति कुमार जी को श्रद्धा-सुमन अर्पित करता हूँ।

रमेश चंद जैन
(आगरा कॉलेज)
सेक्टर 12D आवास विकास कॉलोनी आगरा UP

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