हम सभी सामाजिक प्राणी है। हम सभी समाज में ही रहते हैं और समाज में ही जीते है। सामाजिक प्राणियों का जीवन एक दूसरे के सहयोग से चलता है, जो स्वयं दूसरों को सहयोग देता है और दूसरों से सहयोग लेता है व समाज व्यवहार को प्रस्तुत करता है। हमारी भावना यह है कि यही सहयोग की भावना अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा में होनी चाहिए ।
अखिल भारतीय पल्लीवाल महासभा भी हमारे समाज की एक प्रतिनिधि सभा है। आज करीब 56 वर्ष पूर्व समाज के प्रबुद्ध एवं चिन्तनशील महापुरूषों द्वारा इसका गठन किया गया था। इसका विधिवत् विधान बनाया गया था । विद्यानुसार समय-समय पर इस संस्था के चुनाव सम्पन्न होते रहे कार्यकारिणी एवं पदाधिकारियों का चुनाव होता रहा समाज के सक्रीय व समाज के प्रति समर्पित समाज सेवी महासभा के पदाधिकारी निर्वाचित होते रहे, बदलते रहे। बीच में एक-दो बार विवाद भी हुए न्यायालय तक भी विवाद गये किन्तु सुखद पहलू यह रहा कि मामला जल्दी ही सुलझ गया। महासभा निर्विघन उन्नति की और अग्रसर होती रही ।
महासभा की वर्तमान कार्यकारिणी का कार्यकाल अलवर में सम्पन्न हुए, 22 जनवरी 2023 से प्रारम्भ हुआ है। यह चुनाव भय के वातावरण में शांतिपूर्वक सम्पन्न हुए । भय का कारण यह था कि इससे पूर्व महासभा के इसी कार्यकाल का चुनाव दिनांक 18.09.2022 को हस्तिनापुर में हुए थे चुनाव के बीच में ही आपस में लड़ाई झगड़ा, मारपीट होने के कारण वह चुनाव रद्द करना पड़ा था। चुनाव से पूर्व नामांकन का स्थान नागपुर में रखने का अविवेकपूर्ण निर्णय, चुनाव अधिकारी द्वारा खराब व अव्यवहारिक चुनाव के लिए मतदान की व्यवस्था हस्तिनापुर में हुए झगड़े फिसाद का एक बड़ा कारण था। अलवर चुनाव के बाद सब ठीक हो गया था, समाज में एक उम्मीद कायम हुई कि नव निर्वाचित तीनों पदाधिकारियों एवं कार्यकारिणी सदस्यों में पूर्ण सामंजस्य बनेगा और यह सभी टीम भावना से समाज की उन्नति के लिए कार्य करेगें।
किन्तु दुर्भाग्यवश ऐसा हुआ नहीं तीनों पदाधिकारियों में सामंजस्य नहीं बना आपस में विवाद पैदा हुए और यह बढ़ते बढ़ते विकराल हो गये ।
विवाद पैदा होने के कारण –
कार्यकारिणी की दिनांक 19.03.2023 को श्री पदमपुराजी में सम्पन्न हुई प्रथम बैठक में पदाधिकारियों व कुछ सदस्यों के आपस में हुए ताट विवाद के कारण, बिना किसी निर्णय के मीटिंग की समाप्ति की घोषणा अध्यक्ष महोदय द्वारा कर दी गई थी। इस बैठक में वाद विवाद का मुख्य कारण यह था कि इस प्रथम मीटिंग में महामंत्री द्वारा पूर्व अध्यक्ष व पूर्त महामंत्री को आमंत्रित कर मीटिंग में बुला लिया था जो विधान सम्मत नहीं था तथा अध्यक्ष के संज्ञान में भी नहीं था। जिसका अध्यक्ष, अर्थमंत्री एवं अन्य सदस्यों द्वारा मीटिंग में विरोध किया गया। दूसरा कारण यह था कि स्वयं महामंत्री द्वारा सहमंत्री के नाम भी घोषणा कर दी गई, जिसका कार्यकारिणी द्वारा कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया