श्री पल्लीवाल जैन डिजिटल पत्रिका

अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा

(पल्लीवाल, जैसवाल, सैलवाल सम्बंधित जैन समाज)

भगवान महावीर जीवदया मैत्री संघ, जयपुर – एक परिचय

जैन धर्म में अहिंसा को सर्वोच्च धर्म माना गया है, और जीव दया इसका एक महत्वपूर्ण अंग है। जीव दया का अर्थ है सभी जीवित प्राणियों के प्रति करुणा, दया और सम्मान का भाव रखना । यह सिद्धांत न केवल मनुष्यों के प्रति, बल्कि सभी जीव-जंतुओं, पेड़-पौधों, और सूक्ष्म जीवों के प्रति भी लागू होता है। जैन धर्म में, जीवों के प्रति दया दिखाना और उन्हें किसी भी प्रकार की हानि से बचाना, आत्मशुद्धि और मोक्ष की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया है।

भगवान महावीर का अहिंसा का संदेश हमें यह प्रेरणा देता है कि हम जीव मात्र के प्रति संवेदनशील बनें। सामान्यतः जीव दया को केवल गायों को गौशाला में रखना, पक्षियों को दाना डालना या पशुओं को वध से बचाना समझा जाता है, जो निस्संदेह श्रेष्ठ कार्य हैं, परंतु जीव दया का व्यापक अर्थ इससे कहीं अधिक है। हम यह सुनिश्चित करें कि किसी भी जीव को किसी भी प्रकार का कष्ट न हो। उनकी रक्षा-सुरक्षा हो, अभय बनें, उसके लिए हमें वैचारिक क्रांति को प्रधानता देनी होगी । शाकाहार प्रचार–प्रसार व व्यसन मुक्ति के स्टीकर, पोस्टर, सी.डी., साहित्य प्रचार-प्रसार के लिए रथनुमा वाहन एवं जीवदया फण्ड एकत्रित करके हम अनेकों ऐसे कार्य कर सकते है । ऐसा करने से एक भी परिवार शाकाहारी बनें तो सैकड़ों जीवों को अभयदान स्वतः ही मिल जाएगा ।

पशु-पक्षी मूक होते हैं, बोल नहीं सकते। वे अपने दुःख दर्द, भूख प्यास, बीमारी और अनेक कष्टों को व्यक्त नहीं कर सकते है। हम भगवान महावीर जीवदया मैत्री संघ से जुड़कर मूक प्राणियों के लिए अधिक से अधिक सेवा कार्य कर सकते हैं। गौशालाओं को संचालित करने हेतु प्रबंधन में सहयोगी बन सकते हैं। गौशालाओं में चारे के लिए सहयोग व पंजीकृत गौशालाओं को अन्नदान दे सकते हैं।
पशुओं के लिए स्वच्छ पानी के हौज बनवाने में सहयोग, जिन गौशालाओं में पशुओं के पीने के लिए पानी का अभाव है, वहां टयूबवैल, नलकूप आदि का प्रबंधन करने में सहयोगी बनें। पशुओं को अभयदान देकर उनको संरक्षण उपलब्ध कराना, पशुओं, पक्षियों के प्रति होने वाले अत्याचार, क्रूरता और अन्याय के विरुद्ध वैचारिक वातावरण बनाना भगवान महावीर जीवदया मैत्री संघ का प्रमुख उद्देश्य है ।

पक्षियों के लिए पक्षीघर का निर्माण करना भी भगवान महावीर जीवदया मैत्री संघ का महत्वपूर्ण कार्य है, अब तक पांच पक्षीघरों का निर्माण कराया जा चुका है तथा दो पक्षीघरों का निर्माण शीघ प्रारम्भ किया जाएगा।

नई गौशाला खोलने और वर्षों पुरानी गौशालाओं को संचालन में सहयोग कर सकते हैं। आवश्यकता, कबूतर खानों को दवाई व दाने हेतु सहयोग करना, चबूतरे बनवाना, पशु-पक्षी चिकित्सालय खुलवाना, बीमार पक्षियों, घायल पशुओं के लिए ईलाज के लिए मदद करना, पशु रक्षा करना एवं जीवदया के संकल्प पत्र भरवाने जैसे कार्य कर सकते हैं ।

