एक गांव में रतन सिंह नाम का बहुत हटी, उदंडी और चरित्रहीन व्यक्ति रहता था। वह आए दिन गांव वालों से झगड़ा टंटा करता रहता था गांव की औरतों और लड़कियों को छेड़ता उन पर फवतीया कसता आए दिन उसका उपद्रव गाँव में होता ही रहता था। उसकी गंदी हरकतों से गांव वाले बहुत दुःखी और क्रोधित थे।
एक दिन गांव के सभी लोगों ने इकट्ठे होकर पंचायत की और उस नालायक रतन सिंह के कुकर्मों पर चर्चा की और इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि इस व्यक्ति को समय रहते हुए दंडित करना आवश्यक है अन्यथा गांव के महिलाओं के इज्जत पर किसी समय भी यह व्यक्ति हमला कर सकता है।
पंचों के आदेश पर गांव वाले उस बदमाश रतन सिंह को पड़कर ले आए। पंचायत के आदेश से गांव वालों ने उसकी जमकर ठुकाई, पिटाई की और उसकी नाक काट ली।
जब नाक कट गई तो उसको बड़ी शर्मिंदगी महसूस हुई और वह गांव छोड़कर इधर-उधर भटकने लगा। आस-पास के गांव के लोग तो उसकी हरकतो को जानते थे, अतः वह दूर के एक गांव में पहुंचा। गाँव के बाहर ही एक क कुआ था कुएं के चारों ओर घने पेड़ लगे हुए थे। पेड़ों के नीचे चबुतरियां बनी हुई थी। साधु भेषधारी नकटे रत्न सिंह को वह स्थान ठीक लगा सो आंखें बंद कर वहीं बैठ तपस्वी साधु-संत का नाटक करने लगा।
आते- जाते लोगों की नजर आंख बंद करे इस बहरूपिए रतन सिंह पर पड़ती, लोग देखते और चर्चा करते की कैसा साधु है जो अपनी धुन के अंदर बैठा हुआ है ना किसी से कुछ बोलता है ना कुछ मांगता है। पास में जाकर देखने पर ऐसा लगता है कि इसकी नाक कटी हुई है। एक दिन गांव के मुखिया ने आकर वहरुपीये साधू रतन सिंह से पूछा, महाराज कहां से आना हुआ ?जैसा साधु जवाब देते हैं वैसा ही रतन सिंह बोला साधु का कौन सा वास, जहां जम गए वहीं वास, कौन सा घर- कौन सा गांव, सारे गांव अपने सारे घर अपने, भीख मांग कर भूख शांत करते हैं और भगवान की भक्ति में अपना मन लगाकर आनंदित होते हैं।
मुखिया ने पूछा कि यह आपकी नाक किसने काटी। रतन सिंह बोल यह काटी नहीं, यह तो हमने भगवान को अर्पित की है, इसी के कारण तो आज हमें भगवान के साक्षात दर्शन हो रहे हैं, और हम आनंदित होकर उसकी लो मंगन हैं।आहा कैसी आनंद की वर्षा हो रही है, प्रभु आप महान है।
इस प्रकार की बातें करके गांव वालों को प्रभावित करने लगा। जब कभी भी कोई आता तब वह इसी प्रकार की बातें करता। इससे गांव वाले प्रभावित होने लगे।
एक दिन एक नौजवान ने वहरुपीये रतन सिंह से कहा कि महाराज हमें भी आप अपनी शरण में ले लो हमें भी प्रभु की भक्ति का आनंद लेने का मार्ग बताओ जिससे कि हमारे ऊपर भी प्रभु के आनंद की वर्षा हो। रतन सिंह ने कहा बेटा इसमें कौन बड़ी बात है प्रभु का स्मरण करो, इस मंत्र का जाप करो एकाग्रचित्ता के साथ, अपने आप को प्रभू की भक्ति में लीन कर दो, लेकिन दर्शन तो तुम्हें जब भी होंगे, जब तुम प्रभु को अपनी नाक भेंट करोगे। लड़का कुछ हिचका पर प्रभु दर्शन की चाहत में नाक भेंट करने के लिए राजी हो गया। उसने कहा कि महाराज आप हमारी नाक को प्रभु को समर्पित कर दें।
रतन सिंह ने अपने झोले से एक कटार निकाली और पास के खेत के झुरमुट में ले जाकर उस लड़के की नाक काट दी,लडका वहुत चीखा- चिल्लाया। रतन सिंह ने कहा अब तो कट गई। ध्यान से मेरी बात सुन यदि तुमने यह बताया की नाक काटवाई है और आनंद नहीं आ रहा तो लोग तुमको नकटा कहेंगे। इसलिए तुम भी मेरी तरह से यही डोंग करो क्या आनंद की वर्षा हो रही है, हे प्रभु आपका दिव्य दर्शन करके मेरा जीवन कृतार्थ हो गया। प्रभु आप जिस प्रकार की आनंद की वर्षा कर रहे हैं ऐसी आनंद की वर्षा मेरे जीवन में पहले कभी नहीं हुई।
