श्री पल्लीवाल जैन डिजिटल पत्रिका

अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा

(पल्लीवाल, जैसवाल, सैलवाल सम्बंधित जैन समाज)

विश्वासपूर्ण जीवन

विश्वास का बल ही प्रतिकूलताओं में जीने का साहस प्रदान करता है ! जहाँ विश्वास होता है, वहीं धैर्य भी जन्म ले पाता है और जहाँ धैर्य का जन्म होता है, वहाँ नैराश्य का विलय एवं पुरुषार्थ का उदय भी हो जाता है !

सब कुछ खो जाने पर भी यदि हमने जीवन में अपने विश्वास को नहीं खोया है तो आज नहीं तो कल, विश्वास के बल पर उन सब को दुबारा से प्राप्त कर ही लिया जायेगा ! विश्वास स्वयं पर होना चाहिए, विश्वास अपने कर्मों पर होना चाहिए और विश्वास परमात्मा पर होना चाहिए !

विश्वास के अभाव में ये प्रकृति किसी को कुछ भी नहीं दे सकती है ! वृक्ष की प्राप्ति के लिए हमें बीज पर विश्वास होना ही चाहिए और फल की प्राप्ति के लिए हमें वृक्ष पर भी विश्वास होना चाहिए !

विश्वास में अद्भुत सामर्थ्य है ! विश्वास के बल से ही पाण्डवों ने बाहुबल और संख्याबल में बहुत कम होने के बावजूद भी महाभारत जैसे युद्ध को जीतकर अपने खोये हुए स्वाभिमान को पुनः प्राप्त किया ! जीवन में अविश्वास अशांति का कारण भी है !

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