श्री पल्लीवाल जैन डिजिटल पत्रिका

अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा

(पल्लीवाल, जैसवाल, सैलवाल सम्बंधित जैन समाज)

महामंत्री की कलम से..

सादर जयजिनेन्द्र,
श्री पल्लीवाल जैन पत्रिका का 25 सितम्बर 2024 के अंक में जिस प्रकार मेरे बारे में और जयपुर शाखा की जमीन के सम्बन्ध में छापा गया है, इससे पूर्व महामंत्री श्री महेश जी की बौखलाहट साफ नजर आ रही है। पूर्व महामंत्री जी द्वारा पदमुक्त होने के बाद जिस प्रकार आनन-फानन में 30 अगस्त 2024 को मथुरा के भव्य होटल में अवैध मीटिंग बुलाई गई और जो प्रतिक्रियायें व्यक्त की गई इससे यह तो स्पष्ट है कि 25-26 अगस्त, 2024 को अलवर में आयोजित साधारण सभा / प्रतिनिधि सम्मेलन में प्रतिनिधि सभा द्वारा लिये गये निर्णय बिल्कुल सही है। इनको पता है कि साधारण सभा / प्रतिनिधि सम्मेलन कार्यकारिणी से बड़े है, इसमें लिये गये प्रत्येक निर्णय प्रतिनिधि सभा के द्वारा लिये जाते है और ये वही प्रतिनिधि सभा है जो महासभा के पदाधिकारियों और कार्यकारिणी को चुनती है। विधान के अनुसार भी कार्यकारिणी से बड़ी साधारण सभा / प्रतिनिधि सभा होती है और इसमें लिये गये निर्णय सर्वोपरि होते हैं।
बधुओं, अलवर में आयोजित सम्मेलन में पूरे भारत के पल्लीवाल क्षेत्रों से समाज के लगभग 2500 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस अधिवेशन की सफलता की गूंज पल्लीवाल पत्रिका के 25 सितम्बर 2024 के अंक में साफ दिखाई दे रही है। पूर्व महामंत्री श्री महेश जी ने महासभा के पूर्व महामंत्री श्री राजीव रतन जी व श्री ओम प्रकाश जी वकील साहब को ढ़ाल बनाते हुए अपने खास लोगों को बुलाकर मेरे प्रति व्यक्तिगत द्वेष भावना के कारण इस अधिवेशन की सफलता और प्रतिनिधि सभा के द्वारा लिये गये निर्णय से डर कर ही इस अधिवेशन को मुझसे और जयपुर शाखा जमीन से जोड़ दिया गया। सितम्बर माह की पत्रिका से यह प्रतीत हो रहा है कि पूर्व महामंत्री श्री महेश जी का एक ही नारा है “ना तो मैं काम करूंगा, ना करने दूंगा” और “महासभा को खत्म करके रहूंगा।” बन्धुओं ये सब कुछ आपके सामने है इनकी मंशा आप समझ रहे होंगे। मेरे प्रति ये कितने भी षड़यंत्र रखे, चाहे कितनी भी झूठी बातें मेरे खिलाफ पल्लीवाल पत्रिका में प्रकाशित करें। मैं आप सभी को विश्वास दिलाता हूँ कि समाज ने जिन अपेक्षाओं के साथ मुझे चुना है, उन अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए मैं हर सम्भव प्रयास करूंगा । मैं हमेशा समाज हित में कार्य करता रहूँगा ।
बन्धुओं महासभा के चुनावों से पहले श्री महेश जी ने अपना चुनाव पूर्व अध्यक्ष श्री आर.सी. जैन साहब और महामंत्री श्री राजीव रतन जैन के विरोध में लड़ कर महामंत्री पद हासिल किया था किन्तु चुनाव जीत कर कार्यकारिणी में अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिए ये इनसे मिल गये कार्यकारिणी की प्रथम मिटिंग में इन्होंने विधान के विरूद्ध जाकर राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री त्रिलोक चन्द जी के मना करने के वाबजूद उनको अन्धेरे में रखकर हठधर्मिता पूर्वक इनको बुलाया और पूरी कार्यकारिणी में अपना वर्चस्व स्थापित कर अध्यक्ष और अर्थमंत्री के पद की गरिमा को खत्म करने में लग गये। लगभग दो साल के कार्यकाल में श्री महेश जी ने ग्रुपिंज्म के अलावा कोई भी समाज हित का कार्य नहीं किया