संघ की गतिविधियाँ एवं सेवा कार्य
भगवान महावीर जीव दया मैत्री संघ, जयपुर इसी भावना को साकार करने हेतु निरंतर सक्रिय है । संघ द्वारा अनेक सेवा कार्य संचालित किए जा रहे हैं:-
> संचालित गौशालाओं के संचालन एवं प्रबंधन में सहयोग
> पशुओं के लिए चारा, पानी एवं चिकित्सा व्यवस्था
> पक्षियों हेतु दाना-पानी उपलब्ध कराना
> घायल पशु-पक्षियों के उपचार की व्यवस्था
>पक्षीघरों एवं चबूतरों का निर्माण एवं कुत्तों बिल्ली से सुरक्षा हेतु उसके चारों ओर जाली लगाना
> जीव दया के प्रति जन-जागरण अभियान

संरक्षक सदस्य – संघ की शक्ति
संघ की प्रगति में संरक्षक सदस्यों का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान रहा है । अत्यंत हर्ष का विषय है कि वर्तमान में संघ में 54 से अधिक संरक्षक सदस्य सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं, जो तन-मन-धन से सेवा कार्यों में सहयोग प्रदान कर रहे हैं।
संरक्षक सदस्य बनने हेतु ₹1,01,000 का सहयोग निर्धारित है, जिसके माध्यम से संघ अपने सेवा प्रकल्पों को और अधिक व्यापक बना रहा है।

नवीन पहल

1. विधवा कल्याण प्रकल्प
संघ अब अपनी सेवा गतिविधियों को और विस्तारित करते हुए मानव सेवा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रहा है। इसी क्रम में शीघ्र ही “विधवा कल्याण प्रकल्प” प्रारंभ किया जाएगा। समाज में अनेक विधवा माताएँ एवं बहनें आर्थिक एवं सामाजिक कठिनाइयों से जूझ रही हैं। उनके जीवन में सम्मान, आत्मनिर्भरता एवं सुरक्षा प्रदान करना हमारा कर्तव्य है । इस प्रकल्प के अंतर्गत
> जरूरतमंद विधवा महिलाओं को आर्थिक सहायता
> उनके बच्चों की शिक्षा में सहयोग
> सामाजिक सम्मान एवं आत्मविश्वास का विकास

यह पहल केवल सहायता नहीं, बल्कि सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर प्रदान करने का प्रयास है

2. वृद्ध आश्रम की शीघ्र शुरूआत
वृद्ध आश्रम की जमीन के लिए शीघ्र ही सरकार को आवेदन किया जाएगा तथा जमीन की तलाश भी की जा रही है, जैसे ही जमीन उपलब्ध होगी वृद्ध आश्रम कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा।

जैन धर्म में जीव दया का महत्व’

1.अहिंसा और जीव दया
अहिंसा जैन धर्म का सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत है । जीव दया का पालन अहिंसा के व्यापक अर्थ को समझने और लागू करने में मदद करता है । यह सिद्धांत इस विचार पर आधारित है कि सभी जीवों में आत्मा होती है और हर आत्मा का सम्मान किया जाना चाहिए। किसी भी जीव को हानि पहुँचाना या उसकी हत्या करना जैन धर्म के विरुद्ध है । इसलिए, जीव दया का पालन आवश्यक है ताकि अहिंसा का सिद्धांत सही मायनों में अपनाया जा सके।

2. मोक्ष की प्राप्ति में सहायक
जैन धर्म के अनुसार, जीवों के प्रति दया और करुणा दिखाने से आत्मा की शुद्धि होती है, जो अंततः मोक्ष की प्राप्ति में सहायक होती है। जब व्यक्ति दूसरों के प्रति दया दिखाता है, तो वह अपने अंदर की क्रोध, घृणा, और अहंकार जैसी नकारात्मक भावनाओं को कम करता है। इससे आत्मा को शुद्धि और शांति प्राप्त होती है, जो मोक्ष के मार्ग को प्रशस्त करती है ।

