श्री पल्लीवाल जैन डिजिटल पत्रिका

अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा

(पल्लीवाल, जैसवाल, सैलवाल सम्बंधित जैन समाज)

जयपुर शाखा को प्राप्त निःशुल्क जमीन की जांच रिपोर्ट 21.12.2021 के संदर्भ में पूर्व महामंत्री महेश जैन (अलीपुर ) द्वारा लगाये गये आरोपों का इसी जांच रिपोर्ट द्वारा खण्डन

सम्माननीय बन्धुओं,

जैसा कि आप सभी को विदित है कि जयपुर शाखा को 4000 वर्गगज जमीन निशुल्क प्राप्त हुई है। इस जमीन को विवादित बनाने के लिए पल्लीवाल जैन पत्रिका के अंक 25 मई-जून, 2021 में षडयन्त्र पूर्वक जमीन से संबंधित एक लेख प्रकाशित किया गया। इस झूठे लेख के बचाव में महासभा के पूर्व अध्यक्ष श्री आर. सी. जैन साहब द्वारा समाज के काबिल व्यक्तियों की उपेक्षा कर समाज से बाहर के अपने परिचित तीन सदस्यों की कमेटी गठित कर जांच कराई। इस कमेटी से वास्तविक तथ्यों को छुपा कर मनमाफिक रिपोर्ट बनवाई गई। जो आप सभी के समक्ष अवलोकनार्थ प्रस्तुत है।
अब पुनः यह मुद्दा पूर्व महामन्त्री महेश जी को समाज द्वारा पद से हटा दिये जाने एवं उनके स्थान पर मुझे पदस्थापित किये जाने के कारण द्वेपभावना से उठाया गया है। ये इस जांच रिपोर्ट की आड में अपनी तथाकथित घरेलू पल्लीवाल पत्रिका / वाट्सअप एवं सोशल मीडिया में अनर्गल ‘घोटाले’ जैसे शब्दों का लगातार उपयोग करते आ रहें है जबकि उक्त जांच रिपोर्ट में घोटाले या वित्तीय अनियमितता जैसे शब्दों का कहीं कोई जिक्र नहीं है। दूसरी ओर जब महेश जी पद पर थे तब तक इनको इस जमीन में घोटाला नजर नहीं आया और न ही इनके द्वारा कभी मेरे विरूद्ध कोई टीका टिप्पणी की गई। लेकिन समाज द्वारा इनको बर्खास्त कर दिये जाने से विचलित होकर ये अपना संयम खो चुके हैं और लगातार अपनी ओछी मानसिकता के चलते उक्त जांच रिपोर्ट की आड़ में स्वय के द्वारा झोटवाडा समिति में किया गया मंदिर घोटाला, जिसको इन्होंने अपने पत्र में स्वीकार किया है, इसको दबाने के उददेश्य से झूठे एवं भ्रामक आरोप प्रत्यारोप अपनी घरेलू पल्लीवाल पत्रिका व वाट्सअप के जरिये समाज में फैला रहे हैं।
जांच रिपोर्ट में उल्लेखित वे तथ्य जिनका जयपुर शाखा रिकार्ड से कोई सम्बन्ध सरोकार नही है। इस रिपोर्ट में कुछ नही होने के बावजूद भी पूर्व महामंत्री महेश जी समाज के सामने अनर्गल मनगढन्त तथ्य एवं घोटाले जैसे शब्द का प्रयोग कर झूठ एवं भ्रम फैला रहे है। जांच रिपोर्ट की प्रति संलग्न है। जांच रिपोर्ट से ऐसा प्रतीत होता है कि महासभा द्वारा जांच समिति को यह नहीं बताया गया कि यह जमीन जयपुर शाखा की है। इसमें महासभा का किसी भी प्रकार का सहयोग और योगदान नहीं है। यह जमीन जयपुर शाखा कार्यकारिणी, जमीन समिति और जयपुर शाखा के माननीय सदस्यों द्वारा अपने स्वयं व उनके रिश्तेदारों व परिचितों द्वारा उक्त योजना में भूखण्डों को क्रय कर उसके एवज में जयपुर शाखा को निःशुल्क प्राप्त हुई है। इसका जिक्र पूरी रिपोर्ट में कहीं भी अंकित नहीं है। पूरी रिपोर्ट इस प्रकार तैयार करवाई गई है जैसे उक्त जमीन महासभा द्वारा प्राप्त की गई हो । उक्त जांच रिपोर्ट में बार- बार महासभा की जमीन अंकित किया गया है। जांच रिपोर्ट के शुरूआत में ही प्रथम पैरे की अन्तिम लाईन में अंकित किया गया है कि “अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा में भूखण्ड आवंटन योजना” अर्थात् महासभा द्वारा प्रारम्भ से ही जांच कर्ताओं को भ्रम में रख कर यह कहा कि यह जमीन महासभा की है। जांच कमेटी द्वारा भी इसी एंगल से जांच कर उनके चाहेनुसार रिपोर्ट प्रेषित की गई है।
