श्री पल्लीवाल जैन डिजिटल पत्रिका

अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा

(पल्लीवाल, जैसवाल, सैलवाल सम्बंधित जैन समाज)

महासभा मे चल रहे गतिरोध को दूर करने के प्रयास

अबतक के प्रयास
अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा में लम्बे समय, १९ मार्च २०२३ से गतिरोध चल रहा है। इस गतिरोध को समाप्त कराने के प्रयास श्री शिखर चन्द जी सिधई आगरा, पूर्व अध्यक्ष महासभा की अध्यक्षता में गठित ९ सदस्यीय सद्भावना समिति के द्वारा प्रारंभ किए गए थे। इस समिति की १० मार्च २०२४ को जयपुर में बैठक सम्पन्न हुई थी जिसमें लिए गए निर्णयानुसार अध्यक्ष श्री शिखर चन्द जी पूर्व अध्यक्ष महासभा द्वारा अपना निर्णय घोषित कर दिया गया था, किन्तु दुर्भाग्य कि उस निर्णय को स्वीकार करना तो दूर की बात, उसे उनके द्वारा पत्रिका को प्रेषित करने के बाद भी पत्रिका में प्रकाशित नहीं किया गया था। उस निर्णय (रिपोर्ट) को प्रकाशित करके सम्पूर्ण समाज के समक्ष रखना चाहिए था।
सद्भावना समिति के प्रयास सफल नहीं हो सके।
श्री महावीर प्रसाद जैन देहली द्वारा भी दोनों पक्षों से संवाद स्थापित किया गया, किन्तु उनके प्रयास भी सफल नहीं हुए।
हमारे द्वारा भी कुछ प्रयास शुरू किए गए, इस सम्बन्ध में एक दो बार महामंत्री जी से चर्चा की गयी उससे कुछ आशा बंधी थी। अध्यक्ष जी से भी सम्पर्क किया गया। विचार दोनों के ही कुछ शर्तो के साथ
सकारात्मक थे, किन्तु कुछ निष्कर्ष नहीं निकल सका।

दिनांक २४-७-२०२४को श्री देवकीनंदन जी जैन पूर्व अध्यक्ष महासभा, श्री रमेश चन्द जी पल्लीवाल पूर्व महामंत्री महासभा,श्री अशोक कुमार जी जैन नौगांवा हम चारों ने सकारात्मक सोच के साथ करीब २घन्टे एक साथ बैठकर महासभा कार्यकारिणी के इस विरोधाभास को कैसे समाप्त कराया जाए, इस विषय पर विचार विमर्श किया ।
बात कुछ आगे बढ़ती, उससे पूर्व ही एक महानुभाव द्वारा अलवर में २५-२६ अगस्त को होने जा रहें विवाह योग्य युवक युवतियों के परिचय सम्मेलन एवं प्रतिनिधि सम्मेलन के विरोध में अच्छे शब्दों का उपयोग नहीं करते हुए अपना वक्तव्य (लेख)
अनेक वाट्सएप ग्रुपों में अग्रेषित कर दिया। निश्चय ही इस से गतिरोध को समाप्त कराने के प्रयासों में अवरोध उत्पन्न हुआ। इन श्रीमान के लेख के प्रतिउत्तर में दूसरे महानुभाव का व्यक्तव्य (लेख)वाट्सएप ग्रुपों में अग्रेषित हुआ, जिसमें भी अच्छे शब्दों का उपयोग नहीं किया गया था। इसके बाद आरोप प्रत्यारोपो का कई दिनों तक वाट्सएप ग्रुपों पर द्वंद चलता रहा, जिससे हमे निराशा प्राप्त हुई, परिणाम स्वरूप समझौता वार्ता पर विराम सा लग गया।

आगे क्या प्रयास हो
आज इस सम्बन्ध में पुनः विचार उत्पन्न हुआ है कि कुछ किया जाए। वाट्सएप ग्रुपों के माध्यम से अपने विचार अग्रेषित कर रहा हूं।
अध्यक्ष जी एवं महामंत्री जी अभी समय है, शान्त मन से दोनों पक्ष विचार करें, आप तीनों मिल बैठकर महासभा के हित में ऐसा कोई समाधान निकालें जिसमें सभी का सम्मान बना रहे, किसी को भी झुकना नहीं पड़े तथा महासभा के विधान की पालना भी हो। विधान हम सभी के लिए सर्वोपरि है।
अध्यक्ष महोदय ससम्मान महामंत्री जी एवं उनके सभी कार्यकारिणी साथियों को आमंत्रित करें और सम्मानजनक तरीके से उन्हें सम्मेलन में समल्लित कराएं। महामंत्री महोदय शांत मन से विचार करें, २५-२६ अगस्त को अलवर में होने वाले सम्मेलन में अपने सभी कार्यकारिणी के साथियों के साथ ससम्मान सम्मिलित हों।
यह सुन्दर अवसर है दूरियां कम करें, दूरियां बढ़ाए नहीं।
आशा करता हूं कि आगे अच्छा ही अच्छा होगा।

श्रीचन्द जैन
पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री महासभा।

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