श्री पल्लीवाल जैन डिजिटल पत्रिका

अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा

(पल्लीवाल, जैसवाल, सैलवाल सम्बंधित जैन समाज)

विद्या के सागर -108 आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की प्रथम समाधि पुण्यतिथि

🙏 विद्या के सागर -108 आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की प्रथम समाधि पुण्यतिथि🙏

 

आचार्य श्री108श्री विद्यासागर जी महाराज का जन्म कर्नाटक राज्य के बेलगांव जिले के ग्राम सदलगा में 10 अक्टूबर 1946(सरद पूर्णिमा)को हुआ, इनके जन्म का नाम विद्याधर अष्टगे था ! ये कुल चार भाई ( एक बड़े एवं दो छोटे)व दो बहने थी, इन सभी भाईयों ने एवं इनकी माता श्रीमती जी अष्टगे ( आर्यिका समयमति जी) एवं पिता मल्लप्पाजी अष्टगे ( मुनि श्री108 मल्लिसागर जी)ने इन्हीं से ब्रह्मचर्य लिया, इनके दो भाइयों एवं पिता ने इन्हीं से दीक्षा प्राप्त की तथा उनके पिता श्री द्वारा समाधि भी इनसे ही ली गई !

जब ये लगभग 9 वर्ष के थे उस समय इन पर आचार्य श्री 108 शांतिसागर जी महाराज के उपदेशों एवं प्रवचनों का बहुत प्रभाव पड़ा, यही से इन्हें धार्मिक संस्कार मिलना प्रारंभ हो गया, और फिर इन्होंने वर्ष 1967 में आचार्य श्री 108 देश भूषण जी महराज से जयपुर में ब्रह्मचर्य व्रत प्राप्त किया, इसके पश्चात इनको मात्र 22 साल की उम्र में 30 जून 1968 (आषाढ़ शुक्ल पंचमी) के दिन अजमेर में आचार्य श्री108 ज्ञान सागर जी महाराज द्वारा इन्हें दीक्षा दी गई तथा 22 नवंबर 1972(मार्गशीर्ष कृष्णा दोज ) को नसीराबाद, अजमेर में आचार्य पद भी इन्हीं के द्वारा प्रदान किया गया।आप कन्नड़ भाषी होते हुए भी आठ भाषाओं- विशेष करसंस्कृत ,हिंदी ,मराठी ,कन्नड़ ,अंग्रेजी आदि भाषाओं के विशेषज्ञ थे

मध्य प्रदेश सरकार द्वारा भोपाल विधानसभा के परिसर में गुरुवार, दिनांक 6 फरवरी 2025 को आचार्य श्री108 विद्यासागर जी महाराज के प्रथम समाधि स्मृति दिवस पर गुणानुवाद सभा का आयोजन किया गया ,इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव द्वारा घोषणा की गई की भोपाल में आचार्य श्री की स्मृति में एक भव्य स्मारक बनाया जाएगा! इसमें उनकी आध्यात्मिक विरासत को संरक्षित एवं शोध का कार्य किया जाएगा, ताकि जनमानस को प्रेरणा मिलती रहे। डॉक्टर यादव ने कहा की आचार्य श्री के सिद्धांतों और विचारों को ध्यान में रखते हुए ये सरकार गो-संरक्षण पर विशेष ध्यान दे रही है ,प्रदेश के 17 नगरों में शराबबंदी लागू होगी तथा खुले में मांस बिक्री पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। इसी कार्यक्रम के दौरान आचार्य श्री के जीवन पर आधारित 25 पुस्तकों का विमोचन भी किया गया,इस दौरान मुनि प्रमाण सागर जी महाराज एवं मुनि आदित्य सागर जी ससंघ की उपस्थिति में मुख्यमंत्री डॉक्टर यादव ने कहा प्रतिवर्ष आचार्य विद्यासागर जी का प्रदेश सरकार द्वारा इस दिन स्मृति दिवस भी मनाया जाएगा!