3. पर्यावरण संरक्षण
जीव दया का सिद्धांत न केवल जीव-जंतुओं तक सीमित है, बल्कि यह पर्यावरण और प्रकृति के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जैन धर्म में पेड़-पौधों और प्रकृति के अन्य तत्वों के प्रति भी दया और सम्मान का भाव रखने की शिक्षा दी जाती है । यह पर्यावरण को संरक्षित रखने और धरती पर जीवन को संतुलित बनाए रखने में मदद करता है।

4. शाकाहार और जीव दया
जैन धर्म में शाकाहार का पालन अनिवार्य है, क्योंकि मांसाहार से जीवों की हत्या होती है, जो अहिंसा के सिद्धांत के खिलाफ है। शाकाहार के माध्यम से जैन अनुयायी जीवों के प्रति दया और करुणा दिखाते हैं। इसके अलावा, कुछ जैन अनुयायी लहसुन, प्याज और अन्य जड़ों का सेवन भी नहीं करते, क्योंकि इन्हें उखाड़ने से छोटे जीवों को हानि पहुँच सकती है।

5. नैतिकता और करुणा का विकास
जीव दया का पालन व्यक्ति के अंदर नैतिकता, करुणा और दया का विकास करता है। यह सिद्धांत सिखाता है कि जीवन में केवल अपने हित के बारे में न सोचकर दूसरों के प्रति भी संवेदनशील होना चाहिए। यह सामाजिक सामंजस्य और शांति की स्थापना में भी सहायक होता है।

6. जीवन का संतुलन
जीव दया का पालन जीवन में संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। जैन धर्म में यह माना जाता है कि सभी जीव एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और एक जीव की पीड़ा दूसरे पर भी असर डालती है। इसलिए, सभी जीवों के प्रति दया और करुणा दिखाना जीवन को संतुलित और सामंजस्यपूर्ण बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
धर्म में वर्णित गुप्तदान एवं जीवदया के महत्व को समझें, स्वीकार करें। शास्त्रों में वर्णित भावना के अनुसार अहिंसा धर्म का आधार ही करुणा, कृपा भाव और अनुकम्पायुक्त मंगल मांगल्य है। भगवान महावीर जीवदया मैत्री संघ में पुरुषार्थ एवं परिश्रम से कमाया धन उदारमना होकर दान दें और अपना लोक लोकांतर सफल बनाएं, अपना सहयोग भरा हाथ बढ़ाएं।

आपका सहयोग अपेक्षित
संघ सभी सज्जनों से निवेदन करता है कि वे इन सेवा कार्यों में सहभागी बनें

भगवान महावीर जीवदया मैत्री संघ का सहयोग करने के लिए संरक्षक सदस्य बनकर रुपये 1,01,000 का सहयोग कर सकते हैं।
> प्रतिमाह भेजे जाने वाले पक्षीदाने में भी सहयोग करने के लिए निवेदन है ।
> पक्षीघर के निर्माण अधिक से अधिक सहयोग देकर पक्षियों के प्रति दया भावना का परिचय देवें ।
> नवीन प्रकल्पों (विशेषकर विधवा कल्याण) में योगदान देकर
> किसी भी सेवा योजना में दान एवं सहयोग देकर

आइए, हम सभी भगवान महावीर के “जीवो और जीने दो के सिद्धांत को अपने जीवन में अपनाकर एक ऐसे समाज का निर्माण करें, जहाँ करुणा, मैत्री और सेवा ही जीवन का आधार बने । आपका सहयोग किसी के जीवन में आशा की किरण बन सकता है।

एम.पी. जैन, मंत्री
भगवान महावीर जीवदया मैत्री संघ सेवा निवृत, निदेशक, सांख्यिकी
64, सूर्यनगर, तारों की कूंट, टोंक रोड, जयपुर
94140 57269

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