श्री पल्लीवाल जैन डिजिटल पत्रिका

अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा

(पल्लीवाल, जैसवाल, सैलवाल सम्बंधित जैन समाज)

महासभा बैठक कार्यवाही विवरण दिनांक 28.01.24 अलवर

अ० भा० पल्लीवाल जैन महासभा की केन्द्रीय कार्यकारिणी की सद्भावना बैठक दिनांक 28.01.24 को पल्लीवाल भवन, अलवर में त्रिलोकचंद जैन अध्यक्ष की अध्यक्षता में प्रातः 11 बजे प्रारंभ हुई।
बैठक के प्रारंभ में श्री शीतल प्रसाद जैन द्वारा मंगलाचरण, श्री शिखरचंद जैन सिंघई पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व महामंत्री श्री श्रीचन्द जैन, श्री विमल जैन व श्री मगन जैन व पूर्व अर्थमंत्री श्री ज्ञानचंद जी, जयपुर, शाखा अध्यक्ष श्री वी.के. जैन के साथ स्वयं वर्तमान अध्यक्ष श्री त्रिलोकचंद जैन व अर्थमंत्री श्री भागचन्द जैन द्वारा सामूहिक रूप से दीप प्रज्ज्वलन किया गया ।
दीप प्रज्जवलन के पश्चात् अलवर शाखा के सदस्यों द्वारा आगंतुक अतिथियों का माला पहनाकर एवं तिलक लगाकर सम्मान किया गया। बैठक में कार्यकारिणी सदस्यों के अलावा शाखाओं के अध्यक्ष, मंत्रीगण एवं पूर्व राष्ट्रीय पदाधिकारी, पूर्व कार्यकारिणी सदस्यों सहित अनेक विशिष्ट अतिथि सम्मिलित हुए।

स्वागत के पश्चात अध्यक्ष श्री त्रिलोकचंद जैन ने सद्भावना बैठक बुलाने के कारणों पर प्रकाश डालते हुए सदन को अवगत कराया कि चुनाव के बाद सवाईमाधौपुर शाखा के एक प्रोग्राम में, अध्यक्ष ,महामंत्री व अर्थमंत्री तीनों सवाईमाधौपुर पहुँचे और वहाँ श्री चमत्कारजी मंदिर में दर्शन पश्चात् महासभा की प्रथम मीटिंग हेतु विचार-विमर्श किया गया। वहां हम तीनों के बीच सर्वसम्मति से यह तय हुआ कि पहली मीटिंग में पदाधिकारियों का चयन व अन्य नौ व्यक्तियों का मनोनयन करना है और यह कार्य चुने हुए 43 व्यक्तियों द्वारा ही किया जाना है। अतः इस मीटिंग में केवल चुने हुए 43 व्यक्तियों को ही आमंत्रित करना है। अन्य कोई विशिष्ट अतिथि कोई पूर्व अध्यक्ष महामंत्री तथा किसी शाखा के अध्यक्ष एवं मंत्री को भी सम्मिलित नहीं करना है। अतः मीटिंग किसी धार्मिक स्थल पर रखी जावे। यह बात हम तीनों के बीच सर्वसम्मति से बिना किसी विवाद के तय हुई और यह नोट भी लगाया गया कि केवल कार्यकारिणी पदाधिकारी व सदस्य ही आमंत्रित हैं और मीटिंग अतिशय क्षेत्र श्री बाडा पदमपुरा जी में रखी गई। लेकिन महामंत्री श्री महेश जी ने मुझे (अध्यक्ष) को बिना बताये तथ्य छिपाते हुए पूर्व अध्यक्ष श्री आर.सी. जैन एवं पूर्व महामंत्री श्री राजीव रतन जी को आमंत्रण भेज दिया और मीटिंग से दो दिन पूर्व मुझे इस बात का पता चला तो मैंने व अर्थमंत्री श्री भागचंद जी ने महामंत्री से जब यह पूछा तो वो कोई भी संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके। यहां मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि उक्त दोनो पदाधिकारी चुनाव के समय से ही विवादों में रहे हैं। हस्तिनापुर जी में चुनाव प्रबंधन में हुई भारी अनियमितताओं एवं अव्यवस्थाओं के कारण वहां सर्वसमाज द्वारा इनके विरूद्ध काफी रोष प्रगट किया गया जो सबको पता है और वहां पर बूथ कैप्चरिंग हुई, चुनाव स्थगित हुआ तथा इन दोनों को स्तीफा देने की घोषणा करनी पड़ी जो तत्कालीन कार्यकारिणी की आगामी बैठक फिरोजाबाद में इनके