श्री पल्लीवाल जैन डिजिटल पत्रिका

अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा

(पल्लीवाल, जैसवाल, सैलवाल सम्बंधित जैन समाज)

प्रेरणादायक स्वरचित हाइकु छंद क्र.61 से 70 तक

✍🏼6️⃣1️⃣

भाव बिगड़े
तो भव बिगड़ेगा
शुद्ध हों भाव।
🌾✨

✍🏼6️⃣2️⃣

जिनवाणी है
वो दर्पण, स्वयं को
देखें इसमें।
🌾✨

✍🏼6️⃣3️⃣

रखें विश्वास
खुद पर, जो सोचें
वो कर पाएं।
🌾✨

✍🏼6️⃣4️⃣

कठिन राहें
चाहे डराएं, चल
मंज़िल पा ले।
🌾✨

✍🏼6️⃣5️⃣

आज का श्रम,
सफलता कल की
हार ना मान।
🌾✨

✍🏼6️⃣6️⃣

तर्क से बुद्धि
में धार, तकरार
से टूटें रिश्ते।
🌾✨

✍🏼6️⃣7️⃣

वक्त की युक्ति
सही दिशा जीवन
की , न कि वक्त।
🌾✨

✍🏼6️⃣8️⃣

दिखो ही नहीं,
बनो अच्छा, सम्मान
मिले ताउम्र।
🌾✨

✍🏼6️⃣9️⃣

कड़वा पौधा
है धैर्य, फल आते
हमेशा मीठे।
🌾✨

✍🏼7️⃣0️⃣

अनुशासन
कुंजी सफलता की
करें पालन।
🌾✨

 

*हाइकु मूल रूप से जापान की एक अत्यंत लोकप्रिय और सबसे छोटी काव्य शैली है,जिसकी मुख्य विशेषता है कि यह केवल तीन पंक्तियों की कविता होती है। इसमें कुल 17 वर्ण (syllables) होते हैं, जिनका क्रम 5-7-5 (पहली पंक्ति में 5, दूसरी में 7, और तीसरी में 5) का होता है।*

*संयुक्ताक्षर, मात्रा, अनुस्वार, चंद्रबिंदु, विसर्ग, हलन्त वाला व्यंजन आदि अलग syllable (अक्षर-खंड) नहीं बनाते हैं।*

*हायकू में संक्षेप में सार गर्भित बहु अर्थ को प्रकट करने वाले शिक्षाप्रद व प्रेरणास्पद विचार होते हैं।*

 

*✍🏼हाइकु रचयिता* :-
राजेन्द्र प्रसाद जैन
76 मुक्तानंद नगर जयपुर

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