एक रिपोर्ट
2 अक्टूबर को अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा की शाखा जयपुर, परम्परागत रूप से हर वर्ष सामुहिक क्षमापन एवं दीपावली मिलन समारोह का आयोजन करती है, इस वर्ष भी बड़ी धूमधाम से यह आयोजन किया गया। इस आयोजन में महासभा के अध्यक्ष श्री त्रिलोक चंद जी जैन एंव अर्थमंत्री श्री भागचन्द जी जैन विशेष रूप से आमंत्रित थे ।
मैं लगभग चार बजे के आस-पास पल्लीवाल जैन भवन, मानसरोवर पहुंचा था। कार्यक्रम समापन की ओर था। कार्यक्रम के उपरान्त सामूहिक भोजन (गोठ) का आयेजन हमेशा होता है। साढे चार बजे से सामूहिक भोज यानि गोठ का कार्यक्रम शुरु हो गया । समाज के सभी भाई-बन्धुओं से मिलता-जुलता भोजन स्थल पर, मैं पांच बजे पहुंचा खाली स्थान देख कर भोजन करने बैठ गया और सामूहिक भोज का आनन्द लिया ।
भोजन के उपरान्त लोगों से मिलता जुलता रहा साढे छः बजे के आस पास डा० ताराचन्द जी जैन और कुछ अन्य लोगों के साथ भोजन स्थल पर खड़ा बाते कर रहा था, तब ही एक नौजवान वहां आया और मुझे सम्बोधित कर कहने लगा कि अजी साहब आप यहाँ पर खडे हो और वहाँ पर सभी समाज के नेता आपका इन्तजार कर रहे हैं। मैने उससे कहा कि भाई मेरा नेताओं के बीच क्या काम ? वह बोला नहीं – नहीं आपको वहीं बुला रहे है।
जहां भोजन बन रहा था उससे कुछ दूर पहले कुर्सीओं पर समाज के कुछ भाई-बन्धु गोल बना कर बैठे हुए थे। मैने उन सभी को जयजिनेन्द्र किया वह भी सभी गरमजोशी से बोले आओ साहब आओ। सभी बन्धुओं के साथ श्री त्रिलोक चंद जी, श्री भागचन्द्र जी, श्री पारस जी, श्री श्रीचंद जी, श्री रमेश पल्लीवाल जी, श्री राजेन्द्र जी, श्री पवन जी तिजारा, श्री राजेश जी महवा, श्री अनिल जी अदि करीब तीस-पैतीस लोग चर्चा कर रहे थे, मैं भी उनके साथ बैठ गया। चर्चा महासभा की वर्तमान स्थिति के ऊपर थी ।
कुछ देर सुनने के बाद मैने कहां कि यह लोग मुद्दो को सुलझाना ही नहीं चाहते नहीं तो समाज में ऐसे कौन से मुद्दे हैं जो सुलझ नहीं सकते, आपस में हम सभी बहुत गहरे से जुडे है मन साफ करले और मुद्दों को सुलझाने की मानसिकता हो तो ऐसी कौन सी जमीन-जायदाद बंट रही है कि मुद्दा उलझा ही रहे । समस्या तो तुरन्त सुलझ जाए पर यह लोग मैने श्री त्रिलोक चन्द और श्री भाग – चन्द जी की और इशारा करते हुए कहा था यह सुलझाना ही नहीं चाहते। यह तो हमेशा के लिए पल्लीवाल जैन महासभा पर काबिज रहना चाहते है। इस पर श्री त्रिलोक चंद जी और श्री भागचन्द जी तुरन्त बोले, कि आप मुद्दे कों सुलझा दो आप जैसे कहेंगे हम करने के लिए तैयार है। मैने भी तुरुन्त कहा कि सभी अपने-अपने पदों से त्यागपत्र दे दो। इस पर श्री त्रिलोक चंद जी ने कहा कि आप तो मुझसे अभी त्यागपत्र ले लो। श्री भाग चन्द जी और श्री पारस जी ने भी तुरन्त त्यागपत्र देने के लिए कहा।
उन लोगों के इस प्रकार के निर्णय से मै हतप्रभ रह गया, और बैकफुट पर आ गया । मैने कहा कि अभी तुरन्त त्यागपत्र की आवश्यकता नहीं है पर आप लोग एक बात सोचो कि जनवरी 2023 में आप लोगों को समाज ने महासभा का काम करने के लिए जिम्मेदारी दी थी, जनवरी 2026 में आप सभी का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा। अब प्रश्न यह है कि चुनाव करायेगा कौन, यदि आप चुनाव कराते हो तो श्री महेश चन्द जैन का गुट इसे मान्यता नहीं देगा और यदि श्री महेश चन्द जैन गुट