गया था। नाम की घोषणा के तुरन्त बाद महामंत्री द्वारा घोषित सहमंत्री मीटिंग में उपस्थित हो गये । अध्यक्ष, अर्थमंत्री व अन्य सदस्यों द्वारा विरोध किये जाने पर विवाद बढ़ता गया और मीटिंग की कार्यवाही में व्यवधान पैदा हो गया। यह दोनों ही कारण अवैधानिक थे। विधान की धारा 15 ( 2 ) में स्पष्ट उल्लेख है कि अंतिम भूतपूर्व अध्यक्ष व महामंत्री एवं सहायक मंत्री का मनोनयन / चन बहुमत के आधार पर नव निर्वाचित पदाधिकारियों तथा सदस्यों द्वारा किया जावेगा। पूर्व अध्यक्ष व महामंत्री का मनोयन /चयन निवार्चित कार्यकारिणी द्वारा किया ही नहीं गया और उनको मीटिंग में उपस्थित कराना विधान के अनुरूप नहीं था। ठीक इसी प्रकार सहमंत्री का प्रस्ताव कार्यकारिणी में पास होना आवश्यक था। प्रस्तावित नाम पर महामंत्री की सहमति आवश्यक होती है। उपरोक्त प्रक्रिया के बाद ही इन्हें मीटिंग में आमंत्रित करना चाहिए था । जिससे मीटिंग में विवाद नहीं होता ।
दूसरी मीटिंग दिनांक 24.06.2023 को श्री महातीर जी में सम्पन्न हुई उसमें भी विधान की घोर अवहेलना हुई, तरिष्ठ उपाध्यक्ष, उपाध्यक्ष, संयुक्त मंत्री संगठन मंत्री आदि पदाधिकारियों का मनोयन / चयन विधान की धारा 15 ( 2 ) के अनुसार नवर्निवाचित पदाधिकारियों व सदस्यों द्वारा किया जाना चाहिए था। इस निर्वाचन में भी उपस्थित नव निर्वाचित पदाधिकारियों व सदस्यों के अलावा अन्य व्यक्तियों द्वारा मतदान किया गया था । उपरोक्त पटों का निर्वाचन / चयन पूर्ण रूप से अवैधानिक था। विधान की घोर अवहेलना की गई थी।
इन दोनों मीटिंग में हुई अवैधानिक कार्यवाहियों से आपस में तिताद पैदा हुए जो आगे जाकर बढ़ते ही चले गये। उसके बाद दोनों पक्षों में मतभेद इतने बढ़ते गये कि सदस्यों की महासभा में सदस्यता समाप्त करने, पदाधिकारियों को पदच्युत करना । उक्त सभी निर्णयों से आपस में वैमनस्यता बढ़ती चली गई। समाज में अच्छा संदेश नहीं गया। संगठन कमजोर हुआ।
सबसे पहले एक पक्ष द्वारा दिनांक 12.05.2024 को जयपुर में हुई मीटिंग में कार्यकारिणी के तीन सदस्यों की महासभा की सदस्यता समाप्त की गई। उसके बाद अध्यक्ष एवं अर्थमंत्री (जिसमें महामंत्री का नाम था, जिसमें महामंत्री उपस्थित नहीं हुए थे । उन्होंने इस सम्मलेन को अध्यक्ष का व्यक्तिगत सम्मलेन बताया।) की अपील पर अलवर में साधारण सभा का अधिवेशन प्रतिनिधि सभा का सम्मेलन दिनांक 25 व 26 अगस्त 2024 को बुलाया गया था। प्रतिनिधि सभा द्वारा महामंत्री के खिलाफ अविश्वास पास किया जाकर उन्हें महामंत्री पद से पदमुक्त कर दिया गया था जिसे महामंत्री पक्ष ने स्वीकारा नहीं था । अन्य कई सदस्यों को उससे पूर्व अध्यक्ष द्वारा महता में बुलाई गई मीटिंग में महासभा की सदस्यता समाप्त कर दी गई थी ।