स्तीफे वोटिंग के द्वारा बहुमत से स्वीकार किए गए तथा कार्यकारिणी द्वारा सर्वसम्मति से नये अध्यक्ष श्री शरद जैन नागपुर व नये महामंत्री श्री मगन जैन अलवर को बनाया गया। जिन्होनें दिनांक 22-01-23 को अलवर में चुनाव करवाकर हम नव निर्वाचित पदाधिकारियों को बागडोर सौंपी। चूँकि अन्तिम अध्यक्ष, महामंत्री का वर्तमान कार्यकारिणी में सदस्य के रूप में मनोनीत किया जाना था इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए प्रथम मीटिंग में कोई विवाद न हो और प्रजातांत्रित तरीके से मनोनयन हो । यह तय किया गया था कि 43 व्यक्ति ही मीटिंग में उपस्थित हों। इस पर मेरे द्वारा श्रीमान आर.सी. जैन साहब को व्यक्तिगत रूप से फोन पर निवेदन किया गया कि महामंत्री द्वारा आपको गलती से आमंत्रण भेज दिया गया है परन्तु हस्तिनापुर जैसी स्थिति मीटिंग में उत्पन्न न हो क्योंकि कार्यकारिणी के सदस्य समाज का दर्पण हैं अतः आप प्रथम मीटिंग में उपस्थित न हो, कृप्या इस कार्य में मेरा सहयोग करें। परन्तु मेरे बार-बार अनुरोध करने पर भी उन्होनें मेरी अपील ठुकरादी और कहा कि हमें तो महामंत्री ने पत्र दिया है, हम तो आयेंगे और वो आये भी जिसके परिणाम स्वरूप हंगामेदार बैठक हुई और बैठक में कुछ भी नहीं हो सका। इस मीटिंग में जब महामंत्री जी ने बिना किसी पूर्व सूचना एवं कार्यकारिणी की अनुमोदना के बगैर सहमंत्री के रूप में पवन चौधरी के नाम की घोषणा करदी और मीटिंग में इसका विरोध हुआ इसके बावजूद पवन चौधरी ने सदन में आकर मीटिंग की कार्यवाही लिखना प्रारंभ कर दिया जो हठधर्मितापूर्ण था । इसके बाद मैंने व अर्थमंत्री जी ने महामंत्री श्री महेश जी के घर जयपुर जाकर बहुत समझाने की कौशिश की परन्तु इनके द्वारा बिना मुझसे परामर्श किये दूसरी मीटिंग श्री महावीरजी में रखदी और उन दोनों को फिर से आमंत्रित कर दिया। जिस पर मेरे द्वारा उस मीटिंग को निरस्त भी किया गया परन्तु दूरदराज से आने वाले सदस्यों के आग्रह व महामंत्री द्वारा करदी गई तैयारियों को ध्यान में रखते हुए समाज के हित में मुझे मीटिंग में उपस्थित होना पडा । बैठक में बिना मेरी अनुमति महामंत्री जी के आमंत्रण पर आये श्री आरसी जैन एवं राजीव रतन जी ने कहा कि हम तो पदेन हैं, हमारे मनोनयन की आवश्यकता नहीं है। इस पर सदन में 2 घण्टे तक हंगामा होता रहा परन्तु वो नहीं माने और 2-3 सदस्यों के साथ आकर स्टेज पर बैठ गये। मेरे विरोध पर भी उन्होनें कोई ध्यान नहीं दिया ।शायद वो अध्यक्ष को अध्यक्ष मानने को ही तैयार नहीं थे। तत्पश्चात् महामंत्री द्वारा मनमाने तरीके से पदाधिकारियों के चयन व मनोनयन की कार्यवाही शुरू की गई। इस पर मेरे द्वारा महामंत्री जी को ध्यान दिलाया गया कि 43 व्यक्ति ही चुनाव प्रक्रिया में भाग लेंगे तब वहां विराजित श्रीमान आर. सी. जैन साहब द्वारा मेरे लिए कहा गया कि इनको विधान की जानकारी नहीं है इन्हें तो खुद ही वोट डालने का अधिकार नहीं है और इसके बाद महामंत्रीजी ने अलोकतांत्रित तरीके से खुली पर्चीयों के साथ चुनाव कराया। 43 में से 2 अनुपस्थित व मेरे द्वारा वोट नहीं डाला गया। इस प्रकार 40 व्यक्तियों द्वारा मतदान किया जाना था परन्तु 40 के स्थान पर 10 अन्य व्यक्तियों के साथ 50 की वोटिंग करादी गई जो कार्यवाही बिलकुल अलोकतांत्रिक थी जो कि मेरे द्वारा कहा भी गया किन्तु मेरी बात पर कोई ध्यान नहीं दिया व 40 के बजाय 50 व्यक्तियों का मतदान करवाकर पदाधिकारियों का चयन व मनोनयन की घोषणा करदी गई।