लोग आते गए और रत्न सिंह के डोंग में फंसते गये इस प्रकार उस गांव के सभी लोगों ने अपनी नाक कटवा ली। धीरे-धीरे नकटों का एक बहुत बड़ा गिरोह बन गया।अब करें भी क्या? सभी लोग शर्म की वजह से एक ही बात कहते कि अहो प्रभु आपके दर्शन पाकर हम निहाल हो गए हमारा जीवन सफल हो गया, आपके दर्शन से जो आनंद प्राप्त हो रहा है वही हमारे जीवन का लक्ष्य था।
धीरे-धीरे यह खबर राजा के पास में गई राजा अपने पूरे लाव लश्कर के साथ नकटा साधु रतन सिंह के दर्शन के लिए आया, राजा के आने पर वहां जितने नकटे थे वह सब बड़े जोर-जोर से हे प्रभु हरे राम हरे राम का जाप करने लगे और बड़ी प्रसन्न मुद्रा में अहो प्रभु आपके दर्शन पाकर हमारा जीवन कतार्थ हो गया, आनंद की वर्षा हो रही है इस प्रकार की बातें करने लगे।
राजा उनकी बातों से बड़ा प्रभावित हुआ, उसने बड़े साधु रतन सिंह से पूछा कि आप मुझे भगवान के दर्शन करवा सकते हैं क्या? रतन सिंह ने कहा अवश्य आपको भगवान का साक्षात्कार कराकर मुझे बड़ी खुशी होगी मैंने इतने लोगों को भगवान का साक्षात्कार कराया है। आज इन पर प्रभु की असीम कृपा और आनंद की वर्षा हो रही है। आप तो इस राज्य के राजा हैं इसलिए आपका प्रभु से साक्षात्कार कराना मेरा सौभाग्य होगा, लेकिन उसके लिए आपको एक प्रक्रिया से गुजरना होगा, जिससे यह सभी लोग भी गुजरे हैं। राजा प्रभु के दर्शन करने और असीम आनन्द के लिए इतना लालाइत था वह तुरंत सभी प्रकार की प्रक्रियाओं का पालन करने के लिए तैयार हो गया।
राजा का महामंत्री बड़े गोर से यह सब नाटक देख रहा था।उसने राजा के कान में कहा- राजन थोड़ा संयम रखें और मेरी बात को गौर से सुने, मुझे लगता है कि मैंने इस आदमी को पहले कहीं देखा है। इसलिए पहले दरयाफ़्त कर लेते हैं कि यह वही व्यक्ति तो नहीं हैं।
हमारे ही राज्य के गांव बनखेड़ा का वह अपराधी तो नहीं हे जिसको गांव वालों ने पंचायत करके बहुत मारा और दंड स्वरूप इसकी नाक काट कर उसे गांव से निकाल दिया था। आज वही नकटा, साधु का रूप भर के लोगों का भ्रमित कर रहा हो। और इसने पूरे गांव के लोगों की नाक कटवा दी हो। इसलिए पहले दरियाफ्त कर लेते हैं।
बनखेड़ा के सरपंच और वहां के कुछ मोअज्जि आदमीयों को बुलाकर इसको इसकी तसल्ली कर लेते हैं कि कहीं यह वही रतन सिंह तो नहीं है? या फिर वास्तव में कोई सही में साधु है। इसलिए थोड़ा सा धैर्य रखें और एक बार पूरी जानकारी करने के बाद आप जैसा उचित समझे वैसा करें।
राजा को महामंत्री की सलाह समझ में आ गई और उन्होंने वहीं पर अपना डेरा तंबू डाल दिया।
बन खेड़ा के सरपंच को खबर देकर तुरंत बुलवाया गया, गांव के पांच मोअज्जि आदमियों को भी बुलाया गया। उनसे कहा गया कि देखकर बताओ कि यह आदमी कौन है? सारे के सारे एक साथ बोले अरे यह तो हमारे गांव का लुच्चा गुंडा रतन सिंह है। जिस को हमने गांव की महिलाओं को छेड़ने, दुराचार करने और गुंडागर्दी के आपराध में मार-पीट कर, नाक काटकर गांव से निकला दिया था। राजा सकते में आ गए और महामंत्री से बोले कि इसको तुरंत गिरफ्तार करो। महाराज इसने इतने आदमीयों की नाक काटकर नकटा बनाने का ग्रणित अपराध किया है।
पर महाराज यदि आपकी नाक कट जाती तो पूरे राज को नाक कटानी पड़ती।
आज पूरी दुनिया में, समाज- सोसायटी में ऐसे दुराचारी अपनी नाक कटाकर पूरे समाज की नाक काटने पर उतारू है। अतः अपने विवेक का उपयोग अवश्य करें।
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