1. जांच रिपोर्ट में दिनांक 15.3.2018 की मीटिंग का जिक्र किया गया है। इस तिथि को कभी भी ना तो जयपुर शाखा में मीटिंग आहूत की गई और ना ही जमीन समिति की मीटिंग हुई। शाखा रिकार्ड पर कोई साक्ष्य उपलब्ध नही है ।
2. उक्त जांच कमेटी द्वारा दिनांक 16.12.2018 को मुझे संयोजक होना बताया गया है जबकि मेरे द्वारा दिनांक 2.9.2018 को शाखा के चुनाव होने के पश्चात समस्त रिकार्ड जयपुर शाखा की नई कार्यकारिणी को संभला दिया गया था। आगे की जमीन संबंधी प्रत्येक कार्यवाही नई कार्यकारिणी द्वारा सम्पन्न की गई जिसका रिकार्ड जयपुर शाखा में उपलब्ध है।
3. उक्त जांच रिपोर्ट में दिनांक 16.12.2018 को यह लिखा गया है कि सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से निर्णय लेकर आगे की कार्यवाही करने हेतु मुझे अधिकृत कर दिया है- यह तथ्य सरासर गलत एवं झूठा है। वास्तविकता यह है कि इस दिनांक को 8 सदस्यों की एक कमेटी बनाई गई थी जिसमें मुझे भी एक सदस्य के रूप में ही शामिल किया गया। रिकार्ड जयपुर शाखा में उपलब्ध है।
4. जांच रिपोर्ट में एमओयू में परिवर्तन संयोजक एवं अन्य द्वारा होना बताया गया है – जबकि यह परिवर्तन जयपुर शाखा के स्तर पर लिये गये निर्णयानुसार तत्कालीन कार्यकारिणी एवं जमीन समिति द्वारा किया गया। एमओयू में परिवर्तन क्यों और किस कारण व किन परिस्थितियों वश किया गया इसका उल्लेख रिपोर्ट में जानबूझ कर नहीं किया गया जो कि एमओयू परिवर्तन का बहुत ही महत्वपूर्ण तथ्य है। यह भी शाखा रिकॉर्ड में उपलब्ध है।
5. उक्त जांच रिपोर्ट में दिनांक 20.6.2019 को कार्यकारिणी की बैठक होना लिखा है- यह तथ्य भी बिलकुल गलत व निराधार है। इस तारीख को किसी भी तरह की मीटिंग नही हुई । शाखा में कोई रिकार्ड उपलब्ध नही है।
6. इस रिपोर्ट में लिखा गया है श्री पारसचन्द जैन, संयोजक, श्री राजेन्द्र कुमार जैन कैमरी, अध्यक्ष, श्री देवेन्द्र कुमार जैन मंत्री एवं श्री बनवारी लाल जैन अर्थमंत्री, इन चारों के द्वारा अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा शाखा जयपुर के नाम गिफ्ट डीड सहर्ष स्वीकार की गई है – जबकि जांच कमेटी ने जानबूझ कर इस तथ्य को अपनी जांच रिपोर्ट में छुपाया है कि तीसरे एमओयू की शर्तों के विपरीत जेडीए पटटे के स्थान पर रजिस्ट्री का निर्णय किसके द्वारा लिया गया ? यह तथ्य बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह निर्णय तत्कालीन अध्यक्ष श्री राजेन्द्र कुमार जैन कैमरी की अध्यक्षता में तत्कालीन कार्यकारिणी का था और इस निर्णय में, मैं दूर-दूर तक शामिल नही था । वास्तविकता यह है कि एमओयू के विपरीत कोई कार्य हुआ है तो वह सिर्फ और सिर्फ तत्कालीन अध्यक्ष श्री राजेन्द्र कुमार जैन, कैमरी के अध्यक्षता वाली कार्यकारिणी द्वारा किया गया है। ज्ञात रहे कि पारसचन्द जैन को शाखा पदाधिकारियों द्वारा जारी पत्र दिनांक 10.6.2019 से अवगत कराया गया था कि जमीन संबंधी कार्य, हमारे अथक प्रयासों के बाद भी पूर्ण नही हो पा रहें हैं। अतः कृपया आप इस कार्य को 2 माह की अवधि में सम्पादित करानें में हमारा सहयोग करें। तब मेरे द्वारा अपना सम्पूर्ण सहयोग समाज हित में दिया गया था। शाखा रिकार्ड में इस पत्र की प्रति भी उपलब्ध है।
उक्त जांच रिपोर्ट मे यह लिखा है कि पारसचन्द जैन के कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी महासभा के किसी भी सदस्य ने कोई मौखिक या लिखित आपत्ति कभी भी दर्ज नहीं करवायी इतना ही नहीं, इस रिपोर्ट मे यह भी लिखा है कि इस पूरे कार्य में किसी भी सदस्य द्वारा किसी भी तरह का संदेह भी व्यक्त नहीं किया गया है, साथ ही इस रिपोर्ट मे लिखा है कि इस तरह का कोई विवाद संस्था अथवा कार्यकारिणी में नही आया इसलिए जयपुर शाखा के स्तर पर कोई विवाद कार्यकारिणी में नहीं चला । इससे स्पष्ट है कि ये जमीन जयपुर शाखा को प्राप्त हुई है और जयपुर समाज व शाखा कार्यकारिणी में इस जमीन को लेकर कभी किसी भी सदस्य को कोई आपत्ति नहीं थी इसलिए इतने सालों के बाद भी आज तक शाखा में कोई विवाद उत्पन्न कभी नहीं हुआ। इसका मतलब यह हुआ कि महासभा द्वारा यह विवाद जबरन रजिस्ट्री के दो साल बाद उत्पन्न कर इस जमीन को विवादित बनाने हेतु अपने पद और महासभा मंच के साथ पल्लीवाल पत्रिका का भी दुरूपयोग किया गया ।
जांच रिपोर्ट का अन्तिम निर्णय – “संयोजक श्री पारस चन्द जैन को जिस संस्था के प्रस्ताव (दिनांक 16.4.2017 ) द्वारा अधिकृत किया गया उसी संस्था को उक्त जमीन सम्बन्धी समस्त कार्यवाहियों को देखने, सुनने तथा निर्णय करने का अधिकार है ।” पारसचन्द जैन को जयपुर शाखा द्वारा नियुक्त किया गया था । अतः इस जमीन से सम्बन्धित यदि कोई विवाद उत्पन्न होता तो उसे सुनने व निर्णय करने का अधिकार भी जयपुर शाखा में समाहित था । इस पूरी रिपोर्ट के निष्कर्ष के रूप में इतनी महत्वपूर्ण विवेचना को महासभा द्वारा जानबूझ कर अनदेखा कर खुद के स्तर पर झूठा विवाद उत्पन्न कर समाज में भ्रम फैलाया गया जो महासभा के अब तक के इतिहास में बहुत ही शर्मनाक है और इसे भी हस्तिनापुर घटनाक्रम के जैसे ही एक काले अध्याय के रूप में याद किया जायेगा ।
उक्त जांच रिपोर्ट में महासभा को मेरे खिलाफ कुछ नही मिला तो पूर्व पदाधिकारियों ने महासभा के स्तर पर पुनः मुझे हैरान परेशान, बदनाम तथा प्रताडित करने की गरज से फिर एक नवीन जांच कमेटी बैठा दी और अब उनके पद चिन्हों पर चलकर पूर्व महामंत्री महेश जी जिनको समाज द्वारा बर्खास्त कर उनके स्थान पर मुझे महामंत्री बना दिये जाने के कारण पतापूर्वक स्वयं ने अवैधानिक मीटिंग कर एक कमेटी अलग से बना ली और स्वयं ने मनगढन्त आरोप लगाकर षडयन्त्र के तहत जांच शुरू कर दी। मजेदार बात तो यह है कि इस गहन जांच में भी इनको कुछ नही मिला तो अपनी द्वेषपूर्ण भावना के चलते बिना दस्तावेजी रिकार्ड अवलोकन किये एक नया अध्याय शुरू कर दिया कि उक्त जमीन बावत ‘चलो जेडीए पटटे प्राप्ति हेतु पारस जैन को हैरान परेशान कर प्रताडित करने हेतु उनके विरूद्ध कोर्ट केस ही कर लेते हैं इस पर होने वाला खर्चा भी समाज से चन्दे के रूप में प्राप्त कर लेंगे जैसा कि इनकी घरेलू पत्रिका में लिखा है ।

यह सर्व विदित है कि तथ्य और लिखावट कभी नही मिटेंगे। जो सत्य है वो सत्य ही रहेगा। मैं हमेशा न्यायिक प्रक्रिया से गुजरने के लिये तैयार व तत्पर रहा हूँ। मेरा सभी समाज बन्धुओं से विनम्र निवेदन है कि ‘जब निष्पक्ष जांच, समाज से बाहर के व्यक्तियों से करानी थी तो पुनः समाज के बन्धुओं से कराने का क्या औचित्य था ? जब जांच रिपोर्ट में कुछ नहीं मिल रहा तो बार-बार जांच कमेटी बनाकर समाज का समय व धन कब तक बर्बाद किया जायेगा ? इसका जिम्मेवार कौन होगा? समाज को प्राप्त निःशुल्क जमीन पर इतना विवाद क्यों ? और विवाद भी उनके द्वारा जिनका जीरो सहयोग था । इस जमीन के पीछे इनकी मंशा क्या है? यह सभी समाजजन को सोचना होगा ?
इस जांच रिपोर्ट की आड़ में श्रीमान् महेश जी द्वारा किये गये झोटवाडा समिति के मंदिर घोटाला को दबाने के उददेश्य से अपनी घरेलू पत्रिका और वाट्सअप के माध्यम से मेरे ऊपर आरोप लगाकर समाज में झूठ और वैमनस्यता फैला रहे हैं जबकि वास्तविकता यह है कि इनको इस मंदिर घोटाले की जांच का सामना करना पडेगा जिसे ये येनकेन प्रकारेण दबाना चाह रहे हैं। मेरा झोटवाडा मंदिर समिति के पदाधिकारियों से भी आग्रह है साथ ही उनका कर्तव्य भी बनता है कि वह अपने स्तर पर इस घोटाले की निष्पक्ष जांच अवश्य करायें। क्योंकि यह एक गंभीर मुददा है और समाज के माननीय सदस्यगणों की भावनायें इससे जुडी हुई है। इस मन्दिर में पल्लीवाल समाज का भी पैसा लगा है। श्रीमान् महेश जी अब आपका झूठ नहीं चलेगा। आपके झूठ का पर्दाफाश करने के लिये आपकी घरेलू पत्रिका के विकल्प के रूप में पल्लीवाल डिजिटल पत्रिका समाज के सम्मुख आ चुकी है जिसकी पहुंच समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक है। इसकी निप्पक्षता व विश्वसनीयता तथा अच्छे कन्टेंट के कारण यह बहुत ही कम समय में लोकप्रिय हो गई है। इस डिजीटल पत्रिका को समाज द्वारा मान्यता प्रदान कर इसको काफी सराहा जा रहा है ।
श्रीमान महेश जी द्वारा जिस प्रकार से समाज में भ्रम फैलाया जा रहा है उसको देखते हुए समाज के सामने जांच रिपोर्ट 21.12.2021 की वास्तविकता भी डिजीटल पत्रिका के माध्यम से लाना आवश्यक है। इस जांच रिपोर्ट में श्रीमान महेश जी को घोटाला कहां नजर आया ? श्रीमान् महेश जी की झूठ की पराकाष्ठा तो देखों जिनको स्वयं को झूठ बोलने और घोटाले में महारत हासिल है वो दूसरों पर आरोप लगा रहे है। इसलिए इस जांच रिपोर्ट की सच्चाई और वास्तविकता समाज को जानना जरूरी है। मेरे द्वारा तत्कालीन महासभा कार्यकारिणी को इस वास्तविकता को पत्रिका में प्रकाशित करने हेतु अनेकों बार अनुरोध किये जाने के बावजूद भी पत्रिका में प्रकाशित करने से स्पष्ट रूप से मना कर दिया था। इसके बाद जयपुर शाखा की तत्कालीन कार्यकारिणी के अध्यक्ष श्री राजेन्द्र कुमार जैन, कैमरी, वर्तमान कार्यकारिणी अध्यक्ष श्री राजेन्द्र प्रसाद जैन द्वारा भी महासभा को अनेकों बार इसकी वास्तविकता छापने हेतु अनुरोध किया गया लेकिन महासभा व पल्लीवाल पत्रिका सम्पादक मण्डल द्वारा वास्तविकता को कभी प्रकाशित ही नहीं किया गया। सभी सदस्यगणो से अनुरोध है इस प्रकरण से संबंधित समस्त सत्य एवं वास्तविक साक्ष्य एवं तथ्य जयपुर शाखा कार्यालय में उपलब्ध हैं कृपया अवलोकन करने की कृपा करें। धन्यवाद ।

संलग्न :- दिनांक 21.12.2021 जांच की जांच रिपोर्ट की प्रति एवं तथ्यात्मक विवरण

पारसचन्द जैन
( खेरली) जयपुर
महामंत्री,
अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा

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