तत्पश्चात् महामंत्रीजी ने मुझसे बिना परामर्श किए तीसरी मीटिंग सोनागिरजी में रखदी। मैं नहीं गया व कार्यकारिणी को अवगत करा दिया गया कि इस मीटिंग में भी मेरी कोई सहमति नहीं ली गई है और इस प्रकार महामंत्री जी की गलती से महासभा का एकवर्ष बरबाद हो गया और महासभा अपने मूल लक्ष्य से भटक रही है। तत्पश्चात् अजमेर शाखा के प्रोग्राम में हम तीनों पदाधिकारी पहुँचे वहाँ पर अजमेर से कार्यकारिणी सदस्य श्री अशोक जी व अजमेर के कई गणमान्य व्यक्तियों के बीच इस संबंध में चर्चा हुई व मेरे द्वारा अलवर में दिनांक 28.01.24 को मीटिंग बुलाना तय हुआ, जो मेरे द्वारा सद्भावना बैठक के रूप में बुलाई गई जिसमें कार्यकारिणी के अलावा सभी शाखाओं के अध्यक्ष, मंत्री व महासभा के पूर्व राष्ट्रीय पदाधिकारियों सहित अन्य विशिष्ट अतिथियों को बुलाने का आमंत्रण भेजा गया। जिस पर महामंत्री जी द्वारा मीटिंग में आने की बजाय कार्यकारिणी व समाज के वाट्सअप ग्रुपों पर मैसेज डाला गया कि अध्यक्ष द्वारा बुलाई गई मीटिंग अवैध है, अध्यक्ष को मीटिंग बुलाने का अधिकार नहीं है।
अब तक हुए घटनाक्रम के विवेचन के बाद अध्यक्षजी द्वारा चार प्रश्न सदन के सामने रखे गये पहला महामंत्री जी से, कि उनकी क्या मजबूरी थी कि हम तीनों की सहमति के बाद भी पहली मीटिंग में ही पूर्व अध्यक्ष श्री आर.सी. जैन व महामंत्री राजीव रतन जी को पत्र भेजे गये, दूसरा प्रश्न पूर्व अध्यक्ष श्री आर. सी. जैन साहब से, कि ऐसा क्या था कि जो वे अध्यक्ष के मना करने के बाद भी पहली मीटिंग में जबरदस्ती आये, तीसरा प्रश्न यहां विराजित पूर्व पदाधिकारियों से है, कि क्या महामंत्री द्वारा अध्यक्ष की सहमति के बिना मीटिंग बुलाया जाना विधान अनुरूप है और क्या अध्यक्ष को मीटिंग बुलाने का अधिकार नहीं है जबकि महामंत्री, अध्यक्ष की अवहेलना कर रहा हो। चौथा प्रश्न समाज से है कि आपने मुझे अध्यक्ष चुना है या श्री आर. सी. जैन को जो जबरदस्ती मीटिंग में आकर मुझे बोलने नहीं देते। पदमपुराजी मीटिंग में राजीव रतन जी व महावीरजी की मीटिंग में श्री आर. सी. जैन द्वारा यह कहकर कि अध्यक्ष को विधान का ज्ञान नहीं है, मेरा मजाक उड़ाया व महावीरजी की मीटिंग में असंवैधानिक तरीके से गुट बनाकर 40 के बजाय 50 वोट डलवाकर मनोनयन कराया। जिसकी वजह से सदस्यों ने महामंत्री जी व मुझसे वोट डालने वाले 50 व्यक्तियों की सूची मांगी गई, मैंने भी मंत्री जी को पत्र लिखा लेकिन सूची तो दूर की बात है आज तक उन्होनें कोई जवाब न मुझे, न ही माननीय सदस्यों को दिया जिसकी वजह से 2 माह इंतजार करने के बाद कुछ माननीय कार्यकारिणी सदस्य न्यायालय की शरण में चले गये जो कि आज भी न्यायालय में विचाराधीन है।
अध्यक्षजी ने सदन से आव्हान किया कि इसमें मुझे साजिश की बू आ रही है इस पर मनन करें और कोई हल निकालें । सभी के सुझाव आमंत्रित हैं।
