आज सुबह मुनि महाराज के प्रवचन सुने और उनके प्रवचनों में एक बात मुझे बहुत अच्छी लगी और मुझे लगा इस बात पर तो लेख लिखना ही चाहिए और इसलिए यह लेख लिख रहा हूं !
मुनि श्री ने कहा कि अधिकार पाकर इंसान को अधिकारी नहीं बनना चाहिए, उसे अपने पद का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए, हमें जो पद मिलता है उस पद का मतलब होता है दायित्व ! वह पद हमारा अधिकार नहीं है हमारी जिम्मेदारी है ! समाज ने हमें एक जिम्मेदार नागरिक समझकर हमें उसे पद पर पद स्थापित किया है लेकिन हम उस पद पर बैठकर अभिमान में चूर हो जाते हैं ! अपने आप को इतना बड़ा समझते हैं कि अपने आगे किसी और को कुछ समझते ही नहीं है और यही हमारी सबसे बड़ी भूल है ! मुनि श्री कहते हैं हमें जो अधिकार मिला है वह अधिकार हमेशा के लिए नहीं मिला है ! दुनिया में कोई भी चीज शास्वत नहीं होती है ! अगर हम उस अधिकार का दुरुपयोग करते हैं तो जिन्होंने हमें वह अधिकार दिए हैं वह हमसे अधिकार छीन भी सकते हैं ! न जाने कितने राजा महाराजा चक्रवर्ती आए और दुनिया से चले गए फिर हम किस खेत की मूली है ! हम तो मूलीभी मामूली है, फिर अकड़ किस बात की !
मुनि श्री कहते हैं अगर किसी को झुकाना है तो पहले खुद झुक जाओ सामने वाला अपने आप झुक जाएगा ! सामने वाला अगर अकड़ रहा है आप उसके पैर छू लो तो वह व्यक्ति झुक कर आपको उठाएगा और आपको अपने गले से लगा लैगा !विनम्रता ही इंसान की सबसे बड़ी निधि है ! एक विनम्र व्यक्ति करोड़ों दिलों पर राज करता है ! झुकता वही है जिसमें जान होती है अकड़ तो मुर्दे की पहचान होती है !
जब हम में से कोई व्यक्ति पद पर बैठता है तो फिर उस व्यक्ति का बार-बार मान सम्मान किया जाता है ! समाज में कोई भी काम हो पदाधिकारी को बुलाया जाता है और उसका मान सम्मान किया जाता है यानी की पदाधिकारी के मान सम्मान का मौका बार-बार मिलता है और सम्मान पाने के लिए अधिकांश अधिकारी बहुत उत्साहित रहते हैं ! लेकिन काम करने का अवसर कभी-कभी आता है और जब काम करने का अवसर आता है तब पदाधिकारी काम में रुचि न लेकर एक दूसरे पर काम को टालते हैं तो यह उस पद और उस संस्था के लिए अच्छी बात नहीं है ! हम जिस रुचि और उत्साह के साथ माला पहने जाते हैं मान सम्मान में जाते हैं इस रुचि और उत्साह के साथ हमें अपने कर्तव्यों का भी निर्वहन करना चाहिए ! यह पद सिर्फ माला पहनने के लिए नहीं है यह पद एक जिम्मेदारी होती है जैसे हमें अपनी पूर्ण निष्ठा के साथ निभाना चाहिए !
धन्यवाद
महेंद्र कुमार जैन (लारा)
शिवाजी पार्क अलवर