टकरा जाओ, टकरा जाओ।
तुम्हारे सामने जो मुसीबतें हैं,
उनसे टकरा जाओ , टकरा जाओ।
जो तुम्हारा रास्ता रोकती हैं ,
उन मुश्किलों से , टकरा जाओ।
तुम्हारे जोश को देख, दुश्मन डर जाये
तुम्हारे जोश को देख, दुनिया थम जाये
उतार दो उस झूठे लिबास को
मत मानो झूठी जात पात को
क्यों हर वक्त डरे डरे से रहते हो।
वीर होकर क्यों कायरों की तरह जीते हो।
अब तुम्हारा एक ही गीत हो, एक ही मंत्र हो।
पुकार उठो! हम स्वतंत्र हैं, हम स्वतंत्र हैं ।
विजय रूपी दुल्हनें बाहुबल से मिलती हैं।
कमजोर को कोई भी चीज आसानी से नहीं मिलती ।
डूबते को फिर भी तिनके का सहारा मिल सकता है।
जो चलते (तिरते) नहीं, उनको कभी किनारा नहीं मिल सकता।
अपने आप को पहचानो, अपनी ताकत को पहचानो।
हिम्मत मत हारो, चाहे सांस लेना छोड़ दो।
सैनिकों जैसा साहस, जवानों जैसी आग जगाओ
रुको मत, चलते रहो, आगे बढ़ो, आगे बढ़ो।
कि मंजिल स्वयं तुम्हारे कदमों में आ जाये
और रंगों के उत्सव पर तुम्हारी बल्ले बल्ले हो जाये
धरम चन्द जैन
रि. अधिशाषी अभियंता
अलवर