1- श्रीमती अलका जैन, आगरा महिला कार्यकारिणी सदस्य यूपी: :- ने कहा कि निर्वाचित होकर आये सदस्यों का अब तक आपसी परिचय भी नहीं हुआ है। महामंत्रीजी की क्या मंशा रही कह नहीं सकते। पदाधिकारियों में समन्वय नहीं है। अध्यक्ष जी को चिंतन कर आगे बढना चाहिये। महासभा को आगे बढाने की सौचें महामंत्री जी से 50 वोटों की सूची बार-बार मांगने पर भी अभी तक नहीं दी है कुछ कमियां तो रही हैं, हमें एक होकर महामंत्री जी को समझाना चाहिये । सद्भावना हेतु एक कमेटी बनाई जावे।
2- सुरेन्द्र जी जैन कार्यकारिणी सदस्य अलवर ग्रामीण :- ने कहा कि मैं पूर्व में भी एक बार कार्यकारिणी में रहा हूँ कार्य करने में आनंद आया किन्तु इस बार पहली मीटिंग में आभास हो गया कि कुछ ठीक नहीं है। पूर्व महामंत्री राजीव जी ने अध्यक्षजी को कहा कि आपको कुछ ज्ञान नहीं है, ऐसा लगा कि महामंत्री महेश जी रिमोट कंट्रोल से चल रहे हैं। महासभा को महाभारत मत बनाओ। पूर्व पदाधिकारी इस संस्था को नहीं चलने देना चाहते। सभी सदस्य चुप बैठे हैं, गुट बना रखा है, महावीरजी मीटिंग में कार्यकारिणी सदस्य श्री सुशील जी ने समन्वय का प्रयास किया किन्तु सब व्यर्थ रहा पुलिस के माध्यम से सदस्यों को रोका गया। स्थिति हस्तिनापुर जैसी बनने वाली है, निराकरण हेतु 10-20 सदस्यों की कमेटी बनाई जावे व महावीरजी की कार्यवाही निरस्त की जावे ।
3- श्री महावीर जी जैन सहसराम कार्यकारिणी सदस्य शेष मध्य प्रदेश :- ने कहा कि मुझे मालूम नहीं था कि ऐसा होगा। महामंत्रीजी से वार्ता हुई कि आप क्या चाहते हो लेकिन लगता है कि महामंत्री जी विवेक शून्य हैं, हैक कर लिए गए हैं। दो पत्र महामंत्री जी को लिखे पर ऐसा लगता है कि यह सारा चुनाव पवन चौधरी ने पूर्व में कर लिया था। खुली पर्ची बांटी व कान में कह दिया पत्र में लिखा कि 40 के 50 वोट क्यों पड़े अध्यक्षजी ने कहा कि वोटिंग विधान के अनुसार नहीं है, कहकर बाहर चले गये। श्री महावीरजी की घटना समाज के हित में अच्छी नहीं है। उस मीटिंग की कार्यवाही निरस्त करें। महासभा को मत बांटो। पूर्व अध्यक्ष व महामंत्री इसके लिए पूर्णतया दोषी हैं परन्तु बदनामी महासभा की हो रही है। 15 वर्षों से महासभा से जुडा हूँ स्थिति विपरीत है परन्तु कन्धे से कन्धा मिलाकर चलने को तैयार हूँ विवाद समाप्त करने के लिए कमेटी बनाई जावे। विवाह सम्मलेन हेतु महेश जी द्वारा मुरैना में मीटिंग की गई पर वहां के शाखा अध्यक्ष, मंत्री व कार्यकारिणी के सदस्यों को नहीं बुलाया गया।
4- श्री मगन जी जैन (अलवर) पूर्व महामंत्री :- ने कहा कि माहौल सोची समझी रणनीति के तहत है जो चुनाव से पहले से ही चल रहा है। पूर्व अध्यक्ष व महामंत्री नहीं चाहते थे कि चुनाव हो हस्तिनापुर में इनके स्तीफे की घोषणा के बाद फिरोजाबाद में स्तीफे स्वीकार किए गए और वहां शरद जी को अध्यक्ष व मुझे महामंत्री बनाया गया व चुनाव हेतु 11 व्यक्तियों की कमेटी बनाई गई जिसने चुनाव करवाया, उसे रोकने की भी बहुत कौशिश की गई। प्रशासन को हस्तिनापुर की फोटो प्रस्तुत कर अनुमति रोकने की कौशिश की गई। चुनाव अधिकारी को धमकाया गया। राजीव रतन जी ने बार-बार अनुरोध करने पर केवल 5 पेपर मेल पर भेजे जिनसे चुनाव कराया गया।  आगरा शाखा के चुनाव में हुई अनियमितताओं के लिए आगरा के लोगों ने महामंत्री को पत्र लिखे पर कोई जवाब नहीं दिया गया। ऐसा ही रहा तो दिल्ली जैसी स्थिति होकर अलग-अलग संस्थाएँ बन जायेंगी। अध्यक्षजी की सज्जनता के कारण कुटिल राजनीति कर उन्हें नीचा दिखाने का प्रयास करते हैं जो पूर्व में स्तीफा देकर भाग गये संस्था का हिस्सा नहीं होने चाहिये ।