हैं। हां अमृत महोत्सव के नाम पर समाज को कंचे और गिली डण्डा जरूर खिलवा रहे हैं। अमृत महोत्सव के नाम पर शाखाओं को होली मिलन, क्षमावाणी पर्व और दीपावली मिलन समारोह आयोजित करने हेतु कहा गया जो कि सभी शाखाएं वर्षों से आयोजित करती आ रही है, उसका श्रेय भी खुद ले रहे हैं। इसके अलावा आज तक समाज हित का एक भी कार्य नहीं किया गया बल्कि समाज हित के कार्यों में गतिरोध जरूर उत्पन्न कर रहे है। श्री महेश जी और पूर्व महामंत्री श्री राजीव रतन जी द्वारा विधवा सहायता में हमेशा अवरोध उत्पन्न किये गये। समाज विरोधी गतिविधियों के कारण ही अलवर सम्मेलन में उपस्थित सम्पूर्ण पल्लीवाल क्षेत्र से पधारे प्रतिनिधियों द्वारा इनको महामंत्री पद से हटाया गया। इतने बड़े जनादेश के बावजूद भी इनकी कार्यशैली और हव्धर्मिता में कोई सुधार नहीं आया। पद के हटाने के बाद भी इनकी समाज विरोधी गतिविधियाँ लगातार जारी है, बैंक में गलत सूचना लिखित में देकर महासभा के खाते से एफडी तुड़वाकर समस्त राशि निकालना, माताओं और बहनों की पेंशन राशि के चैक डिशऑनर करवाना जैसे कई उदाहरण है और इनका झूठ तो आपके समक्ष इनकी कहानी, इनकी जुबानी” है जो इस प्रकार है-

सर्वप्रथम इस सितम्बर माह की पल्लीवाल पत्रिका में महामंत्री की कलम से शीर्षक के अपने लेख में यह लिखा है कि “पूरी चर्चा के दौरान पूर्व अध्यक्ष श्री त्रिलोक चन्द जी- |
श्री महेश जी के द्वारा पत्रिका में इतना बड़ा झूठ प्रकाशित करवाने से पहले ये भूल गये कि जब हस्तिनापुर पूरा समाज शर्मसार हुआ था तब इन्होंने जो पत्र लिखा था उसमें इन्होंने श्री आर.सी. जैन साहब और राजीव रतन जी के लिए लिखा था कि- “समाज इनको कभी माफ नहीं करेगा और बार-बार चुनाव रद्द करने से समाज का जो करोड़ों रूपया और समय बरबाद हुआ उसके लिए निश्चित रूप से श्री आर.सी. जैन और श्री राजीव रतन जैन दोषी हैं। ये गैर जिम्मेदाराना रवैया अपनाते हुए त्यागपत्र देकर समाज को दोराहे पर छोड़ कर भाग खड़े हुए इससे पूरा समाज अचम्मित हो गया। ये फिर अपने कुतर्क पल्लीवाल पत्रिका में प्रकाशित करवाकर अपने आप को सही साबित करेंगें। हमें ऐसे लोगों से अब सावधान रहने की जरूरत है। इनके इस कृत्य के लिए समाज तो इन्हें सबक सीखा ही देगा साथ ही इन्हें कम से कम 10 साल के लिए महासभा के साथ-साथ समाज से भी बहिष्कृत किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी अध्यक्ष और महामंत्री समाज के साथ दुबारा इस प्रकार का कृत्य करने की हिम्मत नहीं करें। समाज को भी यह सबक लेना चाहिए कि भविष्य में योग्य, अनुभवी एवं कुशल नेतृत्व वाले व्यक्तियों के हाथों में ही समाज की बागडोर सौंपे ताकि बाद में सम्पूर्ण समाज को शर्मिन्दा न होना पड़े।”
बधुओं ये वही महेश जी है जो एक तरफ तो श्री आर.सी. जैन साहब और श्री राजीव रतन जी को महासभा से ही नहीं बल्कि समाज से भी 10 साल के लिए बहिष्कृत करने की बात करते है वहीं दूसरी तरफ इनसे मिलकर मेरे और जयपुर शाखा की जमीन के खिलाफ षड़यंत्र रच रहे हैं और पूर्व अध्यक्ष और महामंत्री जी की तरह ही पल्लीवाल पत्रिका को हाईजैक कर अपने कुतर्क प्रकाशित करवा रहे हैं। मैं राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री त्रिलोक जी से पहले कभी परिचित ही नहीं था। महासभा चुनावों के दौरान ही इनसे मेरा परिचय हुआ इसलिए मेरा इनसे मिला हुआ होने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता क्योंकि जमीन का कार्य जयपुर शाखा की वर्ष 2016-18 की कार्यकारिणी द्वारा प्रारम्भ किया गया और इसके बाद की कार्यकारिणी के अध्यक्ष श्री राजेन्द्र कुमार जैन, कैमरी की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ उसके भी दो साल बाद यह मुद्दा महासभा के पूर्व अध्यक्ष श्री आर.