श्री पल्लीवाल जैन डिजिटल पत्रिका

अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा

(पल्लीवाल, जैसवाल, सैलवाल सम्बंधित जैन समाज)

भक्ति का आधार एवं मुक्ति का मंत्र है ‘गुरु’

भारतीय संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन, समृद्ध और प्रेरणादायी संस्कृतियों में से एक है। इस संस्कृति ने मानवता को ज्ञान, अध्यात्म और जीवन मूल्यों का मार्ग दिखाया है। भारतीय दर्शन स्पष्ट करता है कि जीवन की वास्तविक शुरूआत गुरु से होती है। गुरु ही वह दिव्य व्यक्तित्व है, जो ज्ञान, ध्यान, चिंतन, सद्विचार, संस्कार, भक्ति और मुक्ति के मार्ग का परिचय कराता है। वह शिष्य को सत्य का बोध कराता है, जीवन को परखने की दृष्टि देता है और आत्मसाक्षात्कार की प्रेरणा प्रदान करता है। गुरु अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाता है। वह शिष्य की आत्मा को आलोकित कर उसे जीवन का सही उद्देश्य समझाता है। इसलिए कहा गया है कि गुरु शक्ति का स्रोत, भक्ति का आधार और मुक्ति का मंत्र है। सद्गुरु ईश्वर का दिया हुआ सर्वोत्तम वरदान माना गया है।

गुरु कैसा हो ?

ज्योतिष शास्त्र में भी गुरु ग्रह को विशेष महत्व दिया गया है। यदि जन्मकुंडली में गुरु शुभ एवं प्रभावशाली हो तो व्यक्ति का जीवन उन्नति की ओर अग्रसर होता है। उसी प्रकार जीवन में श्रेष्ठ गुरु का मिलना भी सौभाग्य का प्रतीक है। श्रेष्ठ गुरु ही योग्य, विनम्र और संस्कारित शिष्य का निर्माण करता है। स्कंदपुराण में गुरु को महिमा का दाता, चेतना का सारथी, संस्कारों का संवाहक, प्रेम का प्रतिनिधि और नीति का मार्गदर्शक बताया गया है।

गुरु सफलता का पथप्रदर्शक

चाणक्य नीति में आचार्य कौटिल्य ने कहा है कि गुरु शिष्य को सफलता का अमृत पिलाता है। वही उसे कीर्ति, सम्मान और उत्कृष्टता की ओर ले जाता है। गुरु शिष्य को आत्मविश्वास, विवेक और पूर्णता का बोध कराता है। सच्चा गुरु वही है जो स्वयं वीतराग, संयमी और आदर्श जीवन जीते हुए दूसरों को भी सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा दे।

गुरु जीवन का निर्माता

इतिहास इस बात का साक्षी है कि महान गुरुओं ने सामान्य व्यक्तियों को असाधारण बना दिया। भगवान महावीर ने इंद्रभूति गौतम को परम ज्ञानी बनाया और अर्जुनमाली जैसे हिंसक व्यक्ति का जीवन परिवर्तित किया। महर्षि नारद के मार्गदर्शन से रत्नाकर डाकू महर्षि वाल्मीकि बने और रामायण जैसे महान ग्रंथ की रचना की। आचार्य यशोभद्र सूरी ने कुख्यात डाकू नरवीर को धर्ममार्ग पर अग्रसर किया। आचार्य चाणक्य ने चंद्रगुप्त मौर्य का निर्माण किया, गुरु रामदास ने छत्रपति शिवाजी के व्यक्तित्व को दिशा दी और द्रोणाचार्य की प्रेरणा से एकलव्य ने अद्भुत धनुर्विद्या अर्जित की। इन सभी उदाहरणों से स्पष्ट है कि गुरु केवल शिक्षा नहीं देता, बल्कि व्यक्तित्व का निर्माण करता है।

गुरु चेतना का जागरण करते हैं

गुरु शिष्य को सावधान करते हुए बताते हैं कि जीवन की नैया को क्रोध, मान, माया, लोभ, राग-द्वेष, व्यसन, कुसंगति और दुराचार जैसी चट्टानों से बचाना आवश्यक है। वे उपनिषद् का संदेश देते हैं- “उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोवत।” अर्थात उठो, जागो और लक्ष्य की प्राप्ति तक निरंतर आगे बढ़ते रहो। भगवान महावीर ने भी गौतम स्वामी से कहा था “हे गौतम ! पलभर का भी प्रमाद मत करो।” यही संदेश आज भी प्रत्येक व्यक्ति के लिए उतना ही प्रासंगिक है।

गुरु जीवन की विशालता का बोध कराते हैं

गुरु हमें बताते हैं कि जीवन केवल शरीर तक सीमित नहीं है। वे आत्मा, धर्म और अध्यात्म का वास्तविक स्वरूप समझाते हैं। बुद्धि हमें सामान्य ज्ञान तक पहुंचाती है, लेकिन गुरु हमें श्रुतज्ञान, अवधिज्ञान, मनःपर्यय ज्ञान और अंततः केवलज्ञान की दिशा में अग्रसर होने की प्रेरणा देते हैं। गुरु का सान्निध्य वास्तव में परमात्मा के सान्निध्य का माध्यम बनता है। इसे प्राप्त करने के लिए श्रद्धा, समर्पण, विनय, विवेक, पात्रता, पुरुषार्थ और सरलता का होना आवश्यक है।

गुरु हर समस्या का समाधान हैं

गुरु जीवन के संकटों से रक्षा करने वाले वटवृक्ष के समान होते हैं। वे कठिन परिस्थितियों में भी शिष्य को धैर्य, साहस और सही निर्णय का मार्ग दिखाते हैं। चाहे कोई कितना भी धनवान क्यों न हो, यदि उसके जीवन में गुरु नहीं है तो उसका आध्यात्मिक जीवन अधूरा ही रहता है। आज सच्चे गुरु का मिलना दुर्लभ है, उनसे कृपा प्राप्त करना उससे भी कठिन और उन पर अटूट श्रद्धा बनाए रखना सबसे कठिन है। किंतु यही श्रद्धा शिष्य के विकास, प्रगति और आत्मोन्नति का आधार बनती है। गुरु शिष्य को सद्बुद्धि, सद्गुण, सम्यक् समझ और अंततः समाधि का मार्ग प्रदान करते हैं। गुरु वह दिव्य शक्ति हैं, जो मनुष्य को गुलाब की तरह खिलना, दीपक की तरह प्रकाश फैलाना और चंदन की तरह दूसरों के जीवन में शीतलता भरना सिखाते हैं। वे जीवन को सार्थक बनाकर आत्मकल्याण और मोक्ष की दिशा में अग्रसर करते हैं। निस्संदेह, गुरु ही भक्ति का आधार, ज्ञान का प्रकाश और मुक्ति का मंत्र हैं। ऐसे परम पूज्य गुरुओं को शत-शत नमन एवं विनम्र वंदन।

पदमचंद गांधी
बैंक कॉलोनी
गोपालपुरा बायपास
जयपुर

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