इंसान रोज हजारों लोगों से मिलता है, उनके साथ समय व्यतीत करता है, उनके साथ बातचीत करता है और आजकल तो सोशल मीडिया का जमाना है तो सोशल मीडिया पर घंटो टाइम व्यतीत करता रहता है। लेकिन क्या हम अपने आप से मिलते हैं, अपने आप को जानने की कोशिश करते हैं, अपने आप के साथ समय व्यतीत करते हैं।
अगर हमें अपने जीवन को आनंद और उत्साह के साथ जीना है तो खुद से मिलना सीखना होगा। खुद से बात करनी होगी, खुद को समझना होगा। तभी हम अपने जीवन को आनंद के साथ व्यतीत कर सकते हैं। हम जितना बाहर घूमेंगे हम उतना उलझते जाएंगे और हम जितना अपने अंदर घुसेंगे उतना सुलझते जाएंगे। इंसान को अपने आप से बात करना सीखना चाहिए। हर इंसान के अंदर एक परमात्मा विराजमान है अगर हम उस परमात्मा से बात करना सीख जाए तो फिर हमें किसी और से बात करने की जरूरत ही नहीं है।
जब तक हम बाहर खुशियां ढूंढते रहेंगे तब तक हम अपने वास्तविक आनंद से दूर रहेंगे। हां, हो सकता है शुरुआत में अपने आप से मिलने में दिक्कत हो , लेकिन अगर हम अभ्यास करते हैं तो फिर अपने आप से मिलने में सफल हो सकते हैं। इसके लिए शांत रहना और मेडिटेशन करना बहुत सहायक होता है। शांत रहने का मतलब सिर्फ मौन रहना नहीं है बल्कि अपने अंदर विचारों को भी शून्य करना होता है। जब तक हम विचार शून्य नहीं होंगे तब तक हम अपने आप से नहीं मिल पाएंगे।
अगर हमें अपने आप से मिलना है तो सभी संकल्प विकल्पों से दूर होकर एकाग्रता को अपनाए , संयम के साथ जीवन व्यतीत करें, मन में विशुद्धि लाए और मेडिटेशन करें, नकारात्मकता से दूर रहे, नकारात्मकता को अपने मन में कभी हावी न होने दे, शांत रहना सीखो। अगर हम इन सभी आदतों को अपनाए तो धीरे-धीरे अपने अंदर सिमटते चले जाएंगे और अपने आप से नाता जोड़ लेंगे। जब अपने आप से नाता जुड़ जाएगा तो फिर जीवन में आनंद ही आनंद है, शांति ही शांति है, क्योंकि हर इंसान के अंदर एक परमात्मा विराजमान है, सिर्फ उसे पहचानने की आवश्यकता है।
धन्यवाद
महेंद्र कुमार जैन (लारा)
शिवाजी पार्क , अलवर