सी. जैन साहब के कार्यकाल में श्री अनिल बीएसएनएल और पत्रिका संयोजक श्री चन्द्र शेखर जैन की मिली भगत से 25 मई जून 2021 की पत्रिका में प्रकाशित एक लेख के माध्यम से छेड़ा गया। इन सभी के द्वारा इस मुद्दे को सिर्फ और सिर्फ अपनी साख बचाने के लिए पुनः उठाया जा रहा है। इसलिए श्रीमान् महेश जी आप स्वयं हस्तिनापुर के दोषी एवं जयपुर शाखा जमीन को विवादास्पद बनाने वाले लोगों से मिले हुए है।
इसी कड़ी में पत्रिका में श्री ओम प्रकाश जी के पत्र का भी जिक्र श्री महेश द्वारा किया गया है और उनका पत्र भी प्रकाशित किया गया है। यह पत्र एक प्रकार से जांच रिपोर्ट के रूप में प्रस्तुत किया गया है, वो भी जमीन का कार्य सम्पन्न होने के पांच साल बाद यह बहुत ही हास्यास्पद है कि भूतपूर्व अध्यक्ष जी द्वारा पूर्व में ही खुद के परिचितों की दो-दो जांच कमेटी बना कर खुद की मंशा के अनुरूप रिपोर्ट लेने के बाद अब श्री महेश जी द्वारा फिर से तीसरी कमेटी का गठन किया गया है और इस कमेटी में खुद भी शामिल हो गये। इसके बाद भी श्री ओमप्रकाश जी की जांच बाकी रह गई उसको भी इस पत्रिका में प्रकाशित किया गया। पिछले पांच साल में पूरे भारत का पल्लीवाल समाज और विशेषकर जयपुर शाखा पल्लीवाल समाज एवं इस स्कीम के प्लॉट होल्डर्स की समझ में अभी तक यह नहीं आया कि इतनी जांच के बाद भी ये अभी तक घोटाले को साबित क्यों नहीं कर पाये ? जबकि इस पत्रिका में श्री महेश जी ने भी जमीन घोटाले शब्द का उपयोग कई बार किया है।
बन्धुओं, जयपुर शाखा को प्राप्त इस जमीन पर वर्तमान शाखा कार्यकारिणी द्वारा मार्च 2023 में होली मिलन समारोह आयोजित किया गया था। इस समारोह में सभी प्लॉट होल्डर्स का महासभा की नवनिर्वाचित राष्ट्रीय कार्यकारिणी का भी सम्मान किया गया था। इस कार्यक्रम में श्री महेश जी का नवनिर्वाचित महामंत्री के रूप में जयपुर शाखा द्वारा सम्मान किया गया था। उस समय श्री महेश जी ने स्वयं जमीन को देखा था और कहा था कि जमीन बहुत अच्छी है, चारों ओर बाऊण्ड्री वाल बनी हुई है, बड़ा बोरिंग किया हुआ है। इस पर जयपुर शाखा को बड़ा भवन बनाने की प्लानिंग करनी चाहिए। इसमें मुझे से और महासभा द्वारा जो भी सहयोग बन पड़ेगा वो हम करेंगे। इस प्रकार उस समय श्री महेश जी के द्वारा जमीन की प्रशंसा की गई और अब ऐसा क्या हुआ कि लगभग डेढ़ साल बाद अचानक इनको इस जमीन में घोटाला नजर आने लगा ? इतना ही नहीं बल्कि ये पूर्व पदाधिकारियों के साथ मिल कर इनके सुनियोजित पड़यंत्र में शामिल हो गये ।
बस्धुओं जयपुर शाखा को प्राप्त निःशुल्क चार हजार वर्ग गज जमीन के सम्बन्ध में कार्यकारिणी एवं जयपुर पल्लीवाल समाज द्वारा किये गये कार्यो का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है-
1. यह जमीन जयपुर शाखा कार्यकारिणी और जयपुर समाज के लोगों के अथक प्रयासों से प्राप्त हुई है। 2. यह चार हजार वर्ग गज जमीन प्लॉट होल्डर्स द्वारा खरीदे गये भूखण्ड़ों की एवज में जयपुर शाखा को निःशुल्क उपहार स्वरूप प्राप्त हुई है।
