
दशलक्षण महापर्व के तहत दिनांक 20 सितंबर 2026 को शक्ति नगर पल्लीवाल दिगंबर जैन मंदिर में श्री चंद्रप्रभु महिला मंडल के तत्वावधान में बारह भावना पर आधारित लघु नाटिका का आयोजन किया गया।
श्रीमती पुष्पा जैन ने बारह भावनाओं को मधुर लयबद्ध गायन करके एक एक भावना का एक एक बच्चे से शानदार प्रभावकारी प्रतिरूपण कराया।
कुल 12 बच्चों ने अपने मनमोहक अंदाज से जैन धर्म की निम्नलिखित बारह भावनाओं को सरल एवं रोचक ढंग से प्रस्तुत किया:-
1. अनित्य भावना: संसार की सभी चीजें नाशवान हैं, कोई भी चीज़ सदा नहीं रहती।
2. अशरण भावना: इस संसार में मृत्यु या दुखों से बचाने वाला कोई रक्षक नहीं है।
3. संसार भावना: यह जीव अनादि काल से जन्म-मरण के चक्र (संसार) में भटक रहा है।
4. एकत्व भावना: जीव अकेला ही जन्म लेता है और अकेले ही अपने कर्मों का फल भुगतता है।
5. अन्यत्व भावना: शरीर, धन और परिवार मुझसे अलग हैं, आत्मा बिल्कुल भिन्न है।
6. अशुचि भावना: यह शरीर मांस, मलमूत्र और अशुद्ध पदार्थों से मिलकर बना है।
7. आस्रव भावना: मन, वचन और काया के जरिए कर्मों का आत्मा की ओर आना (कर्मबंध)।
8. संवर भावना: योग और संयम से नए कर्मों के आने को रोकना।
9. निर्जरा भावना: तप और साधना के माध्यम से पहले से बंधे हुए कर्मों को धीरे-धीरे झाड़ना या अलग करना।
10. लोक भावना: इस विशाल ब्रह्मांड (लोक) का स्वरूप और उसकी क्षणभंगुरता का विचार करना।
11. बोधि दुर्लभ भावना: इस संसार में सम्यग्दर्शन (सच्चा ज्ञान), संयम और मानव जन्म का मिलना अत्यंत दुर्लभ है।
12. धर्म भावना: भगवान द्वारा बताए गए वीतराग मार्ग, अहिंसा और संयम धर्म का चिंतन करना।
नाटिका के माध्यम से बच्चों ने संसार की नश्वरता, आत्मचिंतन, संयम, त्याग एवं वैराग्य आदि का संदेश दिया। बच्चों की प्रभावशाली प्रस्तुति ने उपस्थित श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में धार्मिक संस्कारों एवं जैन सिद्धांतों के प्रति रुचि और जागरूकता विकसित करना रहा। इस अवसर पर मंदिर में उपस्थित श्रद्धालुओं एवं महिला मंडल के सदस्यों ने बच्चों का उत्साहवर्धन किया।

चन्द्र प्रभु महिला मंडल द्वारा सभी प्रतिभागी बच्चों को पारितोषिक प्रदान किया गया तथा कार्यक्रम में उपस्थित सभी महिलाओं, पुरुषों एवं बच्चों को मंडल अध्यक्ष उर्मिला जैन ने बहुत बहुत धन्यवाद ज्ञापित किया।
रीना जैन
सांस्कृतिक मंत्री
चन्द्रप्रभु महिला मंडल