इंदौर वासियों का इनसे विशेष लगाव होने का मुख्य कारण यह रहा कि आज से करीब 25 वर्ष पूर्व इन्होंने इंदौर में चतुर्थमास किया था उस समय यहां( सांवेर रोड पर रेवती रेंज में) एक 27 एकड़ जमीन में जिनालय के निर्माण के अलावा” अहिंसा परमो धर्म “की शिक्षा देते हुए एक विशाल गौशाला बनाए जाने का काम किया,इसके साथ ही बालिकाओं की शिक्षा हेतु स्कूल व छात्रावास का निर्माण किया तथा रोजगार हेतु गोधन, चरखा व हाथ करघा उद्योगों का प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जो आज भी संचालित है।

इंदौर में प्रथम समाधि दिवस पर मुनि विनम्र सागर जी महाराज ने कार्यक्रम स्थल महावीर नगर ग्राउंड में आयोजित कल्पद्रुम महामंडल विधान के दौरान इंद्र -इंद्राणियों व श्रावक -श्राविकाओं ने कल्पद्रुम विधान के निमित्त समवशरण पर 36 अर्घ्य समर्पित किए तथा डोंगरगढ़ (छत्तीसगढ़) स्थित आचार्य विद्यासागर मुनिराज की समाधि स्थल व जिनालय की प्रतिकृति भी प्रदर्शित की गई जो काफी आकर्षण का केंद्र रही, शाम को लेजर लाइट शो के माध्यम से आचार्य श्री की जन्म से लेकर मोक्ष तक की यात्रा को दिखाया गया।

आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने छत्तीसगढ़ राज्य के राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ स्थित चंद्रगिरी तीर्थ पर 18 फरवरी 2024( माघ शुक्ल नवमी)को समाधि ली , समाधि लिए जाने से 3 दिन पूर्व ही इन्होंने अपने छोटे भाई श्री 108 समय सागर महाराज जी को आचार्य पद का उत्तराधिकारी नियुक्त कर दिया

इस संबंध में डोंगरगढ़ में निर्मित होने वाले आचार्य श्री की समाधि तीर्थ स्थल के अध्यक्ष श्री विनोद बढ़जात्या जी एवं महामंत्री श्री मनोज जैन द्वारा बताया कि सभी दिगंबर जैन मुनियों द्वारा यह निर्णय किया गया की 18 फरवरी के स्थान पर 6 फरवरी को “माघ शुक्ल नवमी” अच्छा नक्षत्र एवं तिथि पड़ती है अतः सभी मुनि महाराजो से विचार विमर्श कर इस दिनांक को उपयुक्त एवं सर्वश्रेष्ठ मानते हुए इनका कार्यक्रम किया जाना निर्धारित किया गया। उन्होंने अवगत कराया कि आचार्य श्री सभी कार्यों को आगम के अनुसार करते हैं , इसीलिए यह समाधि स्थल एक मंदिर के रूप में नहीं रहेगा तथा इसमें कोई प्रतिमा नहीं होगी और ना ही कोई शिखर होगा, केवल चरण होंगे तथा इस समाधि स्थल को एक कमल के फुल की आक्रती के रूप में निर्मित किया जाएगा ,जिसमें सभी श्रावक -श्राविकाओं द्वारा सामायिक एवं उनका स्मरण किया सकें।

भारत सरकार के केंद्र गृह मंत्री अमित शाह और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा उनकी “प्रथम समाधि स्मृति महोत्सव के श्री 1008 सिद्ध चक्र विधान व विश्व शांति महायज्ञ” में शामिल होकर उनकी स्मृति में ₹100 का स्मारक सिक्का( 35 ग्राम प्रति सिक्का-सिक्के के अग्रभाग में अशोक स्तंभ का चिन्ह होगा और उसके नीचे “सत्यमेव जयतें “अंकित होगा। इसकी परिधि पर देवनागरी में” भारत”और अंग्रेजी में इंडिया लिखा होगा!स्तंभ के नीचे रूपए 100 का अंकन होगा। सिक्के के पृष्ठ भाग पर आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का चित्र होगा जिसके बाई और कमंडल तथा दाएं ओर पिच्छी का चित्रांकन किया जाएगा),डाक विभाग का ₹5 का विशेष लिफाफा तथा अष्टधातु की बनाई,108 चरण पादुकाएं ( एक चरण पादुका का वजन करीब 100किलो)के चित्र का लोकार्पण एवं अनावरण किया और प्रस्तावित समाधि स्मारक ‘विद्यायतन’ का भूमि पूजन एवं शिलान्यास भी किया, इन 108 चरण पादुकाओं को अब अनावरण के पश्चात देश भर के दिगंबर जैन मंदिरों में यहां से ले जाया जाएगा ।

