इसका सबसे अच्छा उपाय है कि
आप हर परिस्थिति में
अनुकूल रहने का प्रयास करें !
जब भी क्रोध आये
द्रष्टा बन कर देखें कि क्रोध आपको कैसे
प्रभावित कर रहा है !
आप एक दम सतर्क हो जायें
जो भी बोलें बहुत सोच समझ कर बोलें,
कोई महत्वपूर्ण निर्णय न लें और
किसी भी प्रकार का कोई वायदा न करें !
जैसे ही उचित समय मिले
हाथ जोड़ कर क्षमा मांगते हुए
वह स्थान छोड़ दें !