3. इस जमीन के लिए महासभा द्वारा किसी भी प्रकार का सहयोग अथवा प्रयास नहीं किया गया है न ही किसी प्रकार की राशि का सहयोग किया गया है। जमीन निःशुल्क प्राप्त हुई है इसलिए इसमें किसी भी व्यक्ति के द्वारा कोई राशि नहीं दी गई है।
4. इस पूरे प्रकरण में जयपुर शाखा श्री पारस चन्द जैन अथवा अन्य किसी भी व्यक्ति के द्वारा पैसों का कोई लेनदेन नहीं किया गया है।
5. प्लॉट होल्डर्स द्वारा इकरारनामा सीधे बिल्डर से किया गया था। रूपयों का लेनदेन भी प्लॉट होल्डर्स और बिल्डर के मध्य हुआ है जिसकी रसीद भी बिल्डर के द्वारा प्लॉट होल्डर्स को दी गई है इसलिए गबन या घोटाला तो किसी भी परिस्थिति में होने का सवाल ही पैदा नहीं होता ।
६. वर्ष 2016-18 की तत्कालीन कार्यकारिणी और जमीन समिति के निर्णयानुसार और अन्तिम एमओयू के अनुसार इस जमीन का जेडीए पट्टा बिल्डर के द्वारा स्वयं के खर्चे पर दिया जाना था किन्तु इस कार्यकारिणी का कार्यकाल समाप्त होने के बाद नयी कार्यकारिणी वर्ष 2018-22 के द्वारा यह कार्य पूर्ण किया जाना था। नयी कार्यकारिणी द्वारा कुल बुक हुए भूखण्ड़ों में से सिर्फ कुछ भूखण्ड़ों का पैसा ही बुकिंगकर्ता से बिल्डर को दिलवाने थे किन्तु सितम्बर 2018 से लेकर सितम्बर 2019 अर्थात् पूरे एक साल में भी अधिक समय में नयी कार्यकारिणी द्वारा बचा हुआ मात्र कुछ प्रतिशत कार्य को भी पूरा नहीं कर पायी जबकि सामाजिक कार्यों में जब पुरानी कार्यकारिणी का कार्यकाल समाप्त हो जाता है तो बचे हुए कार्य की जिम्मेदारी आने वाली नयी कार्यकारिणी की होती है। श्री राजेन्द्र कुमार जैन, कैमरी के द्वारा कार्य को पूरा करने के बजाए उसी स्टेज पर बन्द कर 14 अक्टूबर, 2019 को इस जमीन की रजिस्ट्री करवायी गई।
7. तत्कालीन शाखा अध्यक्ष और मंत्री श्री राजेन्द्र कुमार जैन कैमरी और श्री देवेन्द्र कुमार जैन ने चुनाव के समय अपने घोषणा पत्र में भी समाज से वादा किया था कि इस कार्य को पूरा कर चार हजार वर्ग गज जमीन का जेडीए पट्टा उनके द्वारा समाज को दिलवाया जायेगा। इतना ही नहीं इन्होंने तो यह वादा भी किया था कि हम इस जमीन पर जेडीए से नक्शा पास करवाकर बड़े पल्लीवाल भवन का शिलान्यास करवायेंगे। साथ ही इन्होंने यह भी लिखा है कि वर्तमान पल्लीवाल भवन मानसरोवर की खाली जमीन पर बड़ा हॉल बनवायेंगे। यह सब इनके घोषणा पत्र का प्रथम और मुख्य बिन्दू है।
8. श्री राजेन्द्र कुमार जैन कैमरी और श्री देवेन्द्र कुमार जैन अपने इसी मुख्य वादे के कारण समाज का विश्वास जीत पाये और चुनाव जीतकर तत्कालीन अध्यक्ष और मंत्री पद पर आसीन हुए ।
9. इस प्रकार अपने वायदे के अनुसार और तत्कालीन शाखा अध्यक्ष और मंत्री होने के नाते एवं आखिरी एमओयू की शर्तों के अनुसार इस चार हजार वर्ग गज जमीन के जेडीए पट्टे की जिम्मेदारी भी निश्चित रूप श्री राजेन्द्र जी कैमरी और श्री देवेन्द्र जी की थी. जिसे ये पूरा नही कर पाये।
10. जमीन का जेडीए पट्टा नहीं मिलने का एक कारण यह भी रहा कि मात्र सात प्लॉटों के बुकिंगकर्ताओं के द्वारा राशि बिल्डर को जमा नहीं करवाने के कारण बिल्डर द्वारा जेडीए पट्टा नहीं दिया गया। उन सात बुकिंगकर्ताओं में से एक पूर्व महामंत्री श्री महेश जी भी थे। अतः जेडीए पट्टे के जितने दोषी तत्कालीन अध्यक्ष श्री राजेन्द्र कुमार जैन कैमेरी और मंत्री श्री देवेन्द्र कुमार जैन है उतने ही दोषी श्री महेश जी भी है।
11. जमीन के सम्बन्ध में किसी की कोई भी शिकायत शाखा की किसी भी कार्यकारिणी को आज तक भी प्राप्त नहीं हुई है। इस सम्बन्ध में कोई भी विवाद कभी भी शाखा में नहीं था फिर भी यदि श्री अनिल कुमार जैन, बीएसएनएल को कोई शिकायत थी तो पहले तत्कालीन जयपुर शाखा कार्यकारिणी को देनी चाहिए था। यदि जयपुर शाखा कार्यकारिणी में इसका निपटारा नहीं होता तब महासभा को हस्तक्षेप करना चाहिए था।
12. जयपुर शाखा द्वारा तत्कालीन महासभा अध्यक्ष और महामंत्री जी के लिखे गये तीन पत्रों को इनके द्वारा षड़यंत्र के तहत महासभा की किसी भी मीटिंग की कार्यवाही में नहीं रखना एवं कार्यकारिणी सदस्यों से छुपाना निश्चित रूप से जयपुर शाखा और मेरे विरूद्ध षड़यंत्र था ।
13. जमीन से सम्बन्धित समस्त कार्य भी जयपुर शाखा द्वारा किया गया है। इसलिए इसकी समस्त जिम्मेदारी भी जयपुर शाखा की है, न कि महासभा की। अतः इससे सम्बन्धित यदि कोई विवाद होता तो उसका निपटारा भी जयपुर शाखा के द्वारा ही किया जाता न कि महासभा के द्वारा यदि श्री महेश जी को इतनी ही विन्ता है और महेश जी जयपुर शाखा के इतने बड़े हितैषी है तो श्री राजेन्द्र कुमार जैन, कैमरी और श्री देवेन्द्र कुमार जैन और स्वयं की गलती से जो जेडीए पट्टा शाखा को प्राप्त नहीं हो पाया वो जेडीए पट्टा जयपुर शाखा को दिलवा दें और इस पर होने वाले व्यय की भरपाई भी ये और इस जमीन के हितैषी मिलकर कर दें।
14. महासभा के भूतपूर्व अध्यक्ष श्री आर.सी. जैन साहब द्वारा बार-बार यह कहना कि श्री पारस जी द्वारा पल्लीवाल पत्रिका संयोजक को दिया गया लीगल नोटिस को पहले वापस लें अन्यथा कार्यकारिणी के निर्णयानुसार आगे की कार्यवाही की जायेगी मेरे द्वारा कितनी ही बार श्री आर.सी. जैन साहब को मौखिक रूप से और लिखित में यह कहा गया कि मेरे द्वारा आज तक भी पत्रिका संयोजक को कोई लीगल नोटिस नहीं दिया गया है फिर भी यदि आपके पास है तो उसे दिखायें लेकिन भूतपूर्व महासभा अध्यक्ष और महामंत्री जी के द्वारा मेरी बातों को और मेरे व जयपुर शाखा के पत्रों को पूर्व सुनियोजित पड़यंत्र के तहत हमेशा अनसुना करते रहे और इसे न ही कभी महासभा को किसी भी मीटिंग की कार्यवाही में लिया गया और झूठ को पल्लीवाल पत्रिका में प्रकाशित कर समाज को भ्रमित करते रहे।
15. इतना ही नहीं, मुझे बदनाम करने के लिए षड़यंत्र के तहत शाखा रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की गई। मेरे कार्यकाल की मीटिंगों के कार्यवाही विवरणों में सालों बाद तत्कालीन मंत्री श्री देवेन्द्र कुमार जैन के कार्यकाल में मेरे प्रतिकूल टिप्पणियां अंकित करवायी गई और उन प्रतिकूल टिप्पणियों को समाज को गुमराह करने के लिए पल्लीवाल पत्रिका में प्रकाशित भी किया गया। इस सम्बन्ध में तत्कालीन शाखा मंत्री श्री देवेन्द्र कुमार जैन का पत्र आज भी शाखा रिकॉर्ड में सुरक्षित है।
शाखा की जमीन की रजिस्ट्री 14 अक्टूबर 2019 को हुई। इसके पश्चात् श्री पल्लीवाल जैन पत्रिका के संयोजक श्री चन्द्र शेखर जी जैन द्वारा 25 अक्टूबर 2019 की पत्रिका में संयोजक की कलम से बधाई संदेश दिया गया. “पल्लीवाल जैन समाज के लिए यह माह अत्यन्त खुशी भरा रहा है जहाँ अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा शाखा जयपुर के नाम से रॉयल जैन सिटी में 4000 वर्गगज के एक और भूखण्ड की रजिस्ट्री सम्पन्न हुई जिसके चारों ओर बाउण्ड्री