5- श्री भागचन्द जी जैन अर्थमंत्री :- ने कहा कि महासभा में ग्रुप बन गए हैं पूर्व महामंत्री द्वारा आज तक बैंक खाता ट्रांसफर पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। राजीव रतन जी द्वारा प्रथम मीटिंग श्री बाड़ा पदमपुराजी में कह दिया गया कि मैं हस्ताक्षर नहीं करूँगा और तुम विधवा सहायता भी नहीं दे सकोगे जिसका मेरे द्वारा विरोध किया गया। हम तीनो पदाधिकारियों के प्रयास से प्रशासनिक स्तर पर एक खाता ट्रांसफर कराया गया है पुरानी रसीद बुकें अब एक वर्ष बाद प्राप्त हुई हैं। महावीरजी मीटिंग में 40 के स्थान पर 50 वोट डालकर बनाये गये विवाह संयोजक कहते हैं कि रसीद बुक हमें दो, हम काटेंगे व हम ही खर्च करेंगे। मुझको कोई जानकारी नहीं दी जाती है व बिना चर्चा के मीटिंग रखी जाती है मुझे सदस्यों जैसा सम्मान भी नहीं दिया जाता है। महावीरजी में हुई असंवैधानिक कार्यवाही निरस्त की जावे व सद्भावना हेतु कमेटी का गठन किया जावे।
6- श्रीमती सुनीता जैन, भरतपुर, राजस्थान से महिला कार्यकारिणी सदस्य :- ने कहा कि पदमपुरा की मीटिंग असभ्य लोगों की सभा जैसी थी अध्यक्ष महामंत्री की सहमति नहीं बनती, महेश जी से कहा कि आप काबिल हैं किन्तु आपने अपना विवेक छोड़ दिया है। 50 लोगों ने मतदान किया उसकी लिस्ट डाली जाये। लोग कहते हैं कि अध्यक्षजी राजनीति नहीं जानते परन्तु मैं कहती हूँ कि राजनीति तो जानते हैं पर कूटनीति नहीं जानते पूर्व अध्यक्ष, अध्यक्ष ही बना रहना चाहते हैं। स्थिति विकट हो गई है छोटा समाज है, सन्देश अच्छा नहीं है । कुटिल नीति की पराकाष्ठा हो गई है। श्री महावीरजी की सभा के निर्णय निरस्त किए जावें और सद्भावना हेतु कमेटी का गठन किया जाये। ऐसा ही रहा तो महासभा के टुकड़े हो जायेंगे। विधवा सहायता का पैसा अन्य मदों पर खर्च नहीं किया जाये। फोड़ा अब नासूर बन चुका है।
7- श्री पवन जी जैन, जयपुर पूर्व राष्ट्रीय संगठन मंत्री :- ने कहा कि श्री महावीरजी की मीटिंग पुलिस कस्टड़ी में की गई, तानाशाही कर रखी है, समाज को समाप्त करना चाहते हैं। अध्यक्ष जी कुछ करना चाहते हैं परन्तु कुछ पूर्व पदाधिकारी इनके पीछे लगे हैं। राजीव रतन जी ने कहा था कि विधवा सहायता का भुगतान नहीं होने दूँगा उनके खिलाफ निन्दा प्रस्ताव पारित किया जाये। गलत तरीके से हुई चुनाव प्रक्रिया को निरस्त किया जावे। दादागिरी समाप्त करें अध्यक्षजी की सहमति के बिना बुलाई गई मीटिंग अवैध है, निरस्त करें चार वर्षों में पूर्व अध्यक्ष, महामंत्री जी ने कुछ नहीं किया। शरद जी व मगन जी को अध्यक्ष व महामंत्री मनोनीत किया गया जिन्होनें सफलता पूर्वक चुनाव सम्पन्न कराये। अब तक सारी मीटिंगों की कार्यवाही निरस्त करें। निन्दा प्रस्ताव पारित करें। विधवा पेंशन से किया गया खर्चा वसूल किया जावे ।
8-श्री मुकेश जी जैन अलीपुर पूर्व कार्यकारिणी सदस्य :- ने कहा कि मंत्री को चलाने वाले और लोग हैं कहते कुछ हैं और करते कुछ हैं। मनमें पाप है जो निकलेगा नहीं ।
