20 दिनो तक जिनालयों में भगवान की पालकी एवं शोभा यात्रा का आयोजन मुनिश्री के सानिध्य में किया गया,इसी के अंतर्गत 18 मार्च को अनंतनाथ एवं अरहनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक दिवस पर वैभव नगर स्थित पदम प्रभु जिनालय से मुनि पूज्य सागर जी महाराज के सानिध्य में सुबह 7:00 बजे पालकी यात्रा निकाले जाने के पश्चात उदय नगर जिनालय में आर्यिका मां विज्ञान मति माताजी ससंघ के सान्निघ्य में सिद्धचक्र महामंडल विधान में पहुंचकर मुनि श्री ने कहा सिद्धो की आराधना से पापों का नाश होता है अतः अभी से ही बच्चों को भी विधान में आगे लाना चाहिए एवं युवाओं को धर्म, संस्कार तथा स्वाध्याय से जोड़ना चाहिए।
पंचबालयति जिनालय में आध्यात्मिक संस्कार जीवन जीने की कला और नैतिक मूल्यों की शिक्षा देने के उद्देश्य से जैनत्व बाल संस्कार शिक्षण 8 दिवस का शिविर लगाया गया,इसके माध्यम से बच्चों एवं युवाओं को धर्म, संस्कृति, अनुशासन- कर्तव्य निष्ठा की शिक्षा दी गई।
23 मार्च को मुनिश्री आदित्य सागर जी महाराज द्वारा श्री 1008श्री महावीर स्वामी मंदिर,लीड़स एन्क्लेव में एक श्रावक श्राविकाओं को पांच बातों ( सत्य बोलना, किसी पर दोषारोपण नहीं करना, समय के अनुसार परिवर्तनों को स्वीकार करना, स्वयं की समीक्षा करना एवं कार्यों का अभ्यास) को अपने प्रवचनों के माध्यम से समझाया गया, इसके पश्चात 24 मार्च को पालकी यात्रा के साथ यहां से इन्हीं मुनिश्री द्वारा नवनिर्मित मुनिसुब्रतनाथ जिनालय में अपने प्रवचनों के माध्यम से गुरू शिष्य सम्बन्ध एवं इनके प्रति आस्था, विश्वास व श्रद्धा तथा सभी के प्रति समता के व्यवहार के विषय में बताया। मुनिश्री द्वारा प्रवचनों के माध्यम से बतलाया गया कि जहां पर भी नया जिनालय का निर्माण होता है वहां पर जैन बंधु तो अपना घर लेना पसंद करते हैं किंतु उस मंदिर के पास कोई भी संत निवास की स्थापना नहीं करते,जिससे संतो को अलग-अलग किराये के मकानों में रूकवाया जाता है जो सही नहीं है,इसलिए मंदिर के साथ साथ संत सदन का भी निर्माण किया जाना चाहिए ।इसी क्रम में हमारे द्वारा भी नवनिर्मित जिनालय मय संत सदन में एक कमरे का निर्माण तथा नवनिर्मित जिनालय में प्रतिस्थापित चौबिसी के अंतर्गत एक प्रतिमा की स्थापना किए जाने का सौभाग्य प्राप्त किया गया।
इन 20 दिनों तक चलने वाले कार्यक्रम के तहत 27 मार्च से 29 मार्च तक मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज के मार्गदर्शन में एयरपोर्ट रोड स्थित नृसिंह वाटिका में मंत्राक्ष” ध्यान शिविर” का आयोजन किया गया, इसके अलावा सामूहिक आत्म साधना एवं मंगलाचरण कराई गई।
श्री सुब्रतनाथ दिगंबर जैन मंदिर, तुलसी नगर में एम वाय अस्पताल के सहयोग से भगवान “आदिनाथ जयंती से महावीर जयंती” तक चलने वाले इस कार्यक्रम के तहत रविवार 22 मार्च को वृहद रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया।
30 मार्च को भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक महोत्सव के तहत दिगंबर जैन समाज ने कांच मंदिर से स्वर्ण रथ यात्रा निकाली,जिसमें चांदी के सिंहासन पर सवार होकर भगवान की शोभायात्रा सांय 2:30 बजे से प्रारंभ होकर अनेक स्थानों (मल्हारगंज,गोराकुंड , राजबाड़ा, जवाहर मार्ग आदि) से होकर निकली।विभिन्न मंदिरों एवं संस्थाओं की झांकियां पर अहिंसा, विश्व शांति , जियो और जीने दो ,अहिंसा परमो धर्म,अपरिग्रह,त्रिशला नन्दन वीर की जय बोलो महावीर स्वामी की आदि नारे लिखे हुए थे तथा इन जयघोषों के साथ साथ स्वर्ण रथ को नंगे पैर चल रहे युवाओं द्वारा खींचा गया । इस समय पूरा माहौल काफी धार्मिक एवं सौंदर्य लग रहा था । यह शोभायात्रा कांच मंदिर से कांच मंदिर तक करीब 3 किलोमीटर की 3 घंटे तक चली और 5:30 बजे पुनः कांच मंदिर में पहुंची ।इस शोभायात्रा में 7 मुनि ससंघ शामिल हुए( मुनिश्री आदित्य सागर महाराज, मुनिश्री निर्मल सागर जी महाराज ,मुनिश्री विशुद्ध सागर जी महाराज, मुनिश्री पूज्य सागर जी महाराज)। मंदिर में पहुंचने के बाद श्री जी के कलश हुए तथा उसके पश्चात प्रथम , द्वितीय एवं तृतीय स्थान पर आई गई झांकियों को पुरस्कृत किया गया।
31 मार्च को अखिल भारतीय श्वेताम्बर जैन समाज द्वारा सुबह 8:30 बजे राजबाडा़ से चांदी के रथ में सवार हो भगवान की मंगल शोभायात्रा निकाली गई ,इसमें भी 108 युवा इंद्र के वेष में रथ खींचते रहे तथा 64 दिव्य कुमारिया विभिन्न वेषभूषा में राजवाड़ा से खजूरीबाजार ,गोरवकुंड, महारगंज ,बड़ा गणपति ,महावीर बाग होते हुए 11:00 बजे दयालबाग पहुंचा ।महिलाऐं तथा बच्चे -बच्चियां तख्तियां लेकर चल रही थी जिन पर शांति ,अहिंसा एवं जिओ तथा जीने दो , अपरिग्रह आदि नारो के रूप में स्लोगन से संदेश देती चल रही थी, रास्ते भर त्रिशला नन्दन वीर की जय बोलो महावीर की जय घोष लग रहे थे।
कुछ क्षेत्रों ( राजेंद्र नगर आदि) के समाज बंधुओं द्वारा दिगंबर एवं श्वेताम्बर का भेद समाप्त करने के दृष्टिकोण को अपनाते हुए एक ही दिन 30 मार्च को जुलूस निकाला गया।
अशोक कुमार जैन विश्वेसरैया नगर, जयपुर (वर्तमान प्रवास इंदौर)