प्रत्येक वर्ष कार्तिक कृष्ण पक्ष अमावस्या के दिन सनातन धर्मी और जैनधर्म के मानने वाले दिवाली धूमधाम से मनाते हैं। इस त्यौहार को हम क्यों मनाते हैं। इसके पीछे क्या कारण है, यह भी अधिकांश जन् को ज्ञात है। हिन्दूस्तान में यह सबसे बड़ा त्यौहार है लेकिन इसके पीछे जो भाव था उसको भूलकर आज हम अपना वैभव मात्र प्रदर्शित करने के लिए इस त्यौहार को मनाते हैं। यह त्यौहार एक दिन का नहीं है बल्कि पांच दिन का है और पांचो दिन का प्रत्येक दिवस हमें कुछ न कुछ ज्ञान प्रदान करता है जैसे स्वास्थ्य, धन धान्य से परिपूर्ण व खुशहाली, अनन्त समृद्धि और सुखी जीवन की कामना।
जैन धर्मावलम्बियों के अनुसार दीपावली ;-
1. वो तेरस ही धन्य है जिस तेरस को आखरी बार दिव्य ध्वनी सुनने को मिली थी।
2. भगवान महावीर ने लौकिक लक्ष्मी का त्याग किया केवल ज्ञान की प्राप्ति के लिए, इसलिए केवल ज्ञान ही सच्ची लक्ष्मी है।
3. भगवान के निर्वाण (कर्मों से मुक्ति) को स्मरण करने के लिए यह पर्व है, खान पान और वस्त्रों के कारण भगवान महावीर को भूलने का पर्व नहीं।
4. दिव्यध्वनी के अभाव में होने वाले अज्ञान, अंधकार को दूर करने के लिए जिनवाणी के ज्ञानदीप की आवली लगाना है।
5. ज्ञान के दीपक की आवली अहिंसक है अतः सभी को जिनवाणी के ज्ञान-दीप की आवली लगानी चाहिए
6. गौतम गणधर को इसी तिथि को केवल ज्ञान हुआ था वो ही गणधरों के पति होने से गणपति और गणेश है।
7. भगवान के बाद दिव्यध्वनी जिनवाणी में लिखी हुई है इसलिए वह ही सरस्वती है जिससे विद्या की प्राप्ति होती है।
8. भगवान महावीर का निर्वाण, गौतम गणपति की केवल ज्ञान-लक्ष्मी और दिव्यध्वनि रूप सरस्वती की आराधना से यह दीपावली शुभ होगी।
9. लौकिक लक्ष्मी, गणपति और सरस्वती की आराधना से और दीपक, पटाखे की हिंसां के कारण अधर्म की वृद्धि होगी दीपावली अशुभ होगी।
10. अपना आत्मा (राम) जब चार गति के वनवास के बाद अपने घर (मोक्ष) लोटेगा तब ही सच्ची दीपावली होगी।
शुभ दीपावली
रमेशचंद पल्लीवाल
सम्पादक