9- श्री पारस जी जैन खेडली :- ने कहा कि साजिश नागपुर से चल रही है। इस्तीफे दे दिये स्वीकार कर पद से हटा दिये फिर ऐसा क्या लालच है जो महासभा में बने रहना चाहते हैं। मीटिंग अध्यक्ष की सहमति से ही होनी चाहिये । गत बैठकों को निरस्त करें। पत्रिका की चारों और शिकायत हैं। पत्रिका के पदाधिकारियों को आज ही बदला जावे। विधवा पेंशन रोकने की कहने वालों के खिलाफ निन्दा प्रस्ताव पारित करें। सद्भावना हेतु कमेटी का गठन करें।
10- श्री महावीर जी महवा कार्यकारिणी सदस्य दौसा – सवाईमाधौपुर, करौली :- ने कहा कि महामंत्री जी से 50 वोटों का जवाब बार-बार मांगने पर भी नहीं दिया गया। दो महिने इंतजार के बाद न्यायालय में जाना पड़ा। सहमंत्री साले को बनाया, समाज में ऐसी राजनीति मत करो, श्री महावरीजी व सोनागिरजी दोनों की मीटिंग कार्यवाही निरस्त हो व कमेटी का गठन किया जाये।
11- श्री निर्मल जी जैन आगरा :- ने कहा कि महामंत्री गलत कार्य कर रहे हैं। पूर्व के 4 पदाधिकारी व एक और बढकर पांच हो गये हैं ये कार्य नहीं करने देना चाहते गत निर्णय निरस्त किए जावें। आगरा की नवगठित दक्षिण पश्चिम शाखा को मान्यता प्रदान की जावे। आगरा शाखा ने छह वर्ष तक चुनाव नहीं कराये। पूर्व अध्यक्ष मंत्री को पत्र लिखे पूर्व अध्यक्ष मंत्री क्यों रहना चाहते हैं आप समझ गए होंगे, दोनों मीटिंग निरस्त कर आगे की कार्यवाही करें।
12- श्री महावीर प्रसाद जी जैन एडवोकेट मथुरा :- ने कहा कि अध्यक्ष को संविधान अनुसार निर्णय करने का पूरा अधिकार है उनकी सहमति से ही मीटिंग बुलाई जा सकती है। कमेटी बनाई जावे। दोनों पक्षों को बुलाकर संविधान अनुसार निर्णय करें। अधिवेशन बुलाया जावे। अधिवेशन / प्रतिनिधि सम्मेलन को ही चुने हुए पदाधिकारियों को निष्कासित करने का अधिकार है।
13- श्री राकेश जी बजाज, आगरा कार्यकारिणी सदस्य : ने कहा कि कहीं न कहीं गडबड है, चुनाव नहीं करा पाये बाद में जिन्होनें चुनाव कराये वो साधुवाद के पात्र हैं उनकी पीठ थपथपानी चाहिये। महासभा को राजनीति नहीं समाज के उत्थान का काम करना चाहिये। नये व्यक्ति को अवसर मिलना चाहिये। क्या पदाधिकारियों को पदाधिकारी नहीं मानना चाहिये। सभा को व्यवस्थित करने के लिए सभापति को सभापति मानना पडेगा । घटनाक्रम उचित नहीं है। पदाधिकारियों के लिए असभ्य भाषा का इस्तेमाल होता रहा। महामंत्री से प्रश्न पूछा लेकिन 3 मिनिट का जवाब नहीं दे पाये । अध्यक्ष द्वारा सद्भावना बैठक बुलाई, मन गदगद हुआ, कहीं से तो शुरूआत हुई। पूर्व अध्यक्ष श्री संघई साहब बुलाये गये जो निष्पक्ष हैं क्या हम तीनों को नहीं बैठा सकते। एक बार सामंजस्य का प्रयास करें, कमेटी बनाई जावे।
14- श्री श्रीचंद जी जैन जयपुर पूर्व महामंत्री ने कहा कि दुर्भाग्य नागपुर में नामांकन से प्रारंभ हुआ, विधान अनुरूप चलते तो विवाद नहीं होते । पदाधिकारी विधान को पढ़ते नहीं है, इसलिए उन्हे विधान का ज्ञान नहीं होता है।
15 (2) में स्पष्ट है कि नवनिर्वाचित पदाधिकारी व नव निर्वाचित सदस्य ही शेष पदाधिकारियों जैसे वरिष्ठ उपाध्यक्ष वगैरा व सदस्यों का चयन / मनोनयन बहुमत के आधार पर करेगें।
