श्री पल्लीवाल जैन डिजिटल पत्रिका

अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा

(पल्लीवाल, जैसवाल, सैलवाल सम्बंधित जैन समाज)

अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा की एकता

(रचनात्मक और समयोचित लेख)

अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा वर्तमान समय में अत्यंत विकट परिस्थितियों से गुजर रही है। आज यह संगठन विघटन के कगार पर खड़ा है। यदि समय रहते समाजजन महासभा की एकता के संदर्भ में ठोस, दूरदर्शी और सामूहिक निर्णय नहीं लेते हैं, तो 56 वर्ष पूर्व समाज के श्रेष्ठी जनो एवं प्रबुद्ध समाजसेवियों द्वारा निर्मित यह सुदृढ़ संगठन बिखर सकता है।

महासभा की एकता बनी रहे, संगठन सशक्त और जीवंत बना रहे—इस उद्देश्य को लेकर सोचने वाले सभी समाजजनों को आगे आना होगा। उन्हें अपनी भावनाएँ एवं सुझाव संचार के आधुनिक माध्यमों के द्वारा व्यक्त करने होंगे। दोनों पक्षों के मध्य संवाद स्थापित कराना होगा, उन्हें एक साथ बैठाकर सार्थक चर्चा करनी होगी तथा सोशल मीडिया एवं अन्य मंचों के माध्यम से रचनात्मक सुझाव प्रस्तुत करने होंगे।

अब यह देखने या तय करने का समय नहीं है कि कौन सही था और कौन गलत। उस दुर्भाग्यपूर्ण कालखंड को पीछे छोड़कर अब हमें भविष्य की ओर देखना है और समाजहित में आगे बढ़ना है।

अब आगे क्या किया जाए—

दोनों पक्षों को विश्वास में लेकर यह स्पष्ट रूप से समझाना होगा कि समाज एवं महासभा की एकता के लिए सामंजस्य स्थापित करते हुए एक ही समय पर संयुक्त रूप से महासभा के चुनाव कराना अनिवार्य है।
इसके लिए दोनों पक्ष मिलकर आगामी अप्रैल–मई माह तक चुनाव कार्यक्रम निर्धारित करें।
अन्य विकल्प यह हो सकता है कि दोनों पक्ष आपसी सहमति से 11 सदस्यीय अथवा 21 सदस्यीय एक संयुक्त चुनाव समिति का गठन करें, जिसमें दोनों पक्ष समान संख्या में अपने-अपने प्रतिनिधियों का मनोनयन करें। यह चुनाव समिति अपनी देखरेख में निष्पक्ष रूप से चुनाव संपन्न कराए तथा चुनाव की तिथि, स्थान एवं चुनाव अधिकारियों का निर्धारण करे।

दोनों पक्षों को यह गंभीरता से समझना होगा कि यदि सामाजिक एकता के लिए दिए गए इन सुझावों की उपेक्षा की गई और हठधर्मिता पर कायम रहते हुए अलग-अलग समय पर चुनाव कराए गए, तो इसके परिणाम अत्यंत घातक होंगे। इससे नए-नए विवाद उत्पन्न होंगे, संगठन कमजोर होगा और महासभा के टूटने की आशंका प्रबल हो जाएगी। ऐसा होने पर इतिहास क्षमा नहीं करेगा।

वास्तविकता यह है कि दोनों पक्ष अपने-अपने तरीके से लगभग तीन-तीन वर्ष कार्य कर चुके हैं, जिसको जो करना था वह कर लिया। जो होना था, वह हो चुका। अब समय है एक होने का, संगठन को जोड़ने का और समाजहित में आगे बढ़ने का।
एकता के पश्चात, चुनाव से पूर्व यह आवश्यक कार्य करने होंगे—
1. दोनों पक्षों द्वारा जिन-जिन सदस्यों की आजीवन सदस्यता समाप्त की गई है, उन सभी निर्णयों को वापस लेते हुए उनकी सदस्यता पूर्ववत् बहाल की जाए।
2. महासभा से संबंधित, न्यायालयों, थाने व अन्य मंचों पर चल रहे सभी वाद विवाद एवं मुकदमे, आपसी सहमति से वापस लेकर समाप्त किए जाएँ।

मै पूर्ण रूप से आशान्वित हूं कि दोनों पक्ष इन विचारों से सहमत होकर सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए सक्रियता के साथ महासभा की एकता हेतु संयुक्त चुनाव कार्यक्रम को क्रियान्वित करेंगे।

श्रीचन्द जैन
पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री
अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा

This Post Has One Comment

  1. Devendra Jain

    Kya is disha me koi sarthak prayash abhi tak huwe hey,ya koi pahal ker raha hey,nahi ker Raha to shuruwat kaise hogi,jisse koi sambhawna badhe

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