यह समाधि स्थल 4.5 एकड़ जमीन पर चंद्रग्रिरी पर्वत के किनारे कमल के फूल की आक्रती लेते हुए 54 फीट ऊंचा भव्य स्मारक का होगा, यहां पर 6 फरवरी 2025 को गृहमंत्री श्री अमित शाह द्वारा समाधि स्थल पर स्मारक बनाने की नींव रखी जिसमें अंतर्राष्ट्रीय संग्रहालय, लेजर लाइट,म्यूजिकल फाउंडेशन शो होगा , जिस पर करीब 151करोड़ रूपए खर्च होने की संभावना बतलाई गई इसके लिए किसी एक से राशि ना लेकर सभी को अपना द्रव्य लगाने के लिए प्रोत्साहित किया गया , जिससे सभी में उसके प्रति अपनत्व एवं लगाव बढ़ सकें ,इस संदर्भ में उसी दिन एक-एक लाख रुपए प्रति कलश स्थापना की राशि निर्धारित की गई , इसी दौरान आर के मार्बल के श्री अशोक पाटनी परिवार द्वारा 1100 कलश, कागज़ी परिवार द्वारा 108 कलश,प्रभात जी बम्बई वालों द्वारा 108कलश, विनोद जी बड़जात्या द्वारा 216 कलश, दिल्ली के एक परिवार द्वारा (गुप्त नाम) द्वारा 216कलश, सागर के महेश जी द्वारा 108 कलश, नवीन जी गुड़गांव द्वारा 108 कलश, विनोद जी कोयला परिवार द्वारा 108कलश, आदि अनेक परिवार जनों को अपनी चंचल लक्ष्मी का सदुपयोग करने का अवसर मिला, इन सभी परिवार जनों को हमारी तरफ से बहुत-बहुत अनुमोदना एवं साधुवाद । इसी कार्यक्रम के संदर्भ में इंदौर में महाराजों द्वारा सभी को प्रेरित किया गया कि सभी इंदौर वासियों के प्रत्येक परिवार को एक-एक कलश के रूप में एक-एक लाख रुपए राशि प्रदान करें जिससे अधिक से अधिक लोगों का उसमें सहयोग हो सके।
आचार्य श्री की प्रेरणा से पांच नवीन तीर्थो की स्थापना हुई, 12 पाषाण जिनालयों का निर्माण एवं पांच तीर्थो का जीर्णोद्धार कराया गया ,इसका ताजा उदाहरण कुंडलपुर तीर्थ पर स्थित बड़े बाबा के विशाल एवं ऐतिहासिक और सुदर्शनीय मंदिर की पुनर्स्थापना है ।उनकी प्रेरणा एवं आशीर्वाद से देश में 130 गौशालाएं स्थापित की गई ,स्त्री शिक्षा के लिए विशेष कार्यक्रमों का आयोजन करते हुए धर्म एवं सुसंस्कारों से समृद्ध गुरुकुल पैटर्न पर इंदौर, जबलपुर, रामटेक,सागर व डोंगरगढ़ आदि शहरों में आवासीय कन्या विद्यालय की स्थापना की गई।

भारतवर्ष के भूतपूर्व राष्ट्रपति माननीय श्रीमान रामनाथ गोविंद जी ,अपने कार्यकाल के दौरान एक बार आचार्य श्री से उसके कक्ष में मिलने गए ,इस पर आचार्य जी ने उनसे दो बात कही -प्रथम इस देश को इंडिया नहीं बल्कि ‘भारत ‘के रूप में जानना चाहिए तथा दूसरी देश में हिंदी को राष्ट्रभाषा को रूप में सभी को स्वीकार एवं प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। यह वाक्या उनके द्वारा तब बताया गया जब उन्हें जी-20 के आमंत्रण कार्ड पर इंडिया की जगह” भारत”लिखा हुआ प्राप्त हुआ इस पर उन्होंने बहुत प्रसन्नता जताई ।

भारत के प्रधानमंत्री श्रीमान नरेंद्र मोदी जी भी उनके परम भक्त रहे हैं, मोदी जी ने अपने एक ट्वीट में लिखा कि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के अनगिनत भक्त हैं आने वाली पीडियां उन्हें समाज के अमूल्य योगदान के लिए याद रखेगी! आध्यात्मिक जागृति के उनके प्रयासों, गरीब उन्मूलन, इस स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा और अन्य सामाजिक एवं धार्मिक कार्यों के लिए उन्हें याद रखा जावेंगा !