वाल एवं बोरिंग लगा हुआ है। वर्तमान शाखा भवन वैसे तो शहर के मध्य ही आता है लेकिन समाज के विकास के साथ-साथ परिवारों की संख्या में वृद्धि होने के कारण भवन कुछ कार्यक्रमों हेतु अत्यन्त छोटा महसूस होता था। जिसकी पूर्ति इस भूखण्ड के माध्यम से पूरी की जा सकेगी। अब आगे वह निर्भर करता है कि शाखा का नेतृत्व इस कार्य को किस सोच एवं स्थायित्व के साथ भविष्य का प्लान बनाता है। इस सम्पन्न हुये कार्य के लिए शाखा की पूर्व एवं वर्तमान कार्यकारिणी के साथ भूखण्ड हेतु गठित सम्पूर्ण टीम बहुत-बहुत बधाई की पात्र है।”
बधुओं, यही संयोजक महोदय द्वारा एक तरफ तो प्रशंसा कर इस कार्य को सही साबित कर रहे है वहीं दूसरी तरफ दो साल बाद मिली भगत कर एक षड़यंत्र के तहत श्री अनिल जैन, बीएसएनएल के पत्र को प्रकाशित कर सिर्फ और सिर्फ मुझे दोषी सिद्ध कर रहे हैं।
बन्धुओं, जयपुर शाखा 2016-18 की कार्यकारिणी में मुझे मंत्रीपद पर सेवा करने का मौका मिला। पूरी कार्यकारिणी एवं अध्यक्ष महोदय का एक ही सपना था कि समाज के विस्तार और जनसंख्या को देखते हुए वर्तमान भवन बहुत ही छोटा लगने लगा है। कोई भी कार्यक्रम करने पर समाज के बन्धु इसमें एक साथ नहीं बैठ पाते है। अतः भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए बड़ा भवन होना चाहिए। जयपुर शाखा में लगभग 10 वर्षो से बड़े भवन पर मंथन चल रहा था। जयपुर शाखा 2014-16 की कार्यकारिणी में पूर्व अध्यक्ष श्री राजेन्द्र कुमार जी जैन लक्ष्मणगढ़ की अध्यक्षता में इसी तरह का प्रोजेक्ट पर कार्य किया गया था जिसमें एक कमेटी बनाई गई थी। उस
कमेटी में श्री आर. सी. जैन साहब श्री ओम प्रकाश जी वकील साहब मैं स्वयं एवं समाज के अन्य वरिष्ठ व्यक्तियों को सदस्य के रूप में शामिल किया गया था। प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद पदमपुरा में जमीन चिन्हित की गई और लगभग सब कुछ फाईनल हो गया था। उस प्रोजेक्ट में समाज को चार बीघा जमीन प्राप्त हो रही थी। उसके बाद जमीन समिति के एक मीटिंग में श्री आर.सी. जैन साहब द्वारा बोला गया कि समाज को जो चार बीघा जमीन प्राप्त होगी उसमें से तीन बीघा जमीन पल्लीवाल जैन शिक्षा समिति को देनी होगी तभी हम इस प्रोजेक्ट पर काम करेगें। श्री राजेन्द्र जी ने स्पष्ट मना कर दिया कि यह जमीन समाज की धरोहर होगी क्योंकि यह अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा शाखा जयपुर के बैनर पर है, इसलिये चार बीघा जमीन जयपुर शाखा को ही मिलेगी । सिर्फ इस कारण श्री आर.सी. जैन साहब और श्री ओम प्रकाश जैन साहब इस कार्य से अलग हो गये यह सब कुछ इसलिये बताना चाह रहा हूँ कि यह प्रोजेक्ट जयपुर शाखा कार्यकारिणी 2016-18 के द्वारा कोई नया चालू नहीं किया गया है इस पर पहले से ही कार्य किया जा रहा था। इनके इस कार्य से हटने से एक बात तो स्पष्ट है कि जयपुर शाखा की जमीन के प्रति इनकी नीयत शुरू से ही ठीक नहीं थी इसलिए इस कार्य में इनका किसी भी प्रकार का कोई सहयोग नहीं रहा। जयपुर शाखा की चार हजार वर्ग गज जमीन का प्रोजेक्ट जब पूरा हो गया तब इनकी निगाह इस बेश कीमती जमीन पर पड़ी क्योंकि वर्तमान में इस जमीन की कीमत लगभग सात करोड़ रूपये हैं। अपनी बदनीयती के कारण ये इस जमीन को विवादित बनाने पर तुले हुए है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि 25 मई-जून, 2021 की पल्लीवाल जैन पत्रिका में जब श्री अनिल कुमार जैन का यह विवादित लेख प्रकाशित किया गया उस समय श्री अनिल जी इसी पल्लीवाल जैन शिक्षा समिति के कोषाध्यक्ष थे।