चुनाव कराता है तो आप उसमें शामिल नहीं होगे और मान्यता नहीं दोगे। ऐसी स्थिति में महासभा के दो फाड होना लाजमी है। इस लिए ही मैने त्यागपत्र की बात कही है, मेरे हिसाब से आप सभी को अपने अहम त्याग देना चाहिए और ऐसे प्रयासों को समर्थन करना चाहिए जिससे महासभा टूटे नही और उसकी एकरूपता बनी रहे। वह लोग बोले कि साब हम तो महासभा को एक ही रखना चाहते है पर दूसरे लोग भी तो महासभा को एक रखने की बात पर सोचें, इसलिए ही तो आपसे कह रहे है कि हम तो त्याग पत्र देने के लिए तैयार है पर दे किसे और दूसरे भी यही भावना रखते है क्या? यह तो मालूम कर लो। हमे आप पर पूरा भरोसा है हम तो आप को बिना किसी शर्त के त्याग पत्र देने को तैयार है।. मैंने कहा कि भाई मुझे थोडा सा समय दो मै दूसरे पक्ष के लोगों से बात कर लूं। यह सब वार्ता दो अक्टूबर की है।
मुझसे कान में श्री रमेश पल्लीवाल जी ने कहा कि वार्ता करोगे किस से? मैने कहा महेश से बात करुगां उन्होंने मुझसे कहा कि मेरी सलाह है आप श्री पवन जैन चौधरी से बात करो। मैंने कहा कि उन से बात कर लूंगा।
तीन अक्टूबर को मैने प्रातः श्री पवन जी को फोन लगाया वह व्यस्त थे अतः वार्ता नहीं हो पाई पर उन्होंने मुझे आश्वस्त किया कि जैसे ही में फ्री होऊगा आपको फोन करुगा। पांच अक्टूबर को उनका दस बजे फोन आया उस समय में कोर्ट में घुस रहा था चारो ओर हो–हल्ला मचा हुआ था अतः मैने श्री पवन जी को कहा कि अभी मैं कोर्ट में आया हूँ, यदि उचित समझे तो शान्ती से शाम को बात करता हूँ। उन्होंने कहा कि कोई दिक्कत नहीं है अंकल में खुद शाम को फोन मिला लूंगा ।
पांच अक्टूबर को मैरी श्री पवन जी चौधरी से बात हुई। मैने उन्हें सारी बात बताई स्थिति– परिस्थिति पर विचार बताये, उन्होने तुरन्त कहा कि अंकल आप तो इस काम को करवाओं हम तो तुरन्त हर प्रकार से तैयार है। हम भी यही चाहते है कि महासभा टूटनी नहीं चाहिए। आप तो इस काम को करवाओ। पर एक बार आप श्री देवकी नन्दन जी से बात कर ले हमने अपने सभी अधिकार भी श्री देवकी नन्दन बाबूजी को दे दिये है। इस लिए आप श्री देवकी नन्दन जी से बात कर ले। मैंने भी पवन जी को कहा ठीक है, मैं श्री देवकी नन्दन जी से बात कर लूंगा ।
दिनांक 06 अक्टूबर को मैने माननीय श्री देवकी नन्दन जी को नो बजे फोन लगाया उन्हाने फोन नहीं उठाया, कुछ देर बाद श्री देवकी नन्दन जी का फोन आया मैने तबीयत के बारे में पूछा उन्होने बताया कि मैं घूमने गया था घर आकर देखा आपका फोन है, इसलिए मैने आपको फोन मिलाया। मैने उनसे सीधे कहा कि भाई साहब आपके दर्शन करना चाहता था, यदि समय हो तो मैं आपसे मिलने आ जाऊं। उन्होने बहुत ही सहजता से कहा कि यह कोई पूछने की बात है आप तो जब चाहे तब आ जाओ। मैने कहा कि भाईसाहव खाना खा कर 11 बजे के आस-पास आजांऊ। उन्होंने कहा कि हां आ जाओ साहब खाना भी यहीं खा लेना मैने कहा भाईसाहब वो तो एक ही बात है यहां खाया या वहां खाया आपके यहां चाय पीऊँगा। उन्होने कहा ठीक है ।
मैने दस बजे के आस-पास श्री राजेन्द कुमार जी जैन लक्ष्मणगढ वालो को फोन किया, मैने उनसे कहा राजेन्द्र जी आपने श्री देवकी नन्दन जी घर देखा है क्या ? उन्होने कहा हाँ देखा है, तो ग्यारह बजे देवकी नन्दन जी के यहां मिलने चलना है, आप थोडा समय निकालो तो आप और मै दोनो उनके घर चलें। वह बोले आप तो मेरे घर आ जाओ यहाँ से सीधे चले चलेगें। मै अपने स्कूटर से उनके घर चला गया और ग्यारह बजे हम श्री देवकी नन्दन जी के घर के लिए रवाना हो गए। सवा ग्यारह बजे उनके निवास पर पहुंच गए।
