श्री पल्लीवाल जैन डिजिटल पत्रिका

अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा

(पल्लीवाल, जैसवाल, सैलवाल सम्बंधित जैन समाज)

स्वास्थ्य ही सबसे बड़ी पूंजी है

हमने बहुत बार पढ़ा भी है और सुना भी है कि पहला सुख निरोगी काया दूसरा सुख घर में हो माया। लेकिन हम अक्सर दूसरे सुख की तलाश में पहले सुख को भूल जाते हैं और पैसे कमाने में इतने मशगूल हो जाते हैं कि अपने स्वास्थ्य का बिल्कुल भी ध्यान नहीं रख पाते हैं। दिन भर की भाग दौड़ आप धापी में क्या खाना है, कब खाना है कितना खाना है, कैसे खाना है, यह सब भूल जाते हैं। सुबह उठने का समय, रात को सोने का समय, दिन भर की दिनचर्या,योग व्यायाम सब भूल जाते हैं और फिर काम का प्रेशर सबसे आगे निकलने की होड में मानसिक तनाव इतना बढ़ जाता है कि स्वास्थ्य बिगड़ जाता है, शरीर बिल्कुल खराब हो जाता है।

हम अपने स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने के लिए लापरवाही करना छोड़ दें और अपने दिनचर्या को थोड़ी सी सुव्यवस्थित कर ले तो हमारा स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा और जब शरीर अच्छा रहेगा तो जिंदगी भी अच्छे से गुजरेगी। हम अगर समय पर उठे, थोड़ा पैदल चले, हल्कीफुल्की व्यायाम कर ले, हल्का भावना योग या मेडिटेशन कर ले, हल्का भोजन करें, गरिष्ठ भोजन से बचें, भोजन में हरी सब्जी, दाल ,फल फ्रूट का ज्यादा प्रयोग करें फास्ट फूड और तला भुना खाने से बचाव करें तो शरीर भी सही रहेगा और अच्छे से काम भी कर पाएंगे। जब हमारा शरीर ही सही नहीं है तो हम कितना भी पैसा कमा ले उसका कोई महत्व नहीं है।

अब यहां कुछ लोग यह भी कह सकते हैं कि हमारे पास इन सबके लिए वक्त ही नहीं है। मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज कहते हैं कि वक्त की कमी उनके पास नहीं है जो व्यस्त है, वक्त की कमी उनके पास होती है जो अस्त व्यस्त है। व्यस्त रहो लेकिन अस्तव्यस्त मत रहो। सारा खेल प्राथमिकताओं का है कि आप प्राथमिकता किसे देते हैं अपने स्वास्थ्य को या और इधर की उधर की बातों को,अगर आपकी प्राथमिकता में आपका स्वास्थ्य है तो फिर आपको अपने शरीर की देखभाल के लिए समय की कोई दिक्कत नहीं होगी।

महेंद्र कुमार जैन (लारा)
शिवाजी पार्क, अलवर

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