18 (1) में स्पष्ट है कि अध्यक्ष की सहमति से महामंत्री जी मीटिंग बुलायेंगे, स्वतंत्र रूप से महामंत्री को कार्यकारिणी की बैठक बुलाने का अधिकार नहीं है। कोर्ट केस करने पर सदस्यों को नोटिस देना उचित नहीं है, पूर्व में भी सन 2004 में भरतपुर में, उससे पूर्व जयपुर में, पिछली कार्यकारिणी में आगरा में महासभा पर कोर्ट केस हुए हैं। पत्रिका में भी पक्षपात पूर्ण रवैया है। अध्यक्ष को नजर अंदाज किया जाता है, पत्रिका पदाधिकारी निष्पक्ष होने चाहिए। पूर्व पदाधिकारी इतनी फजीहत होने के बाद भी क्यों मनोनीत होना चाहते हैं। श्री मगनजी द्वारा महासभा के चुनाव अच्छे एवं व्यवस्थित ढंग से कराये गये, जो प्रशसनीय है। उनकी सेवाओं का उपयोग किया जाना चाहिए । पूर्व के चार वर्षों के कार्यकाल में केवल एक दो जोड़े का सामुहिक विवाह ही कराया गया। पूर्व कार्यकारिणी की उपलब्धी नगण्य है। विधान की घोर अवहेलना होने के कारण महावीरजी की मीटिंग की कार्यवाही रद्द की जानी चाहिए। समाज के गणमान्य व्यक्तियों की कमेटी बनाकर समन्वय का प्रयास किया जाना चाहिए। अध्यक्ष संस्था का प्रमुख (हैड ) होता है अगर अध्यक्ष को पावर नही होगी तो किसे होगी, विधान अनुसार महासभा की सभी गतिविधियों की देखभाल का | दायित्व अध्यक्ष का होता है। आप अच्छे कार्य करें पूरा सदन आपके साथ है
15- श्री विमल जी जैन महवा पूर्व महामंत्री :- ने कहा कि पूर्व वक्ताओं ने विधिक स्थिति स्पष्ट करदी है। कुछ लोगों को पदों से लगाव हो चुका है वो महासभा को समाप्त करना चाहते हैं। आप अपने विवेक से कार्य करें व्यवधान डालने वाले सफल नहीं होंगे। पूर्व में भी कोर्ट केस हुए हैं जो कार्यवाही विधान सम्मत नहीं है निरस्त हो। एक कमेटी बनाकर विवाद समाप्ती का प्रयास करें।
16- श्री राजेश जी जैन आगरा : ने कहा कि विवाद का कारण चुनावी प्रक्रिया ठीक नहीं थी उसमें बदलाव हो। बिना कुछ किये पदेन क्यों रहना चाहते हैं समाज नहीं चाहे तो नहीं आना चाहिये ।
17- श्री पदम जी जैन गंगापुर पूर्व कार्यकारिणी सदस्य :- ने कहा कि यदि कोई समाज के काम में रोडा लगाता है उसके विरूद्ध कार्यवाही करें अध्यक्ष की भावना है कुछ करने की उनका साथ दें।
18- श्री शिखर जी जैन सिंघई, आगरा पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष :- समाज ने बहुत से साधू दिए हैं उनके चरणों में नमोस्तु । 20 वर्षों में समाज ने बहुत उन्नती की है, हमने यू ट्यूब पर देखा कि महेश जी की बहुत तारीफ चलती है, मैंने सोचा इनका सम्मान होना चाहिये, चुनाव में मेरी मुलाकात त्रिलोक जी से भी हुई उन्होनें कहा कि हम सभी कार्य करेंगे, त्रिलोक जी सीधे हैं, 4 व्यक्तियों के पीछे महासभा बदनाम हो रही है सोच नकारात्मक है तो कुछ नहीं होगा, मन बड़ा रखो, जितना समय मिला है उसका सदुपयोग कर समाजहित में कार्य करें, अपने मन में समता भाव रखें।
19- श्री महावीरजी जैन कार्यकारिणी सदस्य शेष मध्य-प्रदेश :- ने कहा कि आगरा की पश्चिम दक्षिण नवगठित शाखा को स्वीकृति प्रदान करें। आगरा शाखा से पैसे लेकर रसीद दी जावे। पूर्व महामंत्री के प्रति निन्दा प्रस्ताव लाया जावे। गत मीटिंग में हुए व्यय की वसूली की जावे। महावीरजी मीटिंग की कार्यवाही निरस्त की जावे ।
20- श्री सुभाष जी जैन पालम :- ने कहा कि राजीव रतनजी ने हस्तिनापुर में कहा कि 10 वर्ष भी इलेक्शन नही होने दूँगा ।