श्री देवकी नन्दन जी ने हमे बहुत ही स्नेह से बैठाया। हम उनके घर पर लगभग दो घन्टे बैठे। इस दौरान नाश्ता भी किया दो बार चाय पी, उनके सामने सभी वार्तालाप प्रस्तुत कर निवेदन किया कि भाईसाहब महासभा टूटनी नहीं चाहिए, महासभा एक रहनी चाहिए। आप महासभा के तीन बार अध्यक्ष रहे है सारी स्थिति परिस्थिति आपके सामने है, आप जो भी प्रयास कर सके करें। उन्होंने मुझे पूरी तरह से आश्वस्त कर दिया कि महासभा टूटेगी नहीं, आप निश्चिंत रहो। आप हम सभी मिल कर प्रयास करेगे, समझायेगें महासभा एक रहेगी टूटेगी नहीं। दो घन्टे की वार्ता के बाद मैं और राजेन्द्र जी देवकी नन्दन जी के घर से अपने- अपने घर आ गये।
दो-तीन दिन बाद मैनें फिर श्री देवकी नन्दन जी को फोन किया। मैने पूछा भाईसाहब कोई वार्ता हुई क्या? श्री देवकी नन्दन जी ने कहा हॉ बात हुई है आप जैसा चाहते हो वैसा ही होगा । 16-11-2025 को इनकी कार्यकारिणी की बैठक आगरा में होनी निशचित हुई है, उस में बात करेगें। मैं महेश जी को कहूंगा कि वे आप को भी मीटिंग में बुलाए। मैने तुरन्त कहा कि यदि वे मुझे मीटिंग में बुलाएगें तो मैं निश्चत रूप से आगरा जाऊंगा।
दिनांक 11 अक्टूबर को मुझे किसी व्यक्तिगत काम से अलवर जाना पडा। अलवर पहुंचने के बाद मैने श्री त्रिलोक चन्द जी जैन साहब को फोन किया | उन्हें बताया कि मै अलवर आया हूँ। उन्होंने ने मुझे अपने यहां चाय पर आमन्त्रित किया । मैने अपनी विवशता बताते हुए कहा दि मै ट्रेन से आया हूँ, मेरे पास कोई साधन भी नहीं है, मै यहाँ दीवान जी के बाग पर हॅू। यदि आप पधार जाए तो बहुत अच्छा रहेगा। श्री त्रिलोक जी ने बहुत ही सहजता के साथ कहा कोई बात नही साहब मै आ जाऊंगा साढे तीन बजे आ जाऊ तो कोई दिक्कत तो नही होगी। मैने कहा सर आप को जब भी समय मिले आप पधार जाए मैं आपका इंतजार करूंगा। श्री त्रिलोक जी साढे तीन बजे दीवान जी के बाग पर आ गए। मैने उन्हें श्री पवनजी चौधरी और श्री देवकी नन्दन जी से जो वार्ता हुई वह सब बताकर उनसे निवेदन किया कि दूसरे पक्ष से भी अत्यन्त सकारात्मक वार्ता हो रही है आप अपना बड़ा मन रखें, महासभा एक रहे यही पूरे समाज की भावना है, अतः आपसे निवेदन है कि जो भी विवाद कोर्ट-कचहरी में चल रहे है वह सभी समाप्त कर देने चाहिए, बैंक का जो विवाद है वह भी समाप्त कर देना चाहिए। श्री त्रिलोक जी ने कहा कि साहब हमारा कोई विवाद नहीं है वह महासभा को एक करने की बात करें आप निरचित रहे सभी कोर्ट-कचहरी के मामले खत्म करवा दिए जाएंगे बैंक का खाता भी रेगूलर करवा दिया जाएगा । पर कोई बात तो बने । आपसे निवेदन है कि 26 अक्टूबर भरतपुर में हमारी कार्यकारिणी की बैठक है आप उस में अवश्य पधारे। 26 अक्टूबर की बैठक के लिए मेरे पास श्री पारस जी महामंत्री अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा ने पत्र लिख कर कार्यकारिणी बैठक में शामिल होने का अनुरोध किया, उन्होंने दो बार मुझे इस सम्बन्ध में फोन भी किए। श्री त्रिलोक जी ने भी फोन कर बैठक में शामिल होने का अनुरोध किया । अतः मै दिनाक 26 – अक्टूबर को उनकी कार्यकारिणी की बैठक में शामिल होने के लिए भरतपुर गया और वहां पर आयोजित पूरी बैठक में पूरे समय उपस्थित रहा।
