श्री पल्लीवाल जैन डिजिटल पत्रिका

अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा

(पल्लीवाल, जैसवाल, सैलवाल सम्बंधित जैन समाज)

बाहर वही आता है जो अंदर होता है

इंसान का जीवन उसकी सोच पर निर्भर करता है उसकी सोच जैसी होती है इंसान का जीवन वैसा ही बन जाता है। अगर इंसान की सोच अच्छी होती है, अगर इंसान बड़ी सोच का धनी है, तो उसका पूरा जीवन खुशी और आनंद के साथ व्यतीत होता है और वह जहां भी रहता है वह अपनी सोच से लोगों को प्रभावित करता है। उसके आसपास रहने वाले लोग उस से खुश रहते हैं मिलजुल कर रहते हैं। हर व्यक्ति ऐसे व्यक्तियों से संबंध बनाने की कोशिश करता है दूसरी तरफ कुछ लोगों की सोच नकारात्मक होती है वह हमेशा नकारात्मक तथा छोटी सोच रखते हैं ऐसे लोग जहां भी रहते हैं खुद भी परेशान रहते हैं और लोगों को भी परेशान करते हैं।

बाहर वही आता है जो अंदर होता है, जिसके अंदर जो होता है वह वही बाहर निकलता है। जिसके अंदर ज्ञान और संस्कार हो वह जहां भी जाएगा ज्ञान और संस्कार फैलाएगा और जिसके अंदर नकारात्मकता और नफरत भरी हो वह जहां भी जाएगा नकारात्मकता और नफरत फैलाएगा। अगर दो ज्ञानी लोग बैठे हैं तो वह ज्ञान की बात करेंगे, तत्व चिंतन करेंगे, समझदारी भरी बातें करेंगे और अगर उनके आसपास कुछ लोग बैठे हो तो उनको भी वह बातें अच्छी लगेंगे। वह लोग भी उन बातों से प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाएंगे लेकिन अगर दो मूर्ख लोग बैठे होंगे तो उनकी बातें सिर्फ मूर्खतापूर्ण होगी नकारात्मक होगी इधर-उधर की फालतू बातें करेंगे दूसरे की बुराई करेंगे अच्छे भले काम में भी कमियां तलाश करने की कोशिश करेंगे।

एक उदाहरण से समझते हैं कि अगर हम मूंगफली से तेल निकालते हैं तो उसमें तेल निकालने की योग्यता होती है इसलिए हम मूंगफली से तेल निकाल सकते हैं लेकिन अगर हम पत्थर से तेल निकालना चाहे तो नहीं निकाल पाएंगे क्योंकि पत्थर में तेल नहीं होता है उसमें तेल निकालने की योग्यता नहीं होती है इसी प्रकार नकारात्मक व्यक्ति हमेशा नकारात्मक बात करता है क्योंकि उसके अंदर ज्ञान और संस्कार होते ही नहीं है लेकिन जिसके संस्कार अच्छे हैं जिसके अंदर ज्ञान है वह जहां भी जाएगा अपने ज्ञान की खुशबू से पूरे वातावरण को महका देगा।

लेकिन दुनिया में कुछ लोग इतने नकारात्मक होते हैं उन्हें कुछ भी अच्छा से अच्छा दे दो उसमें भी नकारात्मकता ढूंढ ही लेते हैं वह बगीचे में भी जाते हैं तो फूलों की खुशबू उन्हें नहीं आती है उन्हें कांटे ही नजर आते हैं। एक दृष्टांत से समझते हैं दो दोस्त एक तीसरे मित्र के यहां गए उस मित्र ने इन लोगों की खातिरदारी में मेवा मिश्रित दूध का गिलास पेश किया, गिलास दूध से आधा भरा हुआ था। पहले मित्र ने कहा कैसा कंजूस आदमी है दूध भी पिलाया तो आधा गिलास लेकिन दूसरे मित्र ने कहा अरे नहीं कितना बढ़िया आदमी है दूध भी पिलाया तो मेवा मिश्रित दूध पिलाया कितने बढ़िया-बढ़िया मेवा दूध में डाल रखे थे हर इंसान के सोचने का नजरिया अलग-अलग है पहला दोस्त नकारात्मक सोचता है उसने अच्छाई में भी बुराई खोज ली और दूसरा दोस्त सकारात्मक सोच का धनी था इसलिए उसने अच्छाई पर ध्यान दिया।

हमारा जीवन भी हमारी सोच से निर्मित होता है जैसे हमारी सोच होती है वैसा हमारा जीवन बन जाता है इसलिए हमेशा सकारात्मक सोचो अच्छे विचारों का आत्मसात करो और अच्छे लोगों के साथ अपना समय व्यतीत करो अच्छी किताबें पढ़ो संत समागम करो संतों की वाणी सुनो ध्यान और योग करो तो आपका जीवन भी आनंद दायक और बेहतरीन हो जाएगा।

धन्यवाद

महेंद्र कुमार जैन(लारा)
अलवरX

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