श्री पल्लीवाल जैन डिजिटल पत्रिका

अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा

(पल्लीवाल, जैसवाल, सैलवाल सम्बंधित जैन समाज)

चेहरे पर झूर्रियों के मोती, माथे पर सफेद बालों का ताज तथा अनुभवों का उजियारा

वृद्धावस्था अन्तिम एवं उत्कृष्ट जीवन है। इसकी झूर्रियों में एक पूरा जीवन का अनुभव झलकता है। इसके हाथों की रेखाओं में परिवार के लिए किये गये अनगिनित बलिदानों के हस्ताक्षर हैं। मोह से दूर, आसक्ति न रखना, स्वाद कम करना, शिकायतें नहीं करना, इच्छाएँ कम होना, तेरा – मेरा नहीं करना ये ही झूरियों के टपकते हुये बिन्दु हैं। अपने सत्कर्मों का दीप जलाये रखना तथा स्नेह, क्षमा, शुभाशीष देकर मन का आकाश जगमगाये रखना ये सफेद बालों के ताज की शोभा है। तूफान में जीवन की कश्ती नहीं डगमगाएँ यह उसके जीवन का श्रृंगार है ।

कुदरत के प्रसाद के सौभाग्य से वृद्धावस्था जीवन मिलता है। इस कंचन उम्र पाने के लिए हर किसी का सौभाग्य नहीं जागता। जीवन के हर क्षण को सत्य-संयम-साधना से तोलना पड़ता है । जिज्ञासा का दीपक के जगमग होने से, आशाओं का सूरज विवेक की मशाल – वाणी का मिठास, सकारात्मक–विचार एवं नैतिकता के कदमों को तप की भट्टी में तपाना पड़ता है।

बुढ़ापा तय एवं संयम का त्याग है। संस्कार और संस्कृति की किरणों की चमक, सफेद बालों के ताज के उछलने लगती है। सन्तानें चाहे जहाँ रहें संस्कार कभी अनाथ नहीं होते। संस्कार मिट्टी में भी अमर रहते हैं। व्यवहार एवं लगाव कभी बूढ़े नहीं होते। अनुभवों की दिव्यता गुनगुनाती है कि खुशी के पंख तथा चेहरे की मुस्कराहट की कदमों का प्रमाण-पत्र है । यह अनुपम अवस्था, विचारों के दर्पण से बता रही है कि विषैले विचार, अतीत की जंजीरों में जकड़कर वर्तमान की सुन्दरता नष्टकर विफलता के द्वार खोल देंगे।दर्द तथा कड़वी बातें सहन होने लगे तो समझ लेना जीना आ गया। सुबह की गुदगुदा रही धूप कह रही है कि तुमने समय को जीना सीखा है। गरिमा, धैर्य, व्यक्तित्व से जीवन को संवारा है। ये आने वाली पीढ़ी के निर्माण का उचित कदम हैं। यौवन बाहर की और भागता है, बुढ़ापा भीतर की ओर लौटता है। अनुभव गाज रहा है, जो बीत गया वही तुम्हारा शिक्षक है और जो शेष है वही तुम्हारा सत्य।

सुकुन तुम्हारे हाथों में है । प्राकृतिक प्रवेश में शान्त रहकर किसी की मुस्कराहट पर हो निसार, किसी का दर्द मिल सके तो, ले उधार, किसी के वास्ते हो तेरे दिल में प्यार ! लेखन विधि तब ही सार्थक है, जब यह किरदारों के साथ साँस ले। यह पाठकों की गहरी परतों को उजागार कर हृदय के द्वार खोल दे। यदि इसका प्रमाण-पत्र है, विश्वास और आस्था इसके दो नेत्र हैं । लेखन विधि के गहरे सपने आपकी उँगलियों में…

छगन लाल जैन
रि. अध्यापक हरसाना वाले
3/308, शालीमार, अलवर

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