दिगंबर आचार्य व जैन धर्म के महान संत और समाज सुधारक के रूप में इनका जीवन मानव मात्र को प्रेरणा देता है, आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज द्वारा कुल 508 दीक्षायें (131 मुनियों,172आर्यिकाओं,61ऐलकों, 141क्षुल्लको, एवं 3 क्षुल्लिकाओं को ) दी जाकर उन्हें निर्वाह के लिए निर्यापक श्रमण व्यवस्था की जानकारी दी ,इन्होने अनेक भाषाओं में धार्मिक एवं सामाजिक रचनाएं लिखीं जिनमें एक महाकाव्य ” मूक माटी “की रचना विशेष थी इसमें धर्म ,दर्शन ,अध्यात्म ,नीति को काफी विस्तार पूर्वक बतलाया गया है जिस पर कई संस्थानों में पोस्ट ग्रेजुएशन के हिंदी पाठ्यक्रम में शामिल किया जाकर शोध कार्य किया जा रहा है, आचार्य श्री पर अब तक 56 पीएचडी हो चुकी है।

आचार्य श्री विद्यासागर जी द्वारा अपनी पुस्तकों एवं प्रवचनों में उपवास किए जाने पर बहुत जोर दिया तथा इसके महत्व को बतलाया कि” उपवास से शारीरिक स्वास्थ्य लाभदायक “रहता है इससे कोशिकाएं जीवाणुओं से रहित रहती है और इससे मरण को भी जीता जा सकता है ,इसलिए उपवास की नियमावली को अपनायें जाने एवं मरण के अन्तिम समय पर सल्लेखना किये जाने को बताया गया। इसी विचारधारा का अनुसरण करते हुए आचार्य श्री जी द्वारा संलेखना पूर्वक समाधि 18 फरवरी 2024 (माघ शुक्ल पंचमी) के दिन ली गई।आचार्य श्री द्वारा अपने प्रवचन में जापानी जीव विज्ञानी के अनुसंधान का उल्लेख किया ,इस जापानी ( योशिनोरी ओहसुमी)को कोशिकाओं की जीव विज्ञान विषय पर चिकित्सा के क्षेत्र में2016 में नोबेल पुरस्कार दिया गया ,इसका उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने में विशेष महत्व एवं योगदान बताया गया।
आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज द्वारा सात राज्यों के विभिन्न दिगंबर क्षेत्र में 51 चातुर्मास ( राजस्थान -7, यूपी -1, एमपी -34, बिहार वर्तमान में झारखंड -1, महाराष्ट्र -5, गुजरात -1, छत्तीसगढ़ -2) किये। अजमेर में दीक्षा लिए जाने के कारण प्रारंभ के सात चातुर्मास वर्ष 1968 से 1974 तक राजस्थान के अजमेर में (अजमेर -3,किशनगढ़-2,नसीराबाद-1, एवं ब्यावर-1) में किये।मध्यप्रदेश में सर्वाधिक चातुर्मास करने के कारण इसी क्षेत्र में सबसे अधिक दिगंबर जैन मंदिरों का निर्माण एवं जिर्णोद्धार कराया गया।
आचार्य श्री के द्वारा 65 पंचकल्याणक गजरथ महोत्सव करायें गये,उनमें सागर का भाग्योदय तीर्थ परिसर ऐसा रहा जहां सर्वाधिक पांच कल्याणक एक ही भूमि पर हुए।
इस प्रथम समाधि दिवस के अवसर पर भारतवर्ष के सभी बड़े एवं छोटे शहरों, कस्बों व गांवों के जिनालयों में जगतपुज्य, जनआराधक संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का प्रथम समाधि दिवस बड़े धूमधाम से मनाया गया,जिसमें सभी जिनालयों में भव्य पूजन,विधान, शांति धारा ,भक्ति में आरती कर के विनयांजलि दी गई।

अशोक कुमार जैन
भू अ , शाखा -जयपुर

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