अलवर सम्मेलन के बाद महामंत्री द्वारा कार्यकारिणी की मथुरा में मीटिंग आहूत की गई उसमें अध्यक्ष त अर्थमंत्री दोनों को उनके पदों से हटा कर उनकी महासभा से सदस्यता भी समाप्त कर दी गई। इनके साथ अन्य कई सदस्यों की महासभा सदस्यता भी समाप्त कर दी गई थी । मथुरा मीटिंग में ही कार्यकारिणी द्वारा नये अध्यक्ष व अर्थमंत्री मनोनीत कर दिये गये । यहाँ यह उल्लेख करना उचित होगा कि मथुरा मीटिंग की कार्यवाही विधान सम्मत नहीं कही जा सकती है। कार्यकारिणी निर्वाचित अध्यक्ष व अर्थमंत्री के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव नहीं ला सकती है और न ही इन पदों पर निर्वाचन कर सकती है।
इसके बाद दिनांक 31.01.2025 को महामंत्री द्वारा अलवर शाखा के सहयोग में अलवर में प्रतिनिधि सम्मेलन व साधारण सभा का अधिवेशन बुलाया गया जिसमें पुनः अध्यक्ष, अर्थमंत्री को उनके पदों से हटाकर उनकी महासभा की सदस्यता समाप्त कर उनके स्थान पर मथुरा मीटिंग में मनोनीत किये गए अध्यक्ष व अर्थमंत्री के मनोनयन का प्रस्ताव प्रतिनिधि सभा में पास किया गया। इसी प्रतिनिधि सभा में अन्य 6 सदस्यों की भी महासभा से सदस्यता समाप्त की गई।
इस प्रकार दोनों गुटों का पदाधिकारियों की व सदस्यों की महासभा से निष्कासीत करने का दौर चलता रहा, इस पर विराम लगा कर दोनों पक्षों की एकता की और हमारे कदम बढ़ने चाहिए।
आज स्थिति यह है कि महासभा स्पष्ट रूप से दो गुटो में विभाजीत हो गई है। एक तरह से दो महासभा प्रतीत हो रही है। जिसको देख कर समाज अंचमभित है कि यह क्या हो रहा है ? ऐसे कब तक चलता रहेगा ? सबसे बड़ा नुकसान यह हो रहा है कि जो महासभा थी एक अच्छी गतिविधि विधता व बेसहारा लोगों की आर्थिक सहायता 1000/- रूपये महिने भेजी जा रही थी उसमें अवरोध पैदा हो गया। समाज असंगठित सा लगता है। संगठन कमजोर हो रहा है। आपस में मनों में कटुता का भात पैदा होते जा रहे है।
समाज का प्रत्येक व्यक्ति चाहता है कि यह स्थिति समाप्त हो पुनः सब एक होकर महासभा एक नजर आये। कार्यकारिणी में पुनः एकता कायम हो । पदाधिकारियों में पूर्ण सामांजस्य हो। इसके लिए अनेक प्रयास भी हुए चाहे समन्वय समिति के माध्यम से या व्यक्तिगत समाज के जनो द्वारा किन्तु सफलता नहीं मिली। कुछ लोगों द्वारा दुर्भात से वैमनस्ता पूर्वक एक दूसरे को टारगेट कर अनर्गल आक्षेप लगाया गये कि अमुक-अमुक व्यक्ति एकता नहीं होने देते है, जबकि आज समाज में अच्छी सोच रखने वाला प्रत्येक व्यक्ति यह चाहता है कि समाज में एकता कायम हो । महासभा कार्यकारिणी एकता हो । महासभा में यह आया हुआ गतिरोध समाप्त हो इस गतिरोध को समाप्त करने के लिए कई समाज सेवियों द्वारा अपने अपने सुझाव भी दिये गये हैं ।
सुझाव –
उचित यह रहेगा। समाज के प्रमुख लोग दोनों पक्षों से बातचीत कर उनके विचार जाने, फिर उन्हें उचित समय पर एक साथ बैठाकर विस्तृत चर्चा कर समाधान निकालकर पुनः एकता कायम करें।
श्रीचन्द जैन
पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री
110, अशोक विहार विस्तार,
गोपालपुरा बाईपास, जयपुर
बहुत अच्छा सामरिक लेख