कार्यकारिणी बैठक का विषय एक ही बिन्दु पर केन्द्रित था, वह था ” महासभा के आगामी चुनावों पर विचार । लगभग ढाई सौ सामाजिक बन्धूओं, माता-बहनो – नवयुवकों की उपस्थिति बैठक में रही होगी। अनेको बन्धुओं ने माताओ – बहनों ने अपने-अपने विचार रखे। मुझे भी बोलने का अवसर मिला। मैने अपनी बात सभी समाज जनों के सामने रखी और एक प्रश्न खडा कर दिया कि आप आगामी चुनावों की बात तो कर रहे है पर इसको मान्यता कौन देगा यदि आप चुनाव कराते हो तो श्री महेश चन्द्र जैन का गुट उसे मान्यता नहीं देगा और यदि श्री महेश चन्द्र जैन चुनाव कराते है तो आप लोग मान्यता नहीं दोगे, ऐसी स्थिति में महासभा तो विभाजित हो जाएगी। यदि आप महासभा को विभाजित करने का दोष अपने ऊपर लेने के लिए तैयार हो तो आप चुनाव की बात करो पर यह ध्यान रखना कि पूरे देश का पल्लीवाल जैन समाज आपको क्षमा नहीं करेगा और आप लोग महासभा को दो- फाड करने के दोषी कहलाओगे। सामने जो समाज बन्धु बैठे थे, वहां से आवाज आई तो क्या करना चाहिए ? मेरी स्पष्ट राय थी जो भी पदाधिकारी है चाहे यहां के हो चाहें वहा के हो, सभी त्यागपत्र दें और समाज की एक स्वतंत्र कमेटी आगामी चुनाव कराए तब ही इस सामाजिक संगठन की प्रतिष्ठा बच सकती है। मुझसे पूछा गया कि क्या वह लोग भी तैयार है। मैने कहा कि पहले आप लोग तो तैयार हो उनसे भी बात चल रही है माननीय श्री देवकीनन्दन जी उनसे वार्ता कर रहे है, वह लोग भी विवेकवान है निश्चत रूप से महासभा को तोडने का दोष वो भी अपने ऊपर लेना नहीं चाहेगें । निश्चय ही अच्छा हल निकलेगा। अनेको प्रश्न पूंछे गये अनेकों तरह की शंकाए व्यक्त की गई माहौल गर्म भी हुआ पर वहां उपस्थित सभी महानुभावों की एक ही भावना थी कि महासभा टूटनी नहीं चाहिए विभाजित नहीं होनी चाहिए। काफी जद्दोजहद के बाद भरतपुर में उपस्थित सभी महानुभावों ने एक मत हो यह निर्णय लिया कि महासभा विभाजित नहीं होनी चाहिए और वार्ता के सभी अधिकार अशोक कुमार जैन भू०पू० महामंत्री महासभा को दिए जाते है ।
श्री सुमेर चन्द्र जैन भरतपुर ने वहीं से श्री देवकी नन्दन जी को फोन लगाया और सारे निर्णय से अवगत करा दिया । भरतपुर में बैठक समाप्त हुई थी, उसी समय श्री देवकी नन्दन जी से मेरी बात श्री सुमेर चन्द जैन भरतपुर ने करवाई। मैने उन्हें सारी बात बताई। श्री देवकी नन्दन जी ने मुझसे बहुत खुशी दर्शाते हुए कहा भगवान जो करता है अच्छा करता है और भगवान ने चाहा तो आगे भी सब अच्छा होगा। महासभा टूटेगी नहीं वह एक ही रहेगी ।
29 अक्टूबर को श्री पारस जैन महामन्त्री अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा एवं श्री त्रिलोक चन्द जैन द्वारा व्हाटसएप्प पर एक विज्ञप्ति समाज के अधिकांश ग्रुपों पर डाल कर भरतपुर में हुई कार्यकारिणी की बैठक में लिए गए निर्णय से सभी समाज जनों को अवगत करा दिया गया।
मैं श्री देवकीनन्दन जी भूतपूर्व अध्यक्ष अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा के आश्वासन से पूरी तरह से आश्वस्त हूँ कि दिनांक 16 नवम्बर 2025 को श्री महेश चन्द्र जैन गुट की कार्यकारिणी भी इसी प्रकार का सकारात्मक निर्णय लेगी और महासभा की एकरूपता-अखंडता को बनाये रखने में अपनी महती भूमिका को निभायेगीं।
अशोक कुमार जैन
2बी, रामद्वारा कालोनी, महावीर नगर,
जयपुर