श्री पल्लीवाल जैन डिजिटल पत्रिका

अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा

(पल्लीवाल, जैसवाल, सैलवाल सम्बंधित जैन समाज)

मरो परन्तु यों मरो कि याद करें सभी । । व्यक्ति बड़ा नहीं होता है उसका व्यक्तित्व बड़ा होता है ।।

अशोक जी जयपुर से मेरे पास दुख भरा समाचार आया की क्रान्ति कुमार जी जैन हम सबको छोडकर चले गये। यह जानकर मुझे गहरा धक्का लगा। मैं सोचने लगा कि जीवन मरण अपने हाथ में नहीं है वह कर्मों के आधीन है।
क्रान्ति कुमार जी पल्लीवाल महासभा के जनक थे आज से करीब साठ वर्ष पूर्व उन्होने पल्लीवाल समाज में एक अलख जगाया था, उस समय लोगों में ज्यादा दिलचस्पी नहीं थी लेकिन इन्होंने कुछ लोगों को अपने साथ लिया और निकल पडे गांवों में, शहरो में, छोटी-छोटी बस्तियों में जहाँ पल्लीवाल समाज रहती थी। उस समय आपकी लगन और प्रेरणा से पल्लीवाल समाज की पहचान एक दूसरों से होने लगी और इनसे लोग कहते थे कि आप इतने बड़े सरकारी पद पर हैं फिर भी घर-घर गली-गली साईकिल पर मिलने जाते हैं ये इनकी महानता थी। पल्लीवाल महासभा की स्थापना का बीज इन्होनें बोया वह कुछ सालों के अंदर बड़े पोधे के रूप में विकसित होता चला गया। वह काफी समय समाज के बडे-2 पदों पर रहे, और उनके बाद बहुत से लोग आये और चले गये।
मुझे याद है कि जब में महासभा का अध्यक्ष बना तब सबसे पहले मैं क्रान्ति कुमार जी से मिलने गया और उनसे आर्शीवाद लिया और उनसे कहने लगा कि मैं इतना बड़ा पद कैसे संभाल पाऊँगा, तो उन्होनें कहा शिखर जी आप अच्छे व्यक्ति हैं उन्होने मुझे 2–3 गुरू मंत्र दिये।

1. अध्यक्ष को शान्त एवं सरल होना है, सबकी सुनना है और सब से मित्रता का व्यवहार करना है अगर कोई अपशब्द भी कहे तो उसको प्यार से समझा देना है। आपको अपनी पद की गरिमा को बनाये रखना है समाज हित में अगर झुकना पड़े तो सहजता पूर्व नम्र हो जाना। समाज की गरिमा को बनाये रखना है क्योंकि समाज में यह पद शिरोमणियों को ही मिलता है। इतनी बड़ी सीख को मैने हृदय में उतारा और समाज में एकता बनाये रखी। जब भी आगरा आते थे मुझसे मिलने जरूर घर आते थे और पूछते थे कि महासभा का संचालन अच्छी तरह से चल रहा है।

मैं जब भी जयपुर जाता था अशोक जी को लेकर उनके घर जाता था और उनसे दिशा निर्देश लेता रहता था।
आज वह हमारे बीच नहीं है यद्यपि सबको जाना है इस जगत मै कोई अमर नहीं है आज मैं उनको हृदय से श्रद्धान्जली दे रहा हूँ और समाज से निवेदन कर रहा हूँ कि व्यक्ति बड़ा नहीं होता है व्यक्तित्व बडा होता है, इसलिये उन्होनें जो रास्ता दिखाया है हम सबको शान्ति पूर्वक उस रास्ते पर चलकर समाज का उद्धार करना है। यह हमारी उनके प्रति सच्ची श्रद्धान्जली होगी।

सिंघई शिखरचन्द्र जैन
पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, पल्लीवाल महासभा
आगरा

Leave a Reply