✍🏼6️⃣1️⃣
भाव बिगड़े
तो भव बिगड़ेगा
शुद्ध हों भाव।
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✍🏼6️⃣2️⃣
जिनवाणी है
वो दर्पण, स्वयं को
देखें इसमें।
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✍🏼6️⃣3️⃣
रखें विश्वास
खुद पर, जो सोचें
वो कर पाएं।
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✍🏼6️⃣4️⃣
कठिन राहें
चाहे डराएं, चल
मंज़िल पा ले।
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✍🏼6️⃣5️⃣
आज का श्रम,
सफलता कल की
हार ना मान।
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✍🏼6️⃣6️⃣
तर्क से बुद्धि
में धार, तकरार
से टूटें रिश्ते।
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✍🏼6️⃣7️⃣
वक्त की युक्ति
सही दिशा जीवन
की , न कि वक्त।
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✍🏼6️⃣8️⃣
दिखो ही नहीं,
बनो अच्छा, सम्मान
मिले ताउम्र।
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✍🏼6️⃣9️⃣
कड़वा पौधा
है धैर्य, फल आते
हमेशा मीठे।
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✍🏼7️⃣0️⃣
अनुशासन
कुंजी सफलता की
करें पालन।
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*हाइकु मूल रूप से जापान की एक अत्यंत लोकप्रिय और सबसे छोटी काव्य शैली है,जिसकी मुख्य विशेषता है कि यह केवल तीन पंक्तियों की कविता होती है। इसमें कुल 17 वर्ण (syllables) होते हैं, जिनका क्रम 5-7-5 (पहली पंक्ति में 5, दूसरी में 7, और तीसरी में 5) का होता है।*
*संयुक्ताक्षर, मात्रा, अनुस्वार, चंद्रबिंदु, विसर्ग, हलन्त वाला व्यंजन आदि अलग syllable (अक्षर-खंड) नहीं बनाते हैं।*
*हायकू में संक्षेप में सार गर्भित बहु अर्थ को प्रकट करने वाले शिक्षाप्रद व प्रेरणास्पद विचार होते हैं।*
*✍🏼हाइकु रचयिता* :-
राजेन्द्र प्रसाद जैन
76 मुक्तानंद नगर जयपुर