श्री पल्लीवाल जैन डिजिटल पत्रिका

अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा

(पल्लीवाल, जैसवाल, सैलवाल सम्बंधित जैन समाज)

अर्थमंत्री का वक्तव्य

सादर जय जिनेन्द्र ।
श्री पल्लीवाल जैन पत्रिका के 25 अक्टूबर 24 के अंक में पेज नम्बर 7 पर “पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्व अर्थमंत्री ने लगाई खाते पर रोक, फिर कोर्ट की ओर उनके कदम” शीर्षक से श्री अनिल कुमार जैन, जयपुर का लेख पढ़ कर बहुत ही आश्चर्य हुआ। यह लेख “उल्टा चोर कोतवाल को डांटे” वाली कहावत को चरितार्थ कर रहा है। पद की लालसा एक व्यक्ति को कितना अंधा बना सकती है कि वो खुद न लिख कर दूसरों के लिखे को बिना सोचे समझे अपने नाम से प्रकाशित करवा रहे हैं। पद लोलुपता एक समझदार व्यक्ति को दूसरों के हाथों की कठपुतली बना सकती है, यह लेख इसका उदाहरण है। क्या खुद के ग्रुप के चन्द लोगों के द्वारा अर्थमंत्री कह देने मात्र से ही या घोषित करने मात्र से ये महासभा के अर्थमंत्री बन सकते हैं? इस प्रकार तो इनको ये ही व्यक्ति भारत का प्रधानमंत्री भी बना सकते हैं? क्या इस प्रकार कोई भी व्यक्ति कुछ भी बन सकता है? फिर आम मतदाता / महासभा के प्रतिनिधियों की या चुनाव की आवश्यकता ही नहीं है. फिर क्यों महासभा के पदाधिकारी आम पल्लीवाल जैन को महासभा का सदस्य बनाते हैं।
बन्धुओं इस लेख में इन्होंने लिखा है कि- “श्री त्रिलोक चन्द जी और भाग चन्द जी ने अपने अलवर के से ऊपर की राशि खर्च कर डाली है।” जिस प्रतिनिधि सम्मेलन को ये पर्सनल कार्यक्रम लिख रहे है उसी सम्मेलन से घबराकर इसके चार दिन बाद ही इन्होंने मथुरा के फाईव स्टार होटल में मीटिंग की। क्योंकि इनको पता था कि इतनी बड़ी संख्या में प्रतिनिधियों ने महासभा विधान के अनुसार कार्यवाही की है। शायद इनको ये पता ही नहीं है कि जिस प्रकार सामाजिक कार्यक्रमों में खर्चों को वहन करने के लिए उस कार्यक्रम के लाभार्थी बनाये जाते है उसी प्रकार इस सम्मेलन के लाभार्थी भी बनाये गये थे। मेरे द्वारा पारदर्शिता रखते हुए सभी लाभार्थियों का पैसा खाते में जमा किया गया और खर्चा भी AIC Pay चैक के द्वारा किया गया। क्या ये पारदर्शिता इनके द्वारा रखी जा रही है ? फाईव स्टार होटलों में लग्जरी मीटिंग और अब अयोध्या में भ्रमण क्या इन्होंने समाज को कभी बताया कि ये पैसा कहां से आ रहा है और किस प्रकार खर्च किया जा रहा है? इन्हें तो कम से कम इस बात का गर्व होना चाहिए कि मेरे द्वारा पूरी पारदर्शिता रखी जा रही है। इसी पारदर्शिता के तहत मैंने विधवा सहायता का पैसे इनकी लग्जरी मीटिंगों में खर्च करने से मना कर दिया था।
इसी लेख में ये लिख रहे है कि- “हमारे पदाधिकारियों ने पूर्व चैकों को स्टॉप कराते हुए — एक बैंकर चैक” वहीं आगे लिख रहे हैं कि “बैंक अधिकारियों पर दबाव बनाते हुए खाता ब्लाक करा दिया जिससे महिला सहायता पर रोक लग गई है।”
एक तरफ तो खुद लिख रहे हैं कि पूर्व के चैकों को स्टॉप करवा कर और दूसरी तरफ महिला सहायता रोकने का ठीकरा भी मेरे ऊपर फोड़ रहे हैं। इस पूरी कार्यवाही में यह तो साफ है कि महिला सहायता जारी की जा रही थी और मेरे द्वारा तकनीकी कारणों को दूर कर प्रत्येक माह सुचारू रूप से जारी करने के प्रयत्न भी किये जा रहे थे लेकिन इनके द्वारा बार-बार विघ्न पैदा करने से यह सुचारू नहीं हो पा रही है।
इसी लेख में इन्होंने लिखा है कि- “आज तक ये निवर्तमान पदाधिकारियों से खाते परिवर्तित नहीं करवा सके बिल्कुल सही लिखा है। पदमपुरा मीटिंग में इन्हीं पूर्व पदाधिकारी श्री राजीव रतन के द्वारा कहा गया था कि मैं भी देखता हूं महिला सहायता कैसे जारी करते
