श्री पल्लीवाल जैन डिजिटल पत्रिका

अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा

(पल्लीवाल, जैसवाल, सैलवाल सम्बंधित जैन समाज)

जैन समाज में बढ़ते मतभेद – एक चिंता

जैन धर्म विश्व को अहिंसा, प्रेम, क्षमा और अनेकांतवाद का संदेश देने वाला धर्म है। यह हमें सिखाता है कि हर व्यक्ति के विचारों का सम्मान करना चाहिए और मतभेद को मनभेद नहीं बनने देना चाहिए। परंतु आज यह देखकर चिंता होती है कि जैन समाज के भीतर ही छोटे-छोटे मतभेदों के कारण दूरियाँ बढ़ती जा रही हैं।
समाज के लोग आपस में संवाद करने से बच रहे हैं और व्यक्तिगत विचारों तथा अहंकार के कारण समाज कई छोटे-छोटे समूहों में बँटता दिखाई दे रहा है। यह स्थिति कहीं न कहीं भ्रम भी पैदा करती है कि जो धर्म पूरी दुनिया को प्रेम, सहिष्णुता और एकता का संदेश देता है, उसी धर्म के अनुयायी आपस में एकजुट क्यों नहीं रह पा रहे हैं?

यदि हम अपने मतभेदों को भुलाकर एक-दूसरे को समझने का प्रयास करें, तो समाज अधिक मजबूत और संगठित बन सकता है। हमें यह याद रखना चाहिए कि हमारी पहचान अलग-अलग समूहों से नहीं, बल्कि जैन धर्म के मूल सिद्धांतों – अहिंसा, क्षमा और एकता – से है। समाज की उन्नति तभी संभव है, जब हम मनभेद नहीं, बल्कि संवाद और सहयोग का मार्ग अपनाएँ।

ललित जैन अछनेरा
कार्यकारिणी सदस्य
अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा
Contact📞. 9410667999

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