श्री महेश जी के कार्यकाल की मिटिंगों में इनके हठधर्मितापूर्ण निर्णय एवं इनकी कार्यशैली का विवरण :-

प्रथम मीटिंग — पदमपुरा : अध्यक्ष महोदय के मना करने के बावजूद श्री आर.सी. जैन साहब और श्री राजीव रतन जी को विधान के विरूद्ध जाकर जबरन मीटिंग में बुलाया गया जो आज तक महासभा में मुख्य विवाद का कारण रहा क्योंकि जिस तरह से इन्होंने हस्तिनापुर में पूरे समाज को शर्मसार किया उसके लिये अध्यक्ष महोदय ने कहा कि पूर्व अध्यक्ष और महामंत्री के रूप में कौन रहेगें ? इनका निर्णय कार्यकारिणी तय करेगी. आप और मैं नहीं यह निर्णय भी कार्यकारिणी के द्वारा श्री आर.सी. जैन और श्री राजीव रतन जैन की अनुपस्थिति में ही लिया जाना चाहिए लेकिन श्री महेश जी की हठधर्मिता के सामने किसी की नहीं चली और अध्यक्ष महोदय को अन्धेरे में रख कर इनको बुला लिया फिर भी समाज की भावना के अनुरूप अध्यक्ष महोदय द्वारा इनको व्यक्तिगत मना करने के बावजूद भी ये दोनो मीटिंग में आ गये जिसके कारण इस मीटिंग में लड़ाई झगड़ा हुआ और कोई निर्णय नहीं हो पाया ।

द्वितीय मीटिंग : महावीर जी इस मीटिंग में भी इनके और सहमंत्री जी के द्वारा गलत तरीके से वोटिंग करवायी गई एवं जिनको वोट देने का अधिकार ही नहीं था उनसे भी अपने प्रत्याशियों को वोट दिलवाये गये। इस वोटिंग में कार्यकारिणी के 40 सदस्य ही उपस्थित थे जबकि वोट 50 डलवाये गये कुछ सदस्यों के द्वारा अतिरिक्त 10 वोट जिन्होंने डाले उनके नाम सार्वजनिक करने हेतु कहा गया तो श्री महेश जी के द्वारा आज तक नाम नहीं बताये गये जिसका परिणाम कार्यकारिणी सदस्यों को कोर्ट कचहरी जाना पडा और यहीं से पूर्व महामंत्री श्री महेश जी ने पूर्व पदाधिकारियों का संरक्षण पाकर पत्रिका पर कब्जा कर लिया और उसी समय से पत्रिका में सिर्फ एक तरफा खबर प्रकाशित की जा रही है। श्री महेश जी के द्वारा विधवा सहायता के पैसे को इस मीटिंग में उपयोग में लिया जिसका महासभा को आज तक भी हिसाब नहीं दिया।
तृतीय मीटिंग सोनागिरजी अध्यक्ष जी की बिना सहमति और बिना एजेण्डा अनुमोदन करवाये मीटिंग आयोजित की गई। अध्यक्ष जी की सहमति के बिना विवाह सम्मेलन तय किया जिसको ये करवा नहीं पाये और समाज के पैसों की बर्बादी की गई।

चतुर्थ मीटिंग- सुबोध कॉलेज यह अवैधानिक मीटिंग भी अध्यक्ष जी की बिना सहमति और बिना एजेण्डा अनुमोदन करवाये आयोजित की गई ग्रुपिज्म करके बिना कारण तीन सदस्यों की सदस्यता निरस्त करना एवं पत्रिका में दुष्प्रचार कर उनको बदनाम करना और ईर्ष्या पूर्वक मुझको लेकर जानबूझ कर जमीन का मुद्दा श्री ओम प्रकाश जी के पत्र के माध्यम से छेड़ना जबकि श्री महेश जी के द्वारा जयपुर शाखा अध्यक्ष और मंत्री जी के पत्रों को महासभा के मंच पर कभी नहीं पढ़ा गया। अपने लगभग दो साल के कार्यकाल में स्वयं विवादित रहे है। श्री महेश जी से महासभा का कार्य / विवाद संभल नही रहा और जयपुर शाखा जमीन के मामले में विन्ता होने लग गई।

इसी मीटिंग में पल्लीवाल पत्रिका की गोष्ठी की गई जिसमें समाज के पैसे से अपने लोगों को बुलाकर वाह-वाही लूटना और पैसे की बर्बादी खास बात इनके निमंत्रण कार्ड में श्री जितेन्द्र जी जैन, आगरा का नाम नहीं था। आगरा के कुछ सदस्यों द्वारा विरोध करने पर रातो रात नया कार्ड बनवाया जिसका समाज के वरिष्ठ लोगों द्वारा इस कार्यक्रम का पूरी तरह से विरोध ही नहीं किया गया बल्कि बहिष्कार भी किया गया।