21 – श्री भागचंद जी जैन अर्थमंत्री ने कहा कि यूपी से महिला सदस्य का एक पद रिक्त है उस पर आगरा के लोगों ने श्रीमती जयन्ती जैन का नाम सर्वसम्मति से रखा है। पत्रिका संयोजक के लिए श्री राजेन्द्र जी जयपुर पूर्व अध्यक्ष शाखा ( लक्ष्मणगढ वाले) व सम्पादक श्री प्रकाशचन्द जी को भी बनाये रखने पर सदन में सहमति है तथा पत्रिका में सलाहकार अनुपम जैन व अर्थ संयोजक श्री महेश जैन व सह संपादक श्री पारस जी गहनोली के नाम पत्रिका से हटाये जायें। यह संवैधानिक पद नहीं हैं। तथा अर्थमंत्री जी ने कहा कि विधवा सहायता के पैसे जो खर्च किए गए उनको महेश जी महामंत्री व पूर्व महामंत्री राजीव रतन ने चन्दा उगाकर देने की बात कही थी। यदि नहीं दिये तो ये पैसे महामंत्री के नाम निकाल दिये जायेंगे मैं ऐसा सदन को विश्वास दिलाता हूँ आगरा की नवगठित शाखा दक्षिण-पश्चिम ने विधवा सहायता में 51000/- रूपये देने की घोषणा की जिसकी समस्त सदन द्वारा अनुमोदना की गई।

अंत में सर्वसम्मति से सदन में निम्न निर्णय किए गए
1-अतिशय क्षेत्र श्री महावीरजी व सोनागिरी जी की मीटिंग की कार्यवाही निरस्त की जाती है।
2-पत्रिका संयोजक पद पर चन्द्रशेखर जी का इस्तीफा स्वीकार कर राजेन्द्र जी पूर्व शाखा अध्यक्ष जयपुर ( लक्ष्मणगढ वाले) को मनोनीत किया गया व सम्पादक श्री प्रकाशचंद जी का स्तीफा अस्वीकार कर दुबारा मनोनीत किया गया।
3-आगरा की पश्चिम दक्षिण नवगठित शाखा को महासभा की दिल्ली की तरह नई शाखा माना जावे।
4-पूर्व महामंत्री राजीव रतन का निन्दा प्रस्ताव पारित किया गया।
5-सद्भावना कमेटी बनाई गई जो एक माह में दोनों पक्षों से बात कर अपना निर्णय सुनायेगी

कमेटी निम्न प्रकार है :-
1- अध्यक्ष श्री शिखरचंद जी सिंघई पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष
2- सदस्य श्री शेखर जी जयपुर पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष
3- सदस्य श्री देवकीनंदन जी महवा पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष
4- सदस्य श्री श्रीचंद जी, जयपुर पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री
5- सदस्य श्री रमेशचंद जी पल्लीवाल जयपुर पूर्व रा. महामंत्री
6- सदस्य श्री विमल जी महवा, पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री
7- सदस्य श्री मगनजी , अलवर , पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री
8- सदस्य श्री ज्ञानचंद जी जयपुर, पूर्व राष्ट्रीय अर्थमंत्री
9- सदस्य श्री पवन जी, जयपुर, पूर्व राष्ट्रीय संगठन मंत्री

नोट – श्री राकेश जैन बजाज, आगरा कार्यकारिणी सदस्य अध्यक्ष श्री सिंघई जी के सहायक के रूप में रहेंगे। इसके अलावा भी श्री देवेन्द्र जैन एडवोकेट अलवर, श्री सुभाष जैन पालम, श्री राजेन्द्र जैन (लक्ष्मणगढ वाले) जयपुर, श्री मुकेश जैन (अलीपुर वाले) जयपुर ये नाम भी और आये थे, परन्तु कमेटी के अध्यक्ष श्री सिंघई जी के निर्देशानुसार केवल पूर्व पदाधिकारीयों के नाम ही कमेटी में शामिल किये गये है।
6-पत्रिका सलाहकार श्री अनुपम जैन, अर्थ संयोजक श्री महेश जैन व सहसंपादक श्री पारस जी गहनोली का नाम आगामी पत्रिका में प्रकाशित नहीं किए जायें।
7-उत्तर प्रदेश महिला सदस्य के रिक्त पद पर श्रीमती जयंती जैन आगरा का मनोनयन किया गया।
8-सद्भावना कमेटी के निर्णय के बाद कार्यकारिणी की मीटिंग अथवा आमसभा/प्रतिनिधि सभा जैसी भी स्थिति होगी बैठक बुलाई जायेगी।
9-भविष्य में अध्यक्ष की सहमति के बिना बुलाई गई मीटिंग अवैध मानी जावेगी ।

धन्यवाद के बाद मीटिंग समाप्त हुई ।

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