श्री पल्लीवाल जैन डिजिटल पत्रिका

अखिल भारतीय पल्लीवाल जैन महासभा

(पल्लीवाल, जैसवाल, सैलवाल सम्बंधित जैन समाज)

मित्रता का संकट

मित्रता का संकट आज पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ रहा है।
वर्ष 1990 से अब तक अमेरिका में “मेरा कोई घनिष्ठ मित्र नहीं है” कहने वाले लोगों की संख्या चार गुना बढ़कर 12% हो गई है।
वहीं 10 या उससे अधिक घनिष्ठ मित्र रखने वाले लोगों की संख्या में एक-तिहाई की कमी आई है।
भारत के शहरी क्षेत्रों में भी यही स्थिति दिखाई दे रही है। परिचितों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन सच्चे मित्र कम होते जा रहे हैं।
पहले लोग कैफ़े, क्लब या सामाजिक आयोजनों में अनजान लोगों से भी सहजता से मिलते-जुलते थे। आज भीड़ में भी लोग अकेलेपन का अनुभव कर रहे हैं।
अमेरिका में पिछले दो वर्षों में अकेले भोजन करने वाले लोगों की संख्या 29% बढ़ गई है।
स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय ने तो मित्रता (Friendship) पर एक विशेष पाठ्यक्रम भी शुरू किया है।
यह केवल सामाजिक समस्या नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चुनौती भी है।
मित्रों के लिए समय निकालना अब विलासिता नहीं, बल्कि जीवन की आवश्यकता बन गया है।
अकेलापन धीरे-धीरे एक आदत और फिर लत बनता जा रहा है। यदि हमने मित्रता का सम्मान नहीं किया, तो हम केवल नए मित्र ही नहीं, बल्कि पुराने रिश्ते भी खो देंगे।
शोध क्या कहते हैं?
अकेलापन हृदय रोग, डिमेंशिया (स्मृति क्षय) और समय से पहले मृत्यु का खतरा बढ़ा देता है।
इसका दुष्प्रभाव प्रतिदिन 15 सिगरेट पीने जितना हानिकारक माना गया है।
मित्रता मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है।
हार्वर्ड विश्वविद्यालय के 80 वर्षों तक चले अध्ययन के अनुसार, सच्ची खुशी और अच्छे स्वास्थ्य का सबसे बड़ा आधार घनिष्ठ रिश्ते हैं।
धन कमाया जा सकता है, प्रतिष्ठा बदल सकती है, लेकिन सच्चा मित्र वही है जो हर परिस्थिति में आपके साथ खड़ा रहे।
मित्रता ऐसी अमूल्य पूंजी है जो कभी समाप्त नहीं होती। इसलिए केवल परिचित बनाने तक सीमित न रहें, बल्कि सच्ची मित्रता को महत्व दें, क्योंकि अच्छे मित्र ही जीवन की वास्तविक संपत्ति हैं।
मित्रता को सहेजिए, उसके लिए समय निकालिए, एक-दूसरे को क्षमा कीजिए और साथ मिलकर यादगार पल बनाइए।
सच्चे मित्रों के साथ जीवन अधिक सुंदर, सुखद और सार्थक बन जाता है।
ईश्वर करे, आप सदैव अपने सच्चे मित्रों के साथ स्वस्थ, सुखी और आनंदमय जीवन बिताएँ।

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