पांचवी मीटिंग- मथुरा: साधारण सभा / प्रतिनिधि सभा के निर्णय से हताश होकर मथुरा में भव्य होटल में अवैध मीटिंग आयोजित की गई। इस मीटिंग में चुने हुए प्रतिनिधियों को हटाने और सदस्यता निरस्त करने का कार्य किया गया। महासभा के विधान के अनुसार चुने हुए पदाधिकारियों को कार्यकारिणी नहीं हटा सकती है। श्री महेश जी की प्रत्येक मीटिंग विलासिता से भरपूर होती है जो निश्चित रूप से समाज और महासभा के पैसों की बर्बादी है।
बधुओं, महासभा के गतिरोध को दूर करने के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री त्रिलोक जी एवं अर्थमंत्री श्री भागचन्द जी के द्वारा हर सम्भव प्रयास किये गये थे। इसके लिए श्री त्रिलोक चन्द जी और श्री भागवन्द जी दोनों श्री महेश जी घर भी गये लेकिन श्री महेश जी की हठधर्मिता ने सारे प्रयासों को चकना चूर कर दिया तब अलवर मीटिंग में महासभा के पूर्व पदाधिकारियों के द्वारा इस गतिरोध को खत्म करने के लिए एक सद्भावना कमेटी पूर्व महासभा अध्यक्ष श्री शिखर चन्द जी सिंघई की अध्यक्षता में बनाई गई। उनके कई बार बुलाने के बाद भी श्री महेश जी उपस्थित नही हुए। इसके विपरीत पूर्व अध्यक्ष श्री आरसी जैन साहब द्वारा पूरे समाज की निष्पक्षता पर प्रश्न चिन्ह लगाकर समाज से बाहर के अपने परिचित व्यक्तियों से जयपुर शाखा जमीन की जाँच हेतु एक कमेटी बनाई गई। उस कमेटी के बुलाने पर उनके समक्ष मैं उपस्थित हुआ। यदि में चाहता तो समाज के बाहर के लोगों के सामने उपस्थित नहीं होता। चूंकि मैं निर्दोष था और महासभा कार्यकारिणी के निर्णय को स्वीकर कर मैने अपनी उपस्थिती दर्ज करवाई जबकि श्री महेश जी को सद्भावना कमेटी में समाज के और महासभा के पूर्व पदाधिकारियों द्वारा आमंत्रित किया गया था, उसके बावजूद कई बार बुलाने के बाद भी उपस्थित नही हुए क्योंकि इन्हें पता था कि ये स्वयं दोषी है इसलिए किस मुंह से सदभावना कमेटी के सामने उपस्थित होते। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि श्री महेश जी अपने आप को समाज से भी बड़ा समझते हैं।
अन्त में मैं इतना ही कहना चाहता हूं कि हस्तिनापुर काण्ड के बाद श्री महेश जी के लिखे अनुसार चुनाव में समाज ने तो तीनों पदाधिकारियों के रूप में योग्य अनुभवी और कुशल नेतृत्व को ही चुना था किन्तु श्री महेश जी ही समाज की भावना के विरूद्ध जाकर हस्तिनापुर के दोषियों के साथ मिलकर पूरी महासभा में नकारात्मकता फैला रहे हैं। बन्धुओं, समाज को ऐसे नकारात्मक लोगों से सावधान रहने की जरूरत है। श्री महेश जी ने अपने लगभग दो वर्ष के कार्यकाल में प्रारम्भ से लेकर अभी तक समाजहित के कार्यों की अपेक्षा नकारात्मक व्यक्तियों के साथ मिलकर समाज को तोड़ने का कार्य जरूर कर रहे हैं। समाज को ऐसे व्यक्तियों को पहचानना चाहिए और इनसे सतर्क रहना चाहिए। मैं आप सभी को पुनः विश्वास दिलाता हूं कि ये मेरे ऊपर चाहे जितने भी आरोप-प्रत्यारोप लगा लें और मुझे रोकने की कितनी भी कोशिश कर लें लेकिन मैं समाज हित के कार्य आप सभी के आशीर्वाद से निरन्तर करता रहूंगा। आपका आशीर्वाद ही मेरी शक्ति और ऊर्जा है।
निवेदक

पारस चन्द जैन
महामंत्री

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