श्री पल्लीवाल जैन डिजिटल पत्रिका

अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा

(पल्लीवाल, जैसवाल, सैलवाल सम्बंधित जैन समाज)

स्वरचित हाइकु छंद

👉1️⃣
खुद पे काबू
बड़ी जीत है, ना हो
कमियां हावी।

👉2️⃣
दब कर ना,
मिल कर सब से
रहो सदैव।

👉3️⃣
सब के पास
आंखें समान, पर
नज़र नहीं।

👉4️⃣
भाई से भाई
मिल रहें सुखी, ना
मिलें तो दुःखी।

👉5️⃣
वक्त ना खर्चो,
सिर्फ कमाने में यूँ,
कि जीना भूलें।

👉6️⃣
अच्छा स्वभाव,
सुंदर गहना है,
दान ही धन।

👉7️⃣
धन की दौड़,
रहे भागते हम,
खोई मुस्कान।

👉8️⃣
लालच जैसा
रोग नहीं, सुकून
सा सुख नहीं ।

👉9️⃣
शुरू हो गुस्सा
मूर्खता से , समाप्ति
पे अफसोस।

👉1️⃣0️⃣
भ्रम में सब
ये वो मेरा, सच! ना
कुछ किसी का।

👉1️⃣1️⃣
भाषाएं सभी
अपनी ; ईश्वर की
तो सिर्फ प्रेम।

👉1️⃣2️⃣
बदन मिट्टी
सांसें उधार ; मैं तो
किरायेदार।

👉1️⃣3️⃣
रिश्ता जानने
से अच्छा, अपनापा
जानो कितना।

👉1️⃣4️⃣
लोभी मनवा
धन को ही जीवन
आधार माने।

👉1️⃣5️⃣
मुसीबतें हैं
रूई सी , लगें भारी
उठा लो हल्की।

हाइकु रचयिता :-
राजेन्द्र प्रसाद जैन
76 मुक्तानंद नगर जयपुर

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