श्री पल्लीवाल जैन डिजिटल पत्रिका

अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा

(पल्लीवाल, जैसवाल, सैलवाल सम्बंधित जैन समाज)

स्वरचित हाइकु छंद (क्र. 41 से 50)

हाइकु मूल रूप से जापान की एक अत्यंत लोकप्रिय और सबसे छोटी काव्य (कविता) शैली है। इसकी मुख्य विशेषता है कि यह केवल तीन पंक्तियों की कविता होती है। इसमें कुल 17 वर्ण (syllables) होते हैं, जिनका क्रम 5-7-5 (पहली पंक्ति में 5, दूसरी में 7, और तीसरी में 5) का होता है।

संयुक्ताक्षर, मात्रा, अनुस्वार, चंद्रबिंदु, विसर्ग, हलन्त वाला व्यंजन आदि अलग syllable (अक्षर-खंड) नहीं बनाते हैं।

हायकू में संक्षेप में सार गर्भित बहु अर्थ को प्रकट करने वाले शिक्षाप्रद व प्रेरणास्पद विचार होते हैं।

स्वरचित हाइकु छंद क्र. 41 से 50

🔥4️⃣1️⃣

रास्ता खोजें या
बनाएं नया , पर
रुकें ना कभी ।🌾✨

🔥4️⃣2️⃣

चार दिन रा
जीना, पर हैं काफ़ी
दिन चार भी।🌾✨

🔥4️⃣3️⃣

मन में भाव
मंदिर के, मानो हो
गये दर्शन ।🌾✨

🔥4️⃣4️⃣

मीठे सम्बन्धों
के लिए सम्बोधन
में हो मिठास।🌾✨

🔥4️⃣5️⃣

नहीं वश में
हालात , रखें धैर्य
दें सर्वश्रेष्ठ।🌾✨

🔥4️⃣6️⃣

गुरु बनाएं
क्षमता व ज्ञान को
गुरूर को ना।🌾✨

🔥4️⃣7️⃣

श्रम की बूंदें,
ग़र बहें तो स्वप्न
होवें साकार।🌾✨

🔥4️⃣8️⃣

योग्यता हर
इंसॉं को चमकाये
कामना नहीं।🌾✨

🔥4️⃣9️⃣

शर्त पहली
जीत की , कभी हार
नहीं मानना।🌾✨

🔥5️⃣0️⃣

व्यर्थ हो जाने
से कुछ क्षण , व्यर्थ
नहीं जिन्दगी।🌾✨

🔥हाइकु रचयिता :-
राजेन्द्र प्रसाद जैन
76 मुक्तानंद नगर जयपुर

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