हो। बैंक में सभी खातों में मेरे हस्ताक्षर है इसलिए मेरे हस्ताक्षरों के बिना कोई भी खाता परिवर्तित नहीं हो सकता है इसलिए आज तक खाते परिवर्तित नहीं हो पाये हैं। यह भी सर्वविदित है कि ये पूर्व पदाधिकारी किसके सहयोगी और खास है।
बन्धुओं, सभी एफडीआर मेरे पास सुरक्षित होने के बावजूद भी पूर्व महामंत्री श्री महेश जी के द्वारा बैंक में अपनी पहुंच का इस्तेमाल करते हुए गुम होने की झूठी सूचना बैंक में देकर महासभा के खाते से सारी एफडीआर तुडवाकर सारा पैसा निकाल कर ले जाना निश्चित रूप से समाज के पैसे के साथ धोखाधड़ी है। यदि मैं माननीय न्यायालय की शरण में नहीं जाता तो यह पैसा भी फाईव स्टार होटलों की मीटिंगों और आयोध्या भ्रमण में खर्च होता। इनके द्वारा की गई धोखाधड़ी को देखते हुए माननीय न्यायालय द्वारा इनके खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज करने हेतु आदेश पारित किया गया है और सम्बन्धित को एफ.आई.आर. दर्ज करने हेतु निर्देशित भी किया गया है।
इसी लेख में ये घड़ियाली आंसू बहाते हुए लाभार्थी महिलाओं से क्षमा मांग रहे है तो ये महाशय अब तक कहाँ थे? और अब इतनी ही चिन्ता है तो इस लेख के अनुसार यदि पूर्व महामंत्री श्री महेश जी के द्वारा अभी तक सहायता राशि जारी की जा रही थी तो सहायता प्राप्त महिलाओं की लिस्ट भी महेश जी के पास ही होगी तो उसी के अनुसार सहायता जारी कर दें। इसके लिए पुनः नये सिरे से फार्म क्यों करवाये जा रहे हैं? क्या अभी तक जारी की गई सहायता गलत थी? जो नये सिरे से फार्म भरवाये जा रहे हैं। सभी जानते है कि इस प्रक्रिया में तो वर्षों लग जायेंगे।
बन्धुओं, महिला सहायता की अगस्त, 2024 तक की समस्त राशि मेरे द्वारा जारी कर दी गई है। इसमें तकनीकी कारणों से कुछ महिलाओं की सहायता राशि जारी नहीं की जा सकी थी। उसके बाद पूर्व महामंत्री श्री महेश जी द्वारा खाते से सारा पैसा निकाल कर ले जाना और खाते को फिज करवाने के बावजूद भी अध्यक्ष महोदय द्वारा बची हुई सहायता राशि स्वयं के खाते से खुद की तरफ से जारी की गई। फिर भी यदि किसी महिला की अगस्त 2024 तक की सहायता राशि नहीं पहुंची हो तो कृपया मुझे व्यक्तिगत मेरे मोबाईल नम्बर 9828910628 पर सूचना देवें ताकि उन्हें भी राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री त्रिलोक चन्द जी के खाते से अगस्त 2024 तक की राशि जारी की जा सके।
मेरा सभी दानदाताओं और भामाशाहों से नम्र निवेदन है कि अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा की मूल रसीद बुक मेरे पास है, मेरे अलावा किसी भी अन्य व्यक्ति के पास नही है। यदि कोई भी महासभा के नाम से राशि प्राप्त कर महासभा रसीद देता है या महासभा की रसीद बुक का उपयोग करता है तो यह कृत्य अपराध के साथ-साथ धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है। अतः सभी भामाशाओं से विनम्र अपील है कि किसी भी तरह का दान या विधवा सहायता या अन्य योगदान महासभा को देने हेतु मुझे राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री त्रिलोक चन्द जी और महामंत्री श्री पारस चन्द जैन को सूचित करने की कृपा करें।
महासभा द्वारा नया बैंक खाता खुलवाया जा रहा है। जल्द ही इस नये खाते से नियमित रूप से सहायता राशि जारी की जायेगी। सहायता प्राप्त महिलाओं की असुविधा के लिए मैं व्यक्तिगत रूप से क्षमा प्रार्थी हूं और आप सभी को विश्वास दिलाता हूं कि बार-बार सहायता राशि में विघ्न पैदा करने वालों के खिलाफ महासभा द्वारा निश्चित रूप से कानूनी कार्यवाही की जायेगी और उम्मीद करता हूं कि अब सहायता राशि जारी करने में कोई विघ्न पैदा नहीं होगा ।

भाग चन्द जैन
राष्ट्रीय अर्थमंत्री

Leave a Reply