श्री पल्लीवाल जैन डिजिटल पत्रिका

अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा

(पल्लीवाल, जैसवाल, सैलवाल सम्बंधित जैन समाज)

निरंतरता

दुनिया के हर इंसान का कोई न कोई लक्ष्य होता है और वह उस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रयासरत रहता है लेकिन फिर भी कुछ ही प्रतिशत लोग अपने लक्ष्य तक पहुंच पाते हैं अधिकांश लोग अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में असमर्थ रहते हैं इसका मुख्य कारण है निरंतरता में कमी

हर इंसान अपने लक्ष्य को प्राप्त करने की जी तोड़ मेहनत करता है लेकिन कुछ ही लोग निरंतर मेहनत करते हैं अधिकांश लोग मेहनत करते हैं फिर रुक जाते हैं फिर मेहनत करते हैं फिर रुक जाते हैं जिससे उनकी निरंतरता नहीं बनी रहती है और इस कारण से वह अपने लक्ष्य से दूर रहते हैं लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निरंतरता बहुत जरूरी है

दुनिया का कोई भी लक्ष्य हो चाहे वह है सांसारिक लक्ष्य हो या परमार्थिक लक्ष्य हो निरंतरता बहुत जरूरी है अगर हम परमार्थ में आगे बढ़ रहे हैं और हमारे व्रत संयम त्याग तपस्या में निरंतरता नहीं है तो हम मन में सहजता और संयम को प्राप्त करने में सफल नहीं हो पाते हैं अगर हमें परमार्थ में कोई लक्ष्य प्राप्त करना है तो हमारे व्रत संयम और त्याग तपस्या में निरंतरता बहुत जरूरी है तभी हम अपने परमार्थिक लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं

आपने कछुआ और खरगोश की कहानी तो सुनी होगी उस कहानी का सारांश यही है की लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निरंतरता जरूरी है अगर खरगोश निरंतर चलता रहता तो कछुआ कभी नहीं जीत सकता था लेकिन खरगोश ने अपनी निरंतरता को छोड़ दिया और कछुआ निरंतर चलता रहा बस इसी निरंतरता के कारण कछुआ रेस में जीत गया

.

Leave a Reply