अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा आज विषम परिस्थितियों से गुजर रही है। यह संगठन बिखराव की ओर बढ़ता हुआ नज़र आ रहा है। महासभा के प्रति लगाव रखने वाले समाज हितैषियों ने संगठन के इस बिखराव पर ध्यान नहीं दिया तो निश्चित रूप से आज से 56 वर्ष पूर्व हमारे पूर्वजों द्वारा स्थापित यह सुदृढ़ संगठन टूट कर बिखर जायेगा ।
इस संगठन को मजबूत बनाने एक माला में पिराये मणियों की तरह रखने के लिए महासभा से जुडाव रखने वाले समाज सेवियों को आगे आना ही होगा, विशेषकर महासभा के पूर्व पदाधिकारियों को। हम सबका विशेष दायित्व है कि इन दोनों पक्षों को एक साथ बैठाकर इनमें सामंजस्य स्थापित कर एकता कायम करावें । कौन गलत था कौन सही इसको छोड़ते हुए भविष्य की ओर देखना है और समाज हित में आगे बढ़ना है।
दोनों पक्षों को विश्वास में लेते हुए यह स्पष्ट रूप से समझाना होगा कि समाज एवं महासभा की एकता के लिए संयुक्त रूप से एक ही समय पर एक ही स्थान पर महासभा के चुनाव कराना अनिवार्य है। यदि ऐसा नहीं करते हैं और दोनों पक्ष अलग-अलग चुनाव कराने की हठधर्मिता रखते हैं और अलग-अलग चुनाव कराते हैं, तो इसके परिणाम घ होंगे । यह संगठन टूट जायेगा, नये-नये विवाद उत्पन्न होंगे, दो अलग-अलग कार्यकारिणीयों का गठन हो जायेगा और भविष्य में दोनों का पुनः एक होना बहुत ही कठिन कार्य हो जायेगा ।
मेरी दोनों पक्षों के कुछ प्रबुद्धजनों से इस सन्दर्भ में वार्ता हुई तो यह तथ्य निकलकर आया कि एक पक्ष अभी शीघ्र चुनाव कराने के पक्ष में नहीं लगता है और एक पक्ष शीघ्र ही चुनाव करा कर समाज के नये चुने हुए व्यक्तियों को कार्यभार सौंपना चाहता है । इस तरह की दो विचारधाराऐं एक साथ चुनाव कराने में बाधा है। हम समाज जनों को इन दोनों पक्षों को इस बिन्दु पर एक मत करने के गम्भीर प्रयास करने होंगे कि दोनों पक्षों को सामंजस्य कायम कर चुनाव की संयुक्त रूप से रूप रेखा तैयार कर आगामी 2026 की जुलाई-अगस्त तक चुनाव कराकर निर्वाचित कार्यकारिणी को कार्यभार सौंप दें, जिससे हमारा यह संगठन मजबूत बना रहे ।
वैसे भी महासभा की वर्तमान कार्यकारिणी का कार्यकाल ( 3 वर्ष का ) जनवरी 2026 में पूरा हो चुका है। दोनों पक्षों ने अपने-अपने तरीके से जो कुछ करना था इस कार्यकाल में कर लिया, अब नये चुने हुए व्यक्तियों को कार्य करने का मौका देने का समय आ गया, समय पर एक साथ चुनाव कराके महासभा की एकता में सहभागी बनें।
सबसे बड़ा सवाल पैदा यह होता है कि चुनाव कराये कौन ? सबसे अच्छी बात तो यह होगी यदि उपरोक्त प्रयासों से दोनों पक्षों में सामंजस्य हो जाता है तो दोनों ही पक्ष मिलकर चुनाव कार्यक्रम तय करके अपनी देख-रेख में चुनाव कराये ।
दूसरा विकल्प यह जिसका मैंने पूर्व के लेख में भी उल्लेख किया था, दोनों पक्ष एक 11 सदस्यीय चुनाव समिति का गठन करे, जिसमें दोनों पक्ष समान संख्या में अपने – अपने प्रतिनिधियों का मनोनयन करें। यह चुनाव समिति अपनी देखरेख में निष्पक्ष रूप से चुनाव सम्पन्न करायें तथा चुनाव तिथि, स्थान एवं चुनाव अधिकारियों का निर्धारण करें।
चुनाव से पूर्व यह अवश्य कार्य करने होंगे:-
1. दोनों पक्षों द्वारा महासभा के जिन-जिन आजीवन सदस्यों की सदस्यता समाप्त की गई है, उन सभी निर्णयों को वापस लेते हुए उनकी सदस्यता पूर्ववत बहाल की जाये।
2. महासभा से सम्बन्धित, न्यायालयों, थाने व अन्य मंचों पर चल रहे सभी वाद-विवाद एवं मुकदमे, आपसी सहमति से वापिस लेकर समाप्त किए जायें ।
मैं पूर्णतया आशान्वित हूँ कि दोनों पक्ष इन विचारों से सहमत होकर सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए महासभा की एकता हेतु संयुक्त रूप से चुनाव कार्यक्रम को क्रियान्वित कर संगठन को सुदृढ़ बनाने में सहभागी बनेंगे ।
श